30 जुलाई 2026
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सहारनपुर पुलिस-एटीएस की संयुक्त कार्रवाई: 17 साल से फरार ₹25,000 इनामी बांग्लादेशी जाहिद गिरफ्तार

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सहारनपुर पुलिस-एटीएस की संयुक्त कार्रवाई: 17 साल से फरार ₹25,000 इनामी बांग्लादेशी जाहिद गिरफ्तार

सारांश

17 साल की चालाकी, अलग-अलग राज्य, बदली-बदली पहचान — और अंत में साइफन पुलिया पर घेराबंदी। सहारनपुर पुलिस और एटीएस ने ₹25,000 के इनामी बांग्लादेशी जाहिद को दबोचा, जिसके पास से नकली आधार और बांग्लादेशी पहचान पत्र मिला; म्यांमार-नेपाल कनेक्शन की जाँच जारी।

मुख्य बातें

सहारनपुर पुलिस और एटीएस की संयुक्त टीम ने 13 जून 2026 को 17 वर्षों से फरार बांग्लादेशी नागरिक जाहिद को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर ₹25,000 का इनाम घोषित था और अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया हुआ था।
गिरफ्तारी के समय आरोपी डेराबस्सी, मोहाली (पंजाब) में रह रहा था; स्थायी पता जिला बंदरबन, बांग्लादेश है।
उसके पास से नकली आधार कार्ड , बांग्लादेशी पहचान पत्र और अन्य संदिग्ध दस्तावेज़ बरामद हुए।
जाँच में म्यांमार, बांग्लादेश और अन्य देशों के नागरिकों से संपर्क तथा नेपाली पत्नी का ब्यौरा उजागर हुआ।
आरोपी पर आईपीसी की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और फॉरेनर्स एक्ट धारा 14 के तहत नया मुकदमा दर्ज।

उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस और एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने 13 जून 2026 को संयुक्त अभियान चलाकर 17 वर्षों से फरार ₹25,000 के इनामी बांग्लादेशी नागरिक जाहिद को गिरफ्तार किया। आरोपी 2009 से लगातार अपनी पहचान बदलकर विभिन्न राज्यों में छिपता रहा था और अदालत के गैर-जमानती वारंट के बावजूद पुलिस की पकड़ से बाहर था।

मामले की पृष्ठभूमि

2009 में तत्कालीन इंटेलिजेंस यूनिट के सब-इंस्पेक्टर इंद्रपाल सिंह की शिकायत पर कुतुबशेर पुलिस स्टेशन में फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जाँच में सामने आया कि छह बांग्लादेशी नागरिक वैध पासपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज़ों के बिना भारत में प्रवेश कर अलग-अलग स्थानों पर काम कर रहे थे। इनमें से तीन आरोपियों को अदालत ने सज़ा सुनाई, जबकि जाहिद जमानत मिलते ही फरार हो गया और लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं हुआ। गौरतलब है कि लंबे समय तक गैरहाज़िर रहने के बाद अदालत ने उसके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया और ₹25,000 का इनाम घोषित किया गया।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसएसपी) के निर्देश पर वांछित अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में थाना इंचार्ज चिलकाना विनोद कुमार और एटीएस यूनिट सहारनपुर के इंस्पेक्टर इंचार्ज सुधीर कुमार उज्ज्वल के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। एक मुखबिर से सूचना मिलने पर कि आरोपी क्षेत्र में मौजूद है, टीम ने साइफन पुलिया के पास घेराबंदी कर जाहिद को दबोच लिया। पूछताछ में उसकी पहचान की पुष्टि हुई।

आरोपी की पहचान और ठिकाना

गिरफ्तारी के समय आरोपी डेराबस्सी, एसएएस नगर, मोहाली (पंजाब) में रह रहा था। उसका स्थायी पता थाना लेफ्कासरी, जिला बंदरबन (बांग्लादेश) बताया गया है। उसके पास से एक बांग्लादेशी पहचान पत्र और एक वीवो मोबाइल फोन बरामद हुआ। मोबाइल की तलाशी में एक नकली आधार कार्ड और अन्य संदिग्ध दस्तावेज़ मिले। इन साक्ष्यों के आधार पर थाना चिलकाना में आईपीसी की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत नया मुकदमा दर्ज किया गया है।

जाँच में उभरे गंभीर पहलू

प्रारंभिक जाँच में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। जाँच एजेंसियों को म्यांमार और बांग्लादेश के अलावा अन्य देशों के लोगों से आरोपी के संपर्कों की जानकारी मिली है। इसके अतिरिक्त उसकी पत्नी नेपाल की रहने वाली बताई जा रही है, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है। पुलिस और एटीएस अब आरोपी के नेटवर्क, संपर्कों और देश में छिपे संभावित साथियों की पड़ताल कर रही हैं। यह भी जाँचा जा रहा है कि उसने भारत में रहते हुए नकली दस्तावेज़ों का उपयोग कैसे किया और इसमें किसने उसकी सहायता की।

आगे की कार्रवाई

सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले को अवैध घुसपैठ और फर्ज़ी दस्तावेज़ नेटवर्क के व्यापक कोण से देख रही हैं। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश पुलिस वांछित अपराधियों के विरुद्ध विशेष अभियान चला रही है। आने वाले दिनों में आरोपी की विस्तृत पूछताछ से और कड़ियाँ उजागर होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुव्यवस्थित नेटवर्क की कड़ी हो सकती है। असली सवाल यह है कि इतने वर्षों में किसी भी राज्य की पुलिस या आधार सत्यापन तंत्र ने इसे क्यों नहीं पकड़ा — और क्या ऐसे और लोग अभी भी प्रणाली की दरारों में छिपे हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सहारनपुर में गिरफ्तार बांग्लादेशी जाहिद कौन है?
जाहिद एक बांग्लादेशी नागरिक है जिसका स्थायी पता जिला बंदरबन, बांग्लादेश है। वह 2009 में फॉरेनर्स एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में जमानत मिलने के बाद फरार हो गया था और 17 वर्षों तक अलग-अलग राज्यों में नकली पहचान के साथ रहता रहा।
जाहिद को किस आधार पर गिरफ्तार किया गया?
अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट और ₹25,000 के इनाम के आधार पर सहारनपुर पुलिस-एटीएस की संयुक्त टीम ने उसे साइफन पुलिया के पास घेराबंदी कर पकड़ा। उसके पास से नकली आधार कार्ड, बांग्लादेशी पहचान पत्र और संदिग्ध दस्तावेज़ बरामद हुए।
इस मामले में कौन-कौन सी धाराएँ लगाई गई हैं?
थाना चिलकाना में आईपीसी की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत नया मुकदमा दर्ज किया गया है। इससे पहले 2009 में कुतुबशेर थाने में भी फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज था।
जाँच में अब तक क्या गंभीर तथ्य सामने आए हैं?
प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि आरोपी के म्यांमार और बांग्लादेश के अलावा अन्य देशों के नागरिकों से संपर्क हैं। उसकी पत्नी नेपाल की रहने वाली बताई जा रही है। पुलिस और एटीएस अब उसके पूरे नेटवर्क और नकली दस्तावेज़ बनाने में सहायता करने वालों की जाँच कर रही हैं।
यह गिरफ्तारी कैसे संभव हुई?
एसएसपी के निर्देश पर चल रहे विशेष अभियान के तहत एक मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी क्षेत्र में मौजूद है। इसके बाद थाना इंचार्ज चिलकाना विनोद कुमार और एटीएस इंस्पेक्टर इंचार्ज सुधीर कुमार उज्ज्वल के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने साइफन पुलिया के पास घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
राष्ट्र प्रेस
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