अभिजीत दिपके के बयान पर BJP नेता राम कदम का पलटवार: 'क्या यह बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान नहीं?'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राम कदम ने 3 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें कथित तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को मतदान अधिकार और संविधान का श्रेय दिया गया था। कदम ने इसे डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान करार देते हुए विपक्ष पर संविधान को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
दिपके के बयान पर राम कदम की तीखी प्रतिक्रिया
राम कदम ने कहा कि अभिजीत दिपके ने भरी सभा में दावा किया कि नेहरू ने वोटिंग का अधिकार दिया और संविधान नेहरू ने दिया। कदम ने पूछा, 'नेहरू का संविधान से क्या संबंध है? क्या यह परमपूज्य डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान नहीं है?' उन्होंने अभिजीत दिपके और चुनाव आयोग पर आरोप लगाने वाले विपक्षी नेताओं को 'झूठ बोलने वाली टोली' बताया और कहा कि इस टोली में अब ठाकरे बंधु भी शामिल हो रहे हैं।
शरजील इमाम और उमर खालिद के समर्थन पर निशाना
कदम ने आरोप लगाया कि उक