पश्चिम बंगाल में भारतीय न्याय संहिता लागू: मंत्री शंकर घोष बोले — 'दुष्कृति राज खत्म, अब कानून का राज'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद खगेन मुर्मू और नेता मनोज टिग्गा ने 21 अगस्त को कोलकाता में पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता में आते ही 11 तारीख से BNS लागू कर दी और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को ज़मीन आवंटित करने का काम सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा।
भारतीय न्याय संहिता का महत्व
पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने कहा, 'राज्य में आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू की गई है। आईपीसी में ब्रिटिश शासन की छवि और औपनिवेशिक मानसिकता थी, जो सजा पर केंद्रित था, जबकि BNS न्याय पर केंद्रित है।' उन्होंने बताया कि इसी संदेश को स्कूल-कॉलेज के छात्रों सहित आम जनता तक पहुँचाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनी और सभा के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया।
BSF और सीमा सुरक्षा पर नई सरकार का रुख
मंत्री घोष ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती ममता सरकार BSF को ज़मीन देने से इनकार करती थी और विधानसभा के भीतर भी BSF के विरुद्ध बयानबाज़ी होती थी। उन्होंने कहा कि BSF को अपनी ज़रूरतों के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ता था। उनके अनुसार, नई सरकार ने सत्ता में आते ही सबसे पहला काम BSF को ज़मीन देने का किया, जिससे खुली सीमा के ज़रिये होने वाली घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
TMC सरकार पर BJP के आरोप
BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में TMC के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में संसद द्वारा पारित कानून लागू नहीं होते थे और 'टीएमसी का अपना कानून' चलता था। सांसद खगेन मुर्मू ने कहा, 'एक समय यहाँ भय का वातावरण था, आज यहाँ भरोसे की सरकार बनी है।' उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के हवाले से कहा कि शाह ने ममता बनर्जी के उस बयान को याद दिलाया जिसमें वे कहती थीं 'कुछ नहीं होने वाला' — और आज न वे सत्ता में हैं, न TMC की सरकार।
गृह मंत्री अमित शाह का संदेश
BJP नेताओं के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने इस प्रदर्शनी के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि अब पश्चिम बंगाल में 'रूल ऑफ लॉ' चलेगा और किसी भी प्रकार के आतंक व घुसपैठ पर रोक लगाई जाएगी। सांसद मुर्मू ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 9 तारीख को शपथ ग्रहण की और 11 तारीख से ही BNS को राज्य में लागू कर दिया गया।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा के मुद्दे केंद्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं। गौरतलब है कि BNS पूरे देश में पहले से लागू है, लेकिन राज्य में इसके क्रियान्वयन की गति और राजनीतिक संदेश — दोनों अब नई सरकार की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं। आने वाले दिनों में BSF की नई तैनाती और सीमा प्रबंधन के ठोस कदम इस नीति की असली परीक्षा होंगे।