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बारामूला में OGW गिरफ्तार: MP-5 पिस्तौल, 10 कारतूस और मोबाइल बरामद, आतंकी नेटवर्क की जांच जारी

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बारामूला में OGW गिरफ्तार: MP-5 पिस्तौल, 10 कारतूस और मोबाइल बरामद, आतंकी नेटवर्क की जांच जारी

सारांश

बारामूला के जंडफरान-गोरीवान क्रॉसिंग पर सेना, SOG, CRPF और BSF के संयुक्त नाके में एक संदिग्ध OGW को दबोचा गया। उसके पास से MP-5 पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस मिले — घाटी में आतंकी सहयोगी नेटवर्क के खिलाफ जारी अभियान में ताज़ा और अहम कामयाबी।

मुख्य बातें

2 अगस्त को बारामूला के जंडफरान-गोरीवान क्रॉसिंग पर संयुक्त नाके के दौरान संदिग्ध OGW एजाज अहमद गनी को गिरफ्तार किया गया।
आरोपी के पास से कैमोफ्लाज MP-5 टाइप पिस्तौल , 10 जिंदा 9 एमएम कारतूस , एक मोबाइल फोन और काला बैकपैक बरामद हुआ।
अभियान में 46 राष्ट्रीय राइफल्स , SOG बारामूला , CRPF की 53वीं बटालियन और BSF की 112वीं बटालियन शामिल थीं।
आरोपी नंबलन, शीरी क्षेत्र , बारामूला का निवासी है; पुलिस स्टेशन शीरी में FIR दर्ज।
सुरक्षा एजेंसियाँ आरोपी के आतंकी नेटवर्क से संबंधों और हथियारों के स्रोत की जाँच कर रही हैं।

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में सुरक्षाबलों ने 2 अगस्त को एक संयुक्त नाका अभियान के दौरान एक संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) को गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से एक कैमोफ्लाज MP-5 टाइप पिस्तौल, 10 जिंदा 9 एमएम कारतूस, एक मोबाइल फोन और एक काला बैकपैक बरामद हुआ। यह कार्रवाई घाटी में आतंकवाद-विरोधी अभियान की कड़ी में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।

संयुक्त अभियान और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

भारतीय सेना की 46 राष्ट्रीय राइफल्स, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) बारामूला, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की 53वीं बटालियन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 112वीं बटालियन ने मिलकर नरवाव क्षेत्र के जंडफरान-गोरीवान क्रॉसिंग पर संयुक्त चेकपोस्ट स्थापित की थी। इस दौरान आने-जाने वाले व्यक्तियों और वाहनों की सघन जाँच की जा रही थी।

चेकिंग के दौरान गोरीवान की दिशा से आ रहा एक व्यक्ति सुरक्षाबलों को देखते ही मौके से भागने की कोशिश करने लगा। उसकी संदिग्ध हरकत को देखते हुए जवानों ने उसे तत्काल दबोच लिया। पूछताछ और तलाशी के बाद उसके पास से उपरोक्त हथियार एवं सामग्री बरामद की गई।

आरोपी की पहचान और OGW की भूमिका

गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान एजाज अहमद गनी के रूप में हुई है, जो स्वर्गीय मोहम्मद सुल्तान गनी का पुत्र है और बारामूला जिले के नंबलन, शीरी क्षेत्र का निवासी बताया गया है। प्रारंभिक जाँच में उसे OGW के रूप में चिन्हित किया गया है।

गौरतलब है कि OGW वे व्यक्ति होते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से किसी आतंकवादी संगठन का हिस्सा नहीं होते, लेकिन उन्हें रसद, ठिकाना, सूचना अथवा अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराते हैं। यह नेटवर्क सक्रिय आतंकियों की 'जीवन-रेखा' माना जाता है।

एफआईआर और जाँच की स्थिति

इस मामले में पुलिस स्टेशन शीरी में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। सुरक्षा एजेंसियाँ अब आरोपी के संपर्कों, गतिविधियों और संभावित आतंकी नेटवर्क से उसके संबंधों की गहन जाँच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, बरामद हथियारों के स्रोत और उनके संभावित उपयोग के बारे में भी पड़ताल जारी है।

सुरक्षाबलों का रुख और आगे की रणनीति

सुरक्षाबलों ने स्पष्ट किया है कि घाटी में आतंकवाद और उसके सहयोगी नेटवर्क पर निरंतर नज़र रखी जा रही है। संयुक्त अभियान आगे भी जारी रहेंगे ताकि क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखी जा सके और किसी भी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल OGW नेटवर्क को तोड़ने पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस 'छाया नेटवर्क' की परत उघाड़ती है जिसके बिना घाटी में सक्रिय आतंकी टिक नहीं सकते। OGW तंत्र पर केंद्रित कार्रवाइयाँ पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या इस गिरफ्तारी से आपूर्ति शृंखला के ऊपरी सिरे तक पहुँचा जा सकेगा। MP-5 टाइप हथियार की बरामदगी यह भी संकेत देती है कि हथियारों की तस्करी के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं — यह जाँच एजेंसियों के लिए सबसे ज़रूरी सवाल है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बारामूला में गिरफ्तार OGW एजाज अहमद गनी कौन है?
एजाज अहमद गनी बारामूला जिले के नंबलन, शीरी क्षेत्र का निवासी है और स्वर्गीय मोहम्मद सुल्तान गनी का पुत्र बताया गया है। प्रारंभिक जाँच में उसे ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में चिन्हित किया गया है, जो आतंकी संगठनों को रसद, ठिकाना या सूचना उपलब्ध कराते हैं।
OGW क्या होता है और यह आतंकी नेटवर्क से कैसे जुड़ा होता है?
OGW यानी ओवर ग्राउंड वर्कर वे व्यक्ति होते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से किसी आतंकवादी संगठन का हिस्सा नहीं होते, लेकिन उन्हें रसद, आश्रय, सूचना या धन उपलब्ध कराकर सहायता करते हैं। ये सक्रिय आतंकियों और स्थानीय आबादी के बीच कड़ी का काम करते हैं।
बारामूला के इस संयुक्त अभियान में कौन-कौन सी सुरक्षा एजेंसियाँ शामिल थीं?
इस अभियान में भारतीय सेना की 46 राष्ट्रीय राइफल्स, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) बारामूला, CRPF की 53वीं बटालियन और BSF की 112वीं बटालियन ने मिलकर नरवाव क्षेत्र के जंडफरान-गोरीवान क्रॉसिंग पर संयुक्त नाका लगाया था।
गिरफ्तारी के बाद क्या कानूनी कार्रवाई की गई है?
पुलिस स्टेशन शीरी में संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। सुरक्षा एजेंसियाँ आरोपी के संपर्कों, आतंकी नेटवर्क से संबंधों और बरामद हथियारों के स्रोत की गहन जाँच कर रही हैं।
बारामूला में इस तरह की कार्रवाइयाँ कितनी अहम हैं?
सुरक्षाबलों के अनुसार OGW नेटवर्क को तोड़ना आतंकवाद-विरोधी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा है। बरामद MP-5 टाइप पिस्तौल जैसे हथियार यह संकेत देते हैं कि हथियारों की तस्करी अभी भी जारी है, और इस गिरफ्तारी को आपूर्ति शृंखला की जाँच में अहम कड़ी माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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