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पश्चिम बंगाल में 18 मौतों के बाद फायर सर्विस में बड़ा फेरबदल, 17 डीएफओ का तबादला

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पश्चिम बंगाल में 18 मौतों के बाद फायर सर्विस में बड़ा फेरबदल, 17 डीएफओ का तबादला

सारांश

पश्चिम बंगाल में एक महीने में दो होटल अग्निकांड, 18 मौतें — और अब राज्य फायर सर्विस में 17 डीएफओ का एकमुश्त तबादला। सरकार इसे 'रूटीन' बता रही है, लेकिन दोनों हादसे ठीक उन्हीं डिविजनों में हुए जहाँ के अफसर बदले गए हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के तारापीठ (बीरभूम) और मिर्जा गालिब स्ट्रीट (कोलकाता) में हुए दो होटल अग्निकांडों में कुल 18 लोगों की मौत हुई — प्रत्येक घटना में 9-9 जानें गईं।
राज्य फायर सर्विस विभाग ने 2 सितंबर को 17 डिविजनल फायर ऑफिसर (डीएफओ) के तबादले का ऐलान किया।
साउथ कोलकाता डिविजन के डीएफओ शुभंकर घोष हटाए गए; उनकी जगह निहार रंजन रॉय को नियुक्त किया गया।
बीरभूम डिविजन के डीएफओ अरिंदम देबनाथ का तबादला बांकुरा में; श्याम सुंदर डे ने बीरभूम का कार्यभार संभाला।
दोनों हादसों में फायर सेफ्टी नियमों की गंभीर अनदेखी पाई गई; राज्य सरकार ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया की समीक्षा शुरू की।
राज्य सरकार ने तबादलों को रूटीन प्रशासनिक कार्रवाई बताया, हालाँकि आलोचकों ने इस दावे पर सवाल उठाए।

पश्चिम बंगाल के तारापीठ (बीरभूम) और मिर्जा गालिब स्ट्रीट (कोलकाता) में होटलों में लगी आग की दो अलग-अलग घटनाओं में कुल 18 लोगों की मौत के बाद राज्य फायर सर्विस विभाग ने बुधवार, 2 सितंबर को बड़े पैमाने पर फेरबदल का ऐलान किया। इसके तहत विभाग के कुल 17 डिविजनल फायर ऑफिसर (डीएफओ) का तबादला किया गया है। दोनों हादसों में फायर सेफ्टी नियमों की गंभीर अनदेखी पाई गई थी।

मुख्य घटनाक्रम

पिछले महीने बीरभूम जिले के तारापीठ में एक होटल में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इसके कुछ ही दिन बाद न्यू मार्केट के मिर्जा गालिब स्ट्रीट इलाके में एक अन्य होटल में भी आग लगी, जिसमें 9 और लोगों की जान गई — मृतकों में बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल थे। दोनों घटनाओं की जाँच में राज्य फायर सर्विस विभाग ने फायर सेफ्टी के नियमों में बड़े पैमाने पर लापरवाही पाई।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में होटल, लॉज और गेस्टहाउस के लाइसेंसिंग तंत्र की खामियों की समीक्षा पहले से चल रही है। गौरतलब है कि दोनों हादसे फायर सर्विस के दो अलग-अलग डिविजन — साउथ कोलकाता और बीरभूम — के अधिकार क्षेत्र में हुए थे।

किसका हुआ तबादला

तबादले की सूची में साउथ कोलकाता डिविजन के डीएफओ शुभंकर घोष का नाम सबसे ऊपर है। मिर्जा गालिब स्ट्रीट वाला होटल उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आता था। उनकी जगह अब निहार रंजन रॉय को लाया गया है, जो इससे पहले नॉर्थ 24 परगना जिले के डीएफओ थे।

बीरभूम डिविजन के मौजूदा डीएफओ अरिंदम देबनाथ का तबादला बांकुरा डिविजन में किया गया है। वहीं, बांकुरा के पूर्व डीएफओ श्याम सुंदर डे ने देबनाथ की जगह बीरभूम का कार्यभार संभाला है।

