भारत बांग्लादेश नहीं बनेगा: एक्टिविस्ट मोहम्मद फैज खान का नेहा बोरा और प्रशांत भूषण पर तीखा प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
एक्टिविस्ट मोहम्मद फैज खान ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 'सत्ता परिवर्तन' (रिजीम चेंज) की बात को लेकर सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP), एक्टिविस्ट नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों के कारण बांग्लादेश या पाकिस्तान नहीं बन सकता और न ही बनेगा।
मुख्य बयान: 'भारत, भारत ही रहेगा'
मोहम्मद फैज खान ने कहा, 'CJP की ओर से एक बयान सामने आया है कि हम भारत को बांग्लादेश बना देंगे।' इस पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'हमारी ओर से स्पष्ट किया जा रहा है कि भारत, भारत ही रहेगा — बांग्लादेश या पाकिस्तान नहीं बनेगा। भारत में लोकतांत्रिक मूल्य हैं। सड़कों पर गालीबाजी, पत्थरबाजी करना, प्रधानमंत्री और प्रदेशों के मुख्यमंत्री को गाली देना — यह सब गलत काम है।'
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज़ हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
एसआईआर और मुस्लिम समुदाय पर रुख
मोहम्मद फैज खान ने मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा के सवाल पर भी मुखर होकर बात की। उन्होंने कहा, 'मुसलमान बहुत सुरक्षित हैं। सीएए और एनआरसी में भी एक भी मुसलमान का नाम नहीं कटा।' उनके अनुसार, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के माध्यम से केवल बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम काटे गए, साथ ही उन लोगों के नाम भी हटाए गए जिनकी मृत्यु हो चुकी थी।
उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के तमाम नेता पहले एसआईआर का समर्थन करते थे, लेकिन अब 'राजनीतिक रोटियाँ सेंकने' के लिए उसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आलोचकों के अनुसार कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति का दौर समाप्त हो चुका है।
नेहा बोरा और प्रशांत भूषण पर सीधा हमला
विश्वविद्यालय चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन का हवाला देते हुए मोहम्मद फैज खान ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय, केरल विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय में कांग्रेस समर्थित छात्र संगठनों को एक भी सीट नहीं मिली। उन्होंने तर्क दिया, 'ये दिल्ली विश्वविद्यालय का चुनाव नहीं जीत सकते, तो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का चुनाव कहाँ से जीतेंगे। लोकतांत्रिक तरीके से न जीत पाने पर 'रिजीम चेंज' की बात करना लोकतंत्र का अपमान है।'
नेहा बोरा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आईसा (AISA), जो कि सीपीआई (एमएल) की छात्र इकाई है, के साथ उनके कथित संबंधों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में 76 जवानों की नक्सली हमले में शहादत के बाद नेहा बोरा ने कथित तौर पर जश्न मनाया था। उन्होंने इसे घोर निंदनीय करार दिया।
प्रशांत भूषण के 'खून-खराबे' वाले बयान पर आपत्ति
एक्टिविस्ट फैज खान ने कहा कि कथित तौर पर प्रशांत भूषण की ओर से 'खून-खराबे' जैसी भाषा का प्रयोग किया गया, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह भारत है, इसे बांग्लादेश क्यों बनाया जाएगा।' उनके अनुसार, इस तरह के बयान न केवल संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध हैं, बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने का काम करते हैं।
आगे का परिदृश्य
इस विवाद के तूल पकड़ने के साथ ही राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों के नतीजे अक्सर राष्ट्रीय राजनीति के लिए बैरोमीटर की तरह देखे जाते हैं। मोहम्मद फैज खान जैसे स्वतंत्र आवाज़ों का सामने आना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह बहस और व्यापक रूप लेगी।