पश्चिम बंगाल: होटल एग्जिट दरवाजों के लिए सख्त एसओपी, तारापीठ-कोलकाता आग में 18 मौतों के बाद कदम
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल अग्निशमन विभाग ने राज्य के सभी होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस में एग्जिट दरवाजों के रखरखाव को लेकर कड़ी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने का निर्णय लिया है। यह कदम बीरभूम जिले के तारापीठ और मध्य कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट पर हुई दो अलग-अलग होटल आग की घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें कुल 18 लोगों की जान चली गई थी। जाँच में यह सामने आया कि बाहर निकलने के अपर्याप्त रास्ते इतनी बड़ी संख्या में मौतों का प्रमुख कारण रहे।
नई एसओपी में क्या होगा
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक प्रारंभिक ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। नई गाइडलाइंस लागू होने के बाद आतिथ्य क्षेत्र की सभी संस्थाओं के लिए इनका पालन करना अनिवार्य होगा। साथ ही, अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।
अधिकारी के अनुसार, पहली और सबसे अहम प्राथमिकता यह होगी कि एग्जिट दरवाजे हर परिस्थिति में बिना ताले के रखे जाएँ और उन तक जाने वाले रास्तों पर किसी भी प्रकार की रुकावट न हो।
दरवाजों की संरचना पर विशेष जोर
अधिकारी ने स्पष्ट किया, 'एग्जिट दरवाजे मेटल की ग्रिल-गेट संरचना वाले होने चाहिए, ताकि आग लगने की स्थिति में धुआँ आसानी से बाहर निकल सके। किसी भी हाल में एग्जिट दरवाजे लकड़ी, प्लाईवुड या बोर्ड जैसी ज्वलनशील सामग्री से नहीं बने होने चाहिए।'
इसी तर्ज पर होटल की छत तक जाने वाले दरवाजे भी सदैव खुले और मेटल ग्रिल संरचना वाले होने अनिवार्य किए जाएँगे, और छत तक जाने वाली सीढ़ियों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवरोध नहीं होना चाहिए। अधिकारी के अनुसार, 'इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपातकाल में मेहमान तेज़ी से छत पर पहुँच सकें और बचाव दल के आने तक वहाँ सुरक्षित रह सकें।'
प्रशिक्षित स्टाफ और साइनेज अनिवार्य
नई एसओपी के तहत सभी होटलों में इमरजेंसी एग्जिट साइनबोर्ड और प्रशिक्षित कर्मचारी रखना भी जरूरी होगा। अधिकारी ने बताया कि आतिथ्य प्रतिष्ठानों को आपातकाल में मेहमानों को सुरक्षित स्थान तक ले जाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ रखना होगा।
इसके अतिरिक्त, होटल प्रबंधन के लिए चेक-इन के समय मेहमानों को आग जैसी आपात स्थिति में 'क्या करें और क्या न करें' की जानकारी अनिवार्य रूप से देना भी नई गाइडलाइंस का हिस्सा होगा।
घटनाओं का पृष्ठभूमि और असर
यह ऐसे समय में आया है जब तारापीठ और मिर्जा गालिब स्ट्रीट की आग की घटनाओं ने राज्य में होटल सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जाँच में बाहर निकलने के अवरुद्ध और अपर्याप्त रास्तों को मृत्यु का मुख्य कारण बताया गया। अधिकारी ने कहा, 'इसीलिए नई एसओपी में इस पहलू पर खास जोर देने का निर्णय लिया गया है।'
गौरतलब है कि भारत में होटल अग्नि सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी नियम मौजूद हैं, परंतु उनके क्रियान्वयन में खामियाँ बार-बार सामने आती रही हैं। पश्चिम बंगाल की यह पहल राज्य स्तर पर एक ठोस नियामक ढाँचा बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
विभाग के अनुसार, ब्लूप्रिंट को अंतिम रूप देने के बाद इसे सरकार के समक्ष रखा जाएगा और अधिसूचना जारी होते ही सभी होटलों, लॉज व गेस्ट हाउस के लिए इसका पालन करना कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा। नियमित निरीक्षण दल यह सुनिश्चित करेंगे कि नए मानकों का उल्लंघन न हो।