गांधी जयंती पर बंगाल में 'सेवा सेतु अभियान' शुरू, 3,300 कैंपों में 60 योजनाओं का लाभ एक छत के नीचे
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर राज्यभर में 'सेवा सेतु अभियान' का शुभारंभ किया — एक जनकल्याण सहायता शिविर कार्यक्रम जिसका उद्देश्य उन नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है जो अब तक इनसे वंचित रहे हैं। ब्लॉक और नगरपालिका स्तर पर कुल 3,300 कैंप स्थापित किए गए हैं जहाँ एक ही जगह 60 कल्याणकारी योजनाओं की सुविधा उपलब्ध है।
अभियान का स्वरूप और दायरा
नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के तहत उन लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्होंने अभी तक अन्नपूर्णा योजना या आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवेदन नहीं किया है, अथवा जिनके आवेदन किसी कारण से अस्वीकार हो गए हैं। अधिकारी के अनुसार, "जिन लोगों के आवेदन अस्वीकार कर दिए गए हैं, उनकी भी मदद की जाएगी और उन्हें बताया जाएगा कि उनके आवेदन क्यों अस्वीकार किए गए।"
ये शिविर नगर निगम, नगर पालिकाओं और पंचायतों के अधिकारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। कोलकाता में प्रत्येक दो वार्डों के लिए एक कैंप खोला गया है, ताकि नागरिकों को अधिक दूरी तय न करनी पड़े।
कार्यक्रम की समय सीमा और संचालन
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि ये कैंप शुक्रवार, 2 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शुरू हुए और 4 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलेंगे। राज्य सरकार ने नागरिकों को उनके निकटतम कैंप तक पहुँचाने में सहायता के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया है।
मुख्य योजनाएँ जिनका लाभ मिलेगा
इन कैंपों में जिन प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है, उनमें अन्नपूर्णा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, शिक्षा श्री, जॉय जोहार, पीएम किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान स्वनिधि जैसी योजनाएँ शामिल हैं। इसके अलावा, विधवा भत्ता, वृद्धावस्था भत्ता और विकलांगता भत्ता के लिए नए आवेदन फॉर्म भी वितरित किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि आयुष्मान कार्ड की स्थिति और अन्नपूर्णा योजना के आवेदन की जानकारी भी इन कैंपों में उपलब्ध कराई जा रही है। यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब राज्य में कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
आम जनता पर असर
यह अभियान विशेष रूप से उन वंचित वर्गों — बुज़ुर्गों, विधवाओं, किसानों और दिव्यांगजनों — के लिए लाभकारी हो सकता है जो जटिल आवेदन प्रक्रियाओं के कारण सरकारी सहायता से दूर रह जाते हैं। 3,300 कैंपों की व्यापक उपस्थिति यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि भौगोलिक दूरी कल्याण तक पहुँच में बाधा न बने।
आगे क्या
अभियान 4 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। राज्य सरकार के अनुसार, अस्वीकृत आवेदनों की समीक्षा और नए आवेदनों की प्रक्रिया इन्हीं कैंपों के माध्यम से पूरी की जाएगी। यह देखना अहम होगा कि इस तीन दिवसीय अभियान में कितने नागरिक वास्तव में योजनाओं से जुड़ पाते हैं।