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अभ्यास अमोघ ज्वाला का सफल समापन, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने किया निरीक्षण

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अभ्यास अमोघ ज्वाला का सफल समापन, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने किया निरीक्षण

सारांश

झांसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में अमोघ ज्वाला अभ्यास का समापन हुआ। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस अभ्यास का निरीक्षण करते हुए नई परिचालन अवधारणाओं और प्रोटोकॉल का परीक्षण किया। जानें इस अभ्यास के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

मुख्य बातें

अभ्यास अमोघ ज्वाला का सफल समापन हुआ।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने निरीक्षण किया।
आधुनिक युद्ध की नई तकनीकों का परीक्षण किया गया।
मशीनीकृत बलों का एकीकृत उपयोग प्रदर्शित किया गया।

नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झांसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में अमोघ ज्वाला अभ्यास का आयोजन बुधवार को सफलता के साथ समाप्त हुआ। दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस अभ्यास के समापन का निरीक्षण किया। इस अभ्यास में आधुनिक युद्ध के लिए नई परिचालन अवधारणाओं, बल संरचनाओं, प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल का परीक्षण किया गया।

व्हाइट टाइगर डिवीजन द्वारा आयोजित इस अभ्यास में बहु-क्षेत्रीय परिचालन वातावरण में आक्रमण हेलीकॉप्टरों, लड़ाकू विमानों, ड्रोनों, ड्रोन-रोधी प्रणालियों और उन्नत युद्धक्षेत्र प्रौद्योगिकियों का एकीकृत उपयोग करके तेज़ गति वाले मशीनीकृत अभियानों का प्रदर्शन किया गया। गोलाबारी और युद्धाभ्यास, ड्रोन-आधारित वास्तविक समय निगरानी और लक्ष्य निर्धारण, सटीक आक्रमण, और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू), वायु रक्षा (एडी) और रात्रि युद्ध क्षमताओं का निर्बाध एकीकरण एक नेटवर्कयुक्त और भविष्य के लिए तैयार बल की बढ़ती युद्ध क्षमता को दर्शाता है।

सेना कमांडर ने अभ्यास के दौरान प्रदर्शित व्यावसायिकता, परिचालन उत्कृष्टता और युद्ध तत्परता के लिए सैनिकों की सराहना की। उन्होंने यह भी बताया कि प्रौद्योगिकी का आत्मसात, संयुक्तता और थल, वायु, साइबर, अंतरिक्ष, आईएसआर और ईडब्ल्यू क्षमताओं का निर्बाध एकीकरण एक चुस्त, अनुकूलनीय बल के निर्माण के लिए आवश्यक है, जो बहु-क्षेत्रीय अभियानों के संपूर्ण स्पेक्ट्रम में विकसित हो रहे युद्धक्षेत्र पर प्रभुत्व स्थापित करने में सक्षम हो।

यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने 6 से 18 मार्च 2026 तक बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में अभ्यास अमोघ ज्वाला का संचालन किया। बहु-क्षेत्रीय परिचालन वातावरण में प्रौद्योगिकी-आधारित मशीनीकृत युद्ध क्षमताओं का सत्यापन किया गया। अभ्यास के दौरान, सेना ने तकनीक से लैस टैंकों को दौड़ाकर क्षमताओं का आकलन किया, और हेलीकॉप्टर भी उड़कर हमलावर होने की स्थिति में प्रदर्शन करते दिखे।

मजबूत कमान और नियंत्रण वास्तुकला के तहत, हमलावर हेलीकॉप्टरों, लड़ाकू विमानों, मानवरहित हवाई प्रणालियों, ड्रोन-रोधी प्रणालियों और नेटवर्क-सक्षम युद्धक्षेत्र प्लेटफार्मों के साथ मशीनीकृत बलों के एकीकृत उपयोग को प्रदर्शित किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह अनुभव और तकनीकी क्षमता के मामले में भारतीय सेना की प्रगति का प्रतीक है। अमोघ ज्वाला अभ्यास ने दिखाया है कि कैसे नई तकनीकों के एकीकरण से भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और भी मजबूत हो रही है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमोघ ज्वाला अभ्यास कब आयोजित किया गया?
अभ्यास अमोघ ज्वाला का आयोजन 6 से 18 मार्च 2026 तक किया गया।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस अभ्यास का उद्देश्य आधुनिक युद्ध के लिए नई परिचालन अवधारणाओं और प्रक्रियाओं का परीक्षण करना था।
राष्ट्र प्रेस
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