सरकार की प्रतिक्रिया

हालाँकि, राज्य सरकार ने इन तबादलों को रूटीन प्रशासनिक कार्रवाई बताया और इन्हें हादसों से सीधे नहीं जोड़ा। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर एक साथ 17 डीएफओ का तबादला महज संयोग नहीं हो सकता, खासकर जब दोनों हादसे संबंधित डिविजनों में ही हुए हों।

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी ने इससे पहले ही 'फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट' और 'फायर लाइसेंस' — इन दो अनिवार्य अनुमतियों को जारी करने के नियमों को और सख्त बनाने का फैसला किया था।

लाइसेंसिंग खामियों की समीक्षा

दोनों हादसों के मद्देनज़र राज्य सरकार ने होटलों, लॉज और गेस्टहाउस को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में अंदरूनी कमियों की पहचान और उन्हें दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, लाइसेंसिंग की पूरी शृंखला की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो।

यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में होटल अग्निकांड के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई हो। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तबादलों से नहीं, बल्कि फायर ऑडिट को नियमित और अनिवार्य बनाने से ही दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

आगे क्या होगा

राज्य फायर सर्विस विभाग के नए अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपने-अपने डिविजन में होटलों और आवासीय प्रतिष्ठानों का तत्काल फायर सेफ्टी ऑडिट कराएँ। साथ ही, लाइसेंसिंग प्रक्रिया की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आगे की नीतिगत कार्रवाई कर सकती है। इन दोनों हादसों में जान गँवाने वाले परिवारों को न्याय और जवाबदेही की माँग अभी भी बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें दुरुस्त करने की जिम्मेदारी किसकी है — और उन्हें इतने वर्षों तक नजरअंदाज क्यों किया गया। अफसरों के तबादले से ढाँचागत खामियाँ नहीं जातीं; जब तक फायर ऑडिट को नियमित, पारदर्शी और दंडात्मक प्रावधानों से नहीं जोड़ा जाता, अगला हादसा केवल समय की बात है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए होटल अग्निकांड कहाँ और कब हुए?
दो घटनाएँ हुईं — पहली बीरभूम जिले के तारापीठ में और दूसरी कोलकाता की मिर्जा गालिब स्ट्रीट पर, दोनों पिछले महीने। प्रत्येक घटना में 9-9 लोगों की मौत हुई, यानी कुल 18 लोगों की जान गई।
राज्य फायर सर्विस ने कितने अफसरों का तबादला किया और क्यों?
राज्य फायर सर्विस विभाग ने 2 सितंबर को 17 डिविजनल फायर ऑफिसर (डीएफओ) के तबादले का ऐलान किया। यह कदम दोनों होटल अग्निकांडों में फायर सेफ्टी नियमों की गंभीर अनदेखी पाए जाने के बाद उठाया गया, हालाँकि सरकार ने इसे रूटीन कार्रवाई बताया।
साउथ कोलकाता और बीरभूम डिविजन में किन अफसरों की जगह किसे नियुक्त किया गया?
साउथ कोलकाता डिविजन के डीएफओ शुभंकर घोष की जगह निहार रंजन रॉय को लाया गया है, जो पहले नॉर्थ 24 परगना जिले के डीएफओ थे। बीरभूम डिविजन के डीएफओ अरिंदम देबनाथ का तबादला बांकुरा में हुआ और उनकी जगह श्याम सुंदर डे ने कार्यभार संभाला।
होटलों की फायर सेफ्टी लाइसेंसिंग प्रक्रिया में क्या बदलाव हो रहे हैं?
राज्य सरकार ने होटलों, लॉज और गेस्टहाउस को लाइसेंस देने की पूरी शृंखला की समीक्षा शुरू की है। 'फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट' और 'फायर लाइसेंस' देने के नियमों को और सख्त बनाने का फैसला पहले ही किया जा चुका है।
मिर्जा गालिब स्ट्रीट होटल आग में मारे गए लोगों में कौन शामिल थे?
मिर्जा गालिब स्ट्रीट (न्यू मार्केट, कोलकाता) के होटल में लगी आग में 9 लोगों की मौत हुई, जिनमें बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल थे। यह घटना पिछले महीने हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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