17 जुलाई 2026
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बेगूसराय कोर्ट ने गिरिराज सिंह की अग्रिम जमानत बरकरार रखी, 'दो गज जमीन' बयान मामले में सुनवाई जारी

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बेगूसराय कोर्ट ने गिरिराज सिंह की अग्रिम जमानत बरकरार रखी, 'दो गज जमीन' बयान मामले में सुनवाई जारी

सारांश

सात साल पुराने 'दो गज जमीन' बयान मामले में बेगूसराय की एमपी-एमएलए कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की अग्रिम जमानत बरकरार रखी। अभियोजन पक्ष अब तक प्रमाणित वॉयस रिकॉर्डिंग और अहम दस्तावेज पेश नहीं कर सका है। पेशी-छूट याचिका पर फैसला सुरक्षित।

मुख्य बातें

बेगूसराय एमपी-एमएलए कोर्ट ने 1 जून 2026 को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की अग्रिम जमानत बरकरार रखी।
मामला 6 अप्रैल 2019 को जीडी कॉलेज परिसर, बेगूसराय में दिए गए कथित 'दो गज जमीन' बयान से जुड़ा है।
अदालत ने CrPC धारा 205 के तहत व्यक्तिगत पेशी से स्थायी छूट की याचिका पर निर्णय सुरक्षित रखा।
बचाव पक्ष के अनुसार, अभियोजन पक्ष अब तक कथित भाषण की प्रमाणित वॉयस रिकॉर्डिंग और जब्ती के अभिलेख पेश नहीं कर सका।
एफआईआर तत्कालीन जिलाधिकारी राहुल कुमार के निर्देश पर नगर थाना, बेगूसराय में दर्ज हुई थी।

बिहार के बेगूसराय स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने सोमवार, 1 जून 2026 को केंद्रीय कपड़ा मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह को 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित 'दो गज जमीन' बयान से जुड़े मामले में पहले से दी गई अग्रिम जमानत बरकरार रखी। अदालत ने उनकी व्यक्तिगत पेशी से स्थायी छूट की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

मुख्य घटनाक्रम

गिरिराज सिंह बेगूसराय की एक दिवसीय यात्रा के दौरान स्वयं अदालत में उपस्थित हुए और सुनवाई में भाग लिया। उनके वकील ने कोर्ट से राहत जारी रखने का अनुरोध किया और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 205 के अंतर्गत भविष्य की सुनवाइयों में व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट माँगी। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पूर्व में दी गई अग्रिम जमानत को प्रभावी बनाए रखने का आदेश दिया।

बाद में पत्रकारों से बातचीत में गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि यह मामला 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक मकसद से दर्ज कराया गया था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रंजिश के चलते उन पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने से जुड़े प्रावधानों के तहत आरोप थोपे गए।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार 'अमर' के अनुसार, विवादित बयान 6 अप्रैल 2019 को बेगूसराय के जीडी कॉलेज परिसर में आयोजित एक जनसभा में दिया गया था। इस कथित बयान को 'दो गज जमीन' वाले बयान के रूप में जाना जाता है, जिसने उस समय तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा किया था।

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, तत्कालीन जिलाधिकारी राहुल कुमार के निर्देश पर तत्कालीन अंचल अधिकारी के माध्यम से नगर थाना, बेगूसराय में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में भड़काऊ भाषण देने और सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने से संबंधित आरोप शामिल हैं।

बचाव पक्ष की दलीलें

बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि घटना के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी अभियोजन पक्ष वे साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका जिन्हें वह स्वयं अहम मानता है। बचाव पक्ष के अनुसार, कथित भाषण की कोई प्रमाणित वॉयस रिकॉर्डिंग और जब्ती से संबंधित अभिलेख सहित अन्य महत्त्वपूर्ण दस्तावेज अब तक अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री के रूप में गिरिराज सिंह व्यापक प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं, फिर भी उन्होंने न्यायिक निर्देशों का पालन करते हुए स्वयं उपस्थित होकर अदालत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।

सरकार की प्रतिक्रिया

गिरिराज सिंह ने न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए अदालत से मिली राहत का स्वागत किया और मामले पर निष्पक्ष विचार के लिए न्यायपालिका को धन्यवाद दिया।

आगे क्या

अदालत ने CrPC धारा 205 के तहत व्यक्तिगत पेशी से स्थायी छूट की याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा है, जो आगामी सुनवाई में सुनाया जाएगा। यह मामला 2019 के चुनाव से उपजा है और सात वर्षों बाद भी विचाराधीन है, जो राजनीतिक बयानों पर आधारित आपराधिक मुकदमों में न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सवाल उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। दूसरी ओर, राजनीतिक प्रेरणा का आरोप लगाना एक परिचित रणनीति है जो जवाबदेही की माँग को कमज़ोर कर सकती है। असली सवाल यह है कि क्या अदालती प्रक्रिया में इस तरह के मामलों के त्वरित निपटारे का कोई तंत्र है — या ये मुकदमे सत्ता के गलियारों में केवल राजनीतिक हथियार बने रहते हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिरिराज सिंह के 'दो गज जमीन' बयान मामले में कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
बेगूसराय एमपी-एमएलए कोर्ट ने 1 जून 2026 को गिरिराज सिंह की पहले से दी गई अग्रिम जमानत बरकरार रखी। अदालत ने CrPC धारा 205 के तहत व्यक्तिगत पेशी से स्थायी छूट की याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
'दो गज जमीन' बयान विवाद क्या है?
यह विवाद 6 अप्रैल 2019 को बेगूसराय के जीडी कॉलेज परिसर में एक चुनावी जनसभा में गिरिराज सिंह द्वारा दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। इस बयान पर भड़काऊ भाषण और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने के आरोप लगे और तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर थाना में एफआईआर दर्ज हुई।
अभियोजन पक्ष के पास मामले में क्या साक्ष्य हैं?
बचाव पक्ष के अनुसार, सात वर्ष बाद भी अभियोजन पक्ष कथित भाषण की कोई प्रमाणित वॉयस रिकॉर्डिंग और जब्ती से संबंधित अभिलेख सहित अन्य अहम दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश नहीं कर सका है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।
CrPC धारा 205 के तहत छूट का क्या अर्थ है?
CrPC धारा 205 के अंतर्गत अदालत किसी आरोपी को हर सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दे सकती है और उसके स्थान पर वकील को पेश होने की अनुमति दे सकती है। गिरिराज सिंह ने केंद्रीय मंत्री के रूप में व्यापक प्रशासनिक दायित्वों का हवाला देते हुए यह छूट माँगी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अदालत ने व्यक्तिगत पेशी से स्थायी छूट की याचिका पर निर्णय सुरक्षित रखा है, जो आगामी सुनवाई में सुनाया जाएगा। मामले की सुनवाई जारी रहेगी और अभियोजन पक्ष से लंबित साक्ष्य प्रस्तुत करने की अपेक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
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