भारतीय न्याय संहिता पारदर्शी और तकनीक आधारित: अमित शाह ने कोलकाता में TMC पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह ने 21 अगस्त 2026 को कोलकाता में आयोजित एक प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए कहा कि तीन नए आपराधिक कानून — भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) — पुरानी औपनिवेशिक न्याय व्यवस्था की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी, तकनीक-आधारित और समयबद्ध हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने इन कानूनों की अधिसूचना जानबूझकर विलंबित की।
नए कानूनों की मुख्य विशेषताएँ
शाह ने कहा, 'इन तीन नए कानूनों का उद्देश्य नागरिकों, संपत्ति और पीड़ितों की सुरक्षा को मजबूत करना है, साथ ही आपराधिक न्याय प्रक्रिया को तेज करना भी है। ये कानून पहले की व्यवस्था की तरह केवल सजा पर केंद्रित न होकर पीड़ित-केंद्रित हैं।' उन्होंने जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फोरेंसिक साक्ष्य और ऑनलाइन न्यायिक कार्यवाही जैसे प्रावधानों को नई व्यवस्था की ताकत बताया।
पश्चिम बंगाल और TMC पर आरोप
शाह ने पश्चिम बंगाल में पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानूनों की अधिसूचना इसलिए जानबूझकर देर से जारी की गई क्योंकि 'पिछली सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा खड़े किए गए भ्रष्टाचार के किले कुछ ही मिनटों में ढह जाते।' उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने जिस पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए, वह इन्हीं तीन न्याय संहिताओं को लागू करने और ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों को हटाने से संबंधित थी।
पुराने मामलों में जाँच पर सवाल
शाह ने दावा किया कि पूर्व TMC सरकार के कार्यकाल में कई संवेदनशील मामलों में उचित जाँच नहीं हुई। इनमें आरजी कर रेप एवं हत्या मामला, कसबा लॉ कॉलेज मामला, संदेशखाली में महिलाओं के साथ हिंसा और दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज रेप मामला शामिल हैं। ये आरोप TMC की ओर से अभी तक खंडित नहीं किए गए हैं।
तकनीक और त्वरित न्याय पर ज़ोर
शाह ने कहा कि नई न्याय संहिता में तकनीक के बढ़ते उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि पुलिस अपनी जाँच में अधिक तकनीक-आधारित साक्ष्य जुटा सके। उनके अनुसार, इससे मुकदमों की सुनवाई प्रक्रिया तेज होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में लंबित आपराधिक मामलों की संख्या करोड़ों में है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हाल के विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण बदले हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्ता में वापसी का दावा किया है। इस पृष्ठभूमि में शाह का कोलकाता दौरा और TMC पर सीधे आरोप राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि नए कानूनों के क्रियान्वयन की वास्तविक परीक्षा ज़मीनी स्तर पर होगी।