31 जुलाई 2026
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बिक्रम सिंह मजीठिया को अमृतसर अदालत से अग्रिम जमानत, थाना-कांड मामले में बड़ी राहत

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बिक्रम सिंह मजीठिया को अमृतसर अदालत से अग्रिम जमानत, थाना-कांड मामले में बड़ी राहत

सारांश

अमृतसर अदालत ने अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को थाने में घुसकर बंदी छुड़ाने के आरोप वाले मामले में अग्रिम जमानत दे दी। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही उस बंदी की गिरफ्तारी को असंवैधानिक बता चुका था। अकाली दल ने इसे AAP सरकार के राजनीतिक प्रतिशोध की हार बताया।

मुख्य बातें

अमृतसर जिला अदालत ने 15 जून को शिरोमणि अकाली दल (बादल) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और दो अन्य को अग्रिम जमानत दी।
मामला पुलिस स्टेशन में घुसकर बंदी जोबनप्रीत सिंह को छुड़ाने के प्रयास से जुड़ा है; पुलिस ने हथियार लहराने और दस्तावेज नष्ट करने का आरोप लगाया।
मजीठिया के कानूनी सलाहकार बिक्रमजीत बाठ को SIT की सिफारिश पर अदालत ने बरी किया।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय पहले ही जोबनप्रीत सिंह की गिरफ्तारी को असंवैधानिक करार दे चुका था।
अकाली दल प्रवक्ता अर्शदीप कलेर ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर संवैधानिक सीमाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया।

अमृतसर की एक जिला अदालत ने सोमवार, 15 जून को शिरोमणि अकाली दल (बादल) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और दो अन्य आरोपियों को पुलिस स्टेशन में घुसकर एक बंदी को छुड़ाने के प्रयास से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। इस फैसले को अकाली दल ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कथित राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ न्यायिक जीत बताया है।

मामले की पृष्ठभूमि

पुलिस के अनुसार, मजीठिया और उनके समर्थक एक थाने में घुस गए और अकाली समर्थक जोबनप्रीत सिंह को जबरन रिहा कराने की कोशिश की। पुलिस का आरोप है कि मजीठिया ने एक सब-इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन छीन लिया, सरकारी दस्तावेज फाड़े, और उनके साथियों ने थाने के अंदर हथियार लहराए तथा केस फाइलों को नुकसान पहुँचाया। इन आरोपों के आधार पर मजीठिया और अन्य के विरुद्ध सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और थाने में हंगामा करने का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी भी कर रही थी।

बिक्रमजीत बाठ को मिली क्लीन चिट

अदालत की कार्यवाही में एक अहम घटनाक्रम यह रहा कि मजीठिया के कानूनी सलाहकार बिक्रमजीत बाठ — जिनका नाम प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में दर्ज था — को विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा अदालत को यह सूचित किए जाने के बाद बरी कर दिया गया कि मामले में उनकी आवश्यकता नहीं है। बाठ एक वकील की हैसियत से जोबनप्रीत सिंह के खिलाफ दर्ज FIR की प्रति प्राप्त करने के लिए मजीठिया के साथ गए थे।

अकाली दल की प्रतिक्रिया

पार्टी प्रवक्ता अर्शदीप कलेर ने कहा कि इस अदालती आदेश ने एक बार फिर AAP सरकार द्वारा राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कथित तौर पर चलाए जा रहे मनगढ़ंत मामलों की पोल खोल दी है। कलेर ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस अधिकारियों पर संवैधानिक सीमाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय पहले ही जोबनप्रीत सिंह की गिरफ्तारी को असंवैधानिक करार दे चुका था।

मजीठिया थाने क्यों पहुँचे थे

कलेर के अनुसार, मजीठिया जोबनप्रीत सिंह के परिवार और कीर्ति किसान यूनियन के नेतृत्व में चल रहे धरने में शामिल हुए थे, और उनका उद्देश्य थाने में बंद जोबनप्रीत की रिहाई सुनिश्चित करना था — न कि कानून व्यवस्था को बाधित करना। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में सत्तारूढ़ AAP और विपक्षी शिरोमणि अकाली दल के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

अग्रिम जमानत मिलने के बाद अब मजीठिया को तत्काल गिरफ्तारी का खतरा नहीं रहा, हालाँकि मामले की जाँच SIT के पास जारी है। अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है, और यह देखना होगा कि AAP सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी FIR दर्ज हुई — यह विरोधाभास सवाल उठाता है। AAP सरकार और अकाली दल दोनों ही इस मामले को अपनी-अपनी राजनीतिक कथा के अनुरूप भुना रहे हैं, जबकि असली सवाल यह है कि पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बंदी को हिरासत में क्यों रखा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिक्रम सिंह मजीठिया को किस मामले में अग्रिम जमानत मिली?
मजीठिया को अमृतसर के एक थाने में घुसकर अकाली समर्थक जोबनप्रीत सिंह को जबरन छुड़ाने के प्रयास से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत मिली। पुलिस ने उन पर सब-इंस्पेक्टर का फोन छीनने, दस्तावेज फाड़ने और थाने में हथियार लहराने के आरोप लगाए थे।
जोबनप्रीत सिंह कौन हैं और उनकी गिरफ्तारी क्यों विवादास्पद रही?
जोबनप्रीत सिंह एक अकाली समर्थक हैं जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी को असंवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद मजीठिया उनकी रिहाई के लिए थाने पहुँचे थे।
बिक्रमजीत बाठ को मामले से क्यों बरी किया गया?
बिक्रमजीत बाठ मजीठिया के कानूनी सलाहकार हैं जो एक वकील की हैसियत से FIR की प्रति लेने थाने गए थे। SIT ने अदालत को सूचित किया कि मामले में उनकी आवश्यकता नहीं है, जिसके बाद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
अकाली दल ने इस फैसले पर क्या कहा?
पार्टी प्रवक्ता अर्शदीप कलेर ने कहा कि यह आदेश AAP सरकार द्वारा विरोधियों को दबाने के लिए कथित तौर पर चलाए जा रहे मनगढ़ंत मामलों को उजागर करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस पर संवैधानिक सीमाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अग्रिम जमानत मिलने से मजीठिया को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है, लेकिन SIT की जाँच जारी है। मामले की अगली सुनवाई में SIT की रिपोर्ट और आरोपों की वैधता पर अदालत का रुख अहम होगा।
राष्ट्र प्रेस
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