बी.सी. खंडूरी की तेरहवीं में उमड़ा जनसैलाब, धामी-रामदेव समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
देहरादून में 1 जून को पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भुवन चंद्र खंडूरी की तेरहवीं के अवसर पर राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जगत से जुड़े सैकड़ों लोग एकत्र हुए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी, आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी और योग गुरु बाबा रामदेव समेत अनेक प्रमुख हस्तियों ने दिवंगत नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री धामी की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, 'खंडूरी जी का निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है।' उन्होंने खंडूरी को 'एक सच्चे योद्धा, अनुशासित सैनिक और समर्पित समाजसेवी' बताया और कहा कि सेना से लेकर राजनीति तक उन्होंने हर जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाई। धामी ने यह भी कहा कि खंडूरी जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
रीता बहुगुणा जोशी का संस्मरण
पूर्व केंद्रीय मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि खंडूरी जी उस पीढ़ी के नेता थे जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के बाद देश निर्माण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारा। उन्होंने कहा, 'खंडूरी जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि खुद को भारत का सेवक मानते थे।' जोशी ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और सांसद के रूप में उनके पूरे सार्वजनिक जीवन में कभी भ्रष्टाचार या अनियमितता का कोई आरोप नहीं लगा।
जोशी ने राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने में खंडूरी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि खंडूरी रिश्तों को निभाना जानते थे और अपनी माँ की सेवा को लेकर उन्होंने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की। उनके अनुसार, खंडूरी का जीवन 'कर्तव्य, अनुशासन और सेवा का पाठ' पढ़ाता है।
संतों और धार्मिक जगत की संवेदनाएँ
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने कहा कि उत्तराखंड को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में खंडूरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि एक छोटे से गाँव से निकलकर देश के बड़े-बड़े पदों तक पहुँचना और हर जिम्मेदारी को कुशलता से निभाना उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी। कैलाशानंद गिरी ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
योग गुरु बाबा रामदेव ने खंडूरी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व 'हिमालय की तरह विशाल और ऊँचा था।' रामदेव ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण और विकास में उनका योगदान सदा स्मरणीय रहेगा और उन्होंने सेना व राजनीति दोनों क्षेत्रों में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के उच्च आदर्श स्थापित किए।
तेरहवीं में जनसैलाब का संदेश
गौरतलब है कि देहरादून में आयोजित इस तेरहवीं समारोह में समाज के हर वर्ग के लोगों की उपस्थिति ने खंडूरी के प्रति जनसाधारण के गहरे सम्मान और प्रेम को प्रतिबिंबित किया। कैलाशानंद गिरी ने इसे खंडूरी की विरासत का प्रमाण बताया। यह समारोह उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में एक स्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।
खंडूरी के आदर्शों और योगदान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ उपस्थित नेताओं और संतों ने उनके परिवार को ढाँढस बँधाया और आश्वस्त किया कि उनकी विरासत को जीवित रखा जाएगा।