गोपालगंज हथियार लहराने केस: अनंत सिंह और गुंजन सिंह को मिली अग्रिम जमानत, CID कर रही जांच
सारांश
मुख्य बातें
गोपालगंज की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने सोमवार, 15 जून को मोकामा विधायक अनंत कुमार सिंह और भोजपुरी गायक गुंजन सिंह को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। यह मामला बिहार के गोपालगंज जिले के सेमराव गांव में 2 मई को आयोजित एक उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) समारोह के दौरान कथित तौर पर हथियार लहराने और आपत्तिजनक गाने बजाने से जुड़ा हाई-प्रोफाइल मामला है।
मामले की पृष्ठभूमि
मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव में 2 मई को आयोजित जनेऊ संस्कार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। वायरल क्लिप में कथित तौर पर खुलेआम हथियार दिखाए जा रहे थे और समारोह के दौरान आपत्तिजनक गाने बजाए जा रहे थे। वीडियो फैलने के बाद पुलिस ने अनंत सिंह, गुंजन सिंह समेत कई लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलें
ADJ-3 की अध्यक्षता वाली विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। बचाव पक्ष के वकील कुमार हर्षवर्धन पाठक ने अदालत में तर्क दिया कि वायरल वीडियो एडिटेड और संदिग्ध प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जांचकर्ताओं ने न तो कोई फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट पेश की और न ही कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए हथियार बरामद किए। बचाव पक्ष के अनुसार, एफआईआर बिना पर्याप्त भौतिक साक्ष्य के दर्ज की गई और आरोप मुख्यतः एक अपुष्ट सोशल मीडिया क्लिप पर आधारित हैं।
कोर्ट का फैसला
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने सभी नामजद आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी। इस फैसले से अनंत सिंह और गुंजन सिंह दोनों को बड़ी कानूनी राहत मिली है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।
CID जांच और अनंत सिंह की आपराधिक पृष्ठभूमि
अधिकारियों ने आगे की जांच के लिए मामला पहले ही क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) को सौंप दिया है। उल्लेखनीय है कि अनंत कुमार सिंह पटना के मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन पर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप भी हैं, जिस मामले में वे जेल में रह चुके हैं और फिलहाल जमानत पर हैं।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर CID की जांच और वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच के नतीजों पर टिकी है। यदि FSL रिपोर्ट वीडियो को प्रामाणिक साबित करती है, तो अभियोजन पक्ष के पास मामले को मजबूत करने का आधार होगा। इस केस का परिणाम बिहार की राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।