16 सितंबर 2026
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युद्धाभ्यास 2026: महाजन रेंज में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर का संयुक्त प्रदर्शन, भारत-अमेरिका के 1,200 जवान शामिल

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युद्धाभ्यास 2026: महाजन रेंज में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर का संयुक्त प्रदर्शन, भारत-अमेरिका के 1,200 जवान शामिल

सारांश

भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास के 22वें संस्करण में राजस्थान की महाजन रेंज पर एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की 'शूट एंड स्कूट' तकनीक का संयुक्त प्रदर्शन — औली से महाजन तक एक साथ 1,200 जवानों के साथ चल रहा यह अभ्यास दोनों देशों की गहराती रक्षा साझेदारी का ठोस प्रमाण है।

मुख्य बातें

16 सितंबर 2026 को राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तैनाती और संचालन का संयुक्त प्रदर्शन हुआ।
भारत और अमेरिका के करीब 600-600 यानी कुल 1,200 सैन्यकर्मी युद्धाभ्यास के 22वें संस्करण में भाग ले रहे हैं।
अभ्यास एक साथ उत्तराखंड के औली (पर्वतीय क्षेत्र) और राजस्थान के महाजन (रेगिस्तानी क्षेत्र) में चल रहा है।
'शूट एंड स्कूट' अभ्यास में तोप को तेज़ी से स्थानांतरित करने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया।
निगरानी और टोह के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग भी अभ्यास का हिस्सा रहा।

भारत और अमेरिकी सेना के बीच जारी संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्धाभ्यास' के 22वें संस्करण में 16 सितंबर 2026 को राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप की तैनाती और संचालन से जुड़ी विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गईं। दोनों देशों के करीब 600-600 सैन्यकर्मी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जो एक साथ उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन में संचालित हो रहा है।

एम-777 हॉवित्जर: तैनाती और 'शूट एंड स्कूट' प्रदर्शन

महाजन रेंज में बुधवार को आयोजित गतिविधि के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैन्यकर्मियों ने एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की दिन के समय तैनाती पर व्याख्यान और व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इसमें सैन्य कर्मियों की जिम्मेदारियाँ, तोप की तैनाती की चरणबद्ध प्रक्रिया और स्थानीय रक्षा के समन्वय से जुड़े पहलुओं को विस्तार से समझाया गया।

प्रदर्शन में जवाबी गोलाबारी की स्थिति में तोप को वैकल्पिक स्थानों पर तेज़ी से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसी कड़ी में 'शूट एंड स्कूट' अभ्यास भी किया गया, जिसमें निर्धारित कार्रवाई के तुरंत बाद तोप को उसकी मौजूदा स्थिति से तत्परता के साथ हटाने की क्षमता पर जोर होता है — यह आधुनिक युद्धक्षेत्र में सर्वाइवेबिलिटी की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

अभ्यास का दायरा और आधुनिक तकनीक

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, युद्धाभ्यास का यह 22वाँ संस्करण मंगलवार को आरंभ हुआ और यह अब तक का सबसे विस्तृत संस्करण माना जा रहा है। महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन के साथ-साथ ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग निगरानी और टोह लेने के लिए किया जा रहा है।

दोनों सेनाओं के विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्धकला में हो रहे बदलावों पर भी विचार-विमर्श कर रहे हैं। रणनीति, तकनीक और संचालन प्रक्रियाओं का परस्पर आदान-प्रदान इस अभ्यास की प्रमुख विशेषता है।

दोनों सेनाओं के बीच अनुभव और कार्यप्रणाली का साझा

भारतीय और अमेरिकी सैन्यकर्मियों के बीच सीधे संवाद और सर्वोत्तम प्रचलनों के आदान-प्रदान ने आपसी अंतर-संचालनीयता को नई ऊँचाई दी। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त अभियान संचालन की क्षमता और सुदृढ़ होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी लगातार गहरी हो रही है और दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों को लेकर समन्वित दृष्टिकोण अपना रहे हैं।

औली से महाजन तक: दोहरे मोर्चे पर अभ्यास

गौरतलब है कि यह अभ्यास दो बिल्कुल भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों — उत्तराखंड के बर्फीले पर्वतीय क्षेत्र औली और राजस्थान के रेगिस्तानी महाजन क्षेत्र — में एक साथ संचालित हो रहा है। यह विविध युद्धक वातावरणों में सैन्य तैयारियों को परखने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

आने वाले दिनों में दोनों सेनाओं के बीच और अधिक संयुक्त अभ्यास सत्र प्रस्तावित हैं, जिनमें बहु-क्षेत्रीय समन्वय और एकीकृत फायर सपोर्ट पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्वायत्त प्रणालियाँ और हॉवित्जर का एकीकरण — यह भी दर्शाता है कि भारत पारंपरिक आर्टिलरी को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युद्धाभ्यास 2026 क्या है और इसमें क्या होता है?
युद्धाभ्यास भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच आयोजित होने वाला वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है। इसका 22वाँ संस्करण सितंबर 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज और उत्तराखंड के औली में एक साथ चल रहा है, जिसमें दोनों देशों के करीब 600-600 सैन्यकर्मी शामिल हैं।
एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर क्या है और भारत में इसका क्या महत्त्व है?
एम-777 एक अमेरिकी निर्मित अत्यंत हल्की 155 मिमी तोप है जिसे हेलिकॉप्टर से भी ले जाया जा सकता है। भारत ने इसे विशेष रूप से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में तेज़ तैनाती के लिए अमेरिका से खरीदा है, जो उत्तरी सीमाओं पर रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
'शूट एंड स्कूट' अभ्यास क्या होता है?
'शूट एंड स्कूट' एक युद्धक प्रक्रिया है जिसमें तोप से निशाना लगाने के तुरंत बाद उसे तेज़ी से उस स्थान से हटा लिया जाता है। यह तकनीक जवाबी गोलाबारी से बचाव के लिए आधुनिक युद्धक्षेत्र में बेहद ज़रूरी मानी जाती है।
युद्धाभ्यास 2026 में ड्रोन और तकनीक की क्या भूमिका है?
इस संस्करण में सैनिक निगरानी और टोह के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग कर रहे हैं। दोनों देशों के विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्धकला में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा कर रहे हैं।
यह अभ्यास किन-किन स्थानों पर और क्यों आयोजित किया जा रहा है?
युद्धाभ्यास 2026 एक साथ उत्तराखंड के बर्फीले पर्वतीय क्षेत्र औली और राजस्थान के रेगिस्तानी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहा है। दो बिल्कुल भिन्न भूगोलों में एक साथ अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं की विविध युद्धक परिस्थितियों में संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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