तारापीठ अग्निकांड: देवी तारा मंदिर के पास 15 होटल अनिश्चितकाल के लिए बंद, 9 की मौत के बाद सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तारापीठ स्थित बिदेशिनी होटल में लगी भीषण आग में 9 लोगों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने 18 अगस्त 2026 को प्रतिष्ठित देवी तारा मंदिर के निकट स्थित 15 होटलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश दिया है। अचानक की गई जाँच में इन होटलों में अग्नि सुरक्षा उपायों और आपातकालीन निकास मार्गों का गंभीर अभाव पाया गया।
गिरफ्तारी और प्रशासनिक कार्रवाई
पुलिस ने सबसे पहले बिदेशिनी होटल के मुख्य मालिक प्रोबिट पॉल को गिरफ्तार किया। इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन ने नोटिस जारी किए। सोमवार को पुलिस ने मालिक के बेटे और सह-मालिक कल्याण पॉल को भी हिरासत में ले लिया। दोनों पर लापरवाही और अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं।
जाँच में क्या सामने आया
हादसे के बाद आरोप लगे कि बिदेशिनी होटल ही नहीं, बल्कि तारापीठ में हाल के वर्षों में तेज़ी से खड़े हुए अधिकांश होटलों और लॉजों में अग्नि सुरक्षा के उचित इंतज़ाम नहीं थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने मंदिर परिसर के आसपास के क्षेत्र में अचानक निरीक्षण अभियान चलाया। जाँच में 15 होटलों में न केवल पर्याप्त अग्निशमन उपकरणों का अभाव मिला, बल्कि आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए वैकल्पिक निकास मार्ग भी नदारद पाए गए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एक जिला प्रशासनिक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले होटल अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, 'इस पवित्र शहर में प्रतिदिन आने वाले हज़ारों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।'
रामपुरहाट के उप-प्रभागीय अधिकारी राठौड़ अश्विन बाबू सिंह, जिनके अधिकार क्षेत्र में तारापीठ आता है, ने बताया कि सोमवार को ही प्रशासन ने 8 अन्य होटलों को बंद करने के नोटिस जारी किए थे। उन्होंने कहा, 'आज हमने 15 अन्य होटल अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। आगामी त्योहारी मौसम को देखते हुए हम तारापीठ के प्रत्येक होटल के प्रबंधकों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण की व्यवस्था करने जा रहे हैं।'
आम तीर्थयात्रियों पर असर
तारापीठ पश्चिम बंगाल के सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब त्योहारी मौसम निकट है और तीर्थयात्रियों की आमद बढ़ने की संभावना है। होटलों के बंद होने से आवास की कमी हो सकती है, हालाँकि प्रशासन का कहना है कि सुरक्षित प्रतिष्ठानों को जल्द खुलने की अनुमति मिल सकती है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब धार्मिक स्थलों के आसपास के होटलों में अग्नि सुरक्षा की खामियाँ उजागर हुई हों। प्रशासन ने संकेत दिया है कि अनुपालन सुनिश्चित होने के बाद ही बंद होटलों को दोबारा खोलने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, तारापीठ क्षेत्र के समस्त होटल कर्मियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण की योजना बनाई जा रही है।