भाई जगताप का भागवत पर पलटवार: 'बेरोजगारी देखें, देश में अघोषित आपातकाल जारी'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) भाई जगताप ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जगताप ने कहा कि भागवत को राजनीतिक बयानों से पहले देश के बेरोजगार युवाओं और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 के बाद से भारत में एक अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है।
भागवत की टिप्पणी पर जगताप का पलटवार
जगताप ने कहा कि आरएसएस प्रमुख जब सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं, तो उन्हें पहले यह देखना चाहिए कि देश के युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। उन्होंने कहा, 'छात्र वर्षों तक कठोर मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षाओं के पेपर लीक होने से उनकी तपस्या बर्बाद हो जाती है।' जगताप ने आरोप लगाया कि ऐसे पेपर लीक मामलों में पकड़े गए कुछ लोगों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) से संबंध रहे हैं।
उनका यह भी कहना था कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिशों के चलते विभिन्न राज्यों में आंदोलन हो रहे हैं। जगताप ने चेताया कि यदि सरकार जनता की बात नहीं सुनेगी, तो लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
रूस से तेल खरीद और विदेश नीति पर सवाल
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा भारत के ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने के समर्थन के संदर्भ में जगताप ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे को उठाया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय तेल कारोबार में भारत के हितों को लेकर सरकार को अपनी स्थिति देश के सामने स्पष्ट करनी चाहिए। जगताप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार की नीतियाँ राष्ट्रहित के विरुद्ध हैं।
परिसीमन और लोकतंत्र पर विपक्ष की माँग
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सर्वदलीय बैठक की माँग को 'अनुचित' बताए जाने पर जगताप ने कड़ा एतराज जताया। उनका कहना था कि परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे सरकार अपने विवेक से एकतरफा तय नहीं कर सकती। उन्होंने ईवीएम और विशेष पहचान रजिस्टर (SIR) के जरिए वोट चोरी के आरोप भी लगाए और आशंका जताई कि परिसीमन प्रक्रिया से राजनीतिक दलों के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित किया जा सकता है।
जगताप ने माँग की कि इंडिया गठबंधन और अन्य विपक्षी दलों सहित सभी पक्षों को परिसीमन विमर्श में शामिल किया जाए। गौरतलब है कि दक्षिण भारतीय राज्यों में भी परिसीमन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ आई हैं।
आतंकवाद और पुलवामा का संदर्भ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की आतंकवाद पर दोहरे मापदंड न अपनाने की टिप्पणी के जवाब में जगताप ने पुलवामा हमले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर बयान देते समय अपने देश में हुए हमलों और हताहतों को भी ध्यान में रखना अनिवार्य है, और राजनाथ सिंह को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
खड़गे-मोदी मुलाकात और राहुल गांधी का मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की प्रधानमंत्री मोदी से प्रस्तावित मुलाकात पर जगताप ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में देश के ज्वलंत मुद्दे सरकार के सामने रखना खड़गे का संवैधानिक अधिकार है। इस बैठक में एसआईआर, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे विषय उठाए जाएँगे। हालाँकि जगताप ने स्वीकार किया कि उन्हें इस बातचीत से बहुत अधिक उम्मीद नहीं है, लेकिन विपक्ष अपनी बात दृढ़ता से रखेगा।
राहुल गांधी को लेकर भाजपा की सोशल मीडिया पोस्ट (एक्स) के संदर्भ में जगताप ने कहा कि कांग्रेस नेता जनता के मुद्दों की लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि राहुल गांधी अपनी यात्राओं में 6,000 किलोमीटर से अधिक पैदल चल चुके हैं और युवाओं, छात्रों व किसानों के सवालों पर सरकार को निरंतर जवाबदेह बनाते रहेंगे। जगताप ने BJP से कहा कि राहुल गांधी की चिंता करने के बजाय पार्टी को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी बढ़ रही है और विपक्ष केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला तेज कर रहा है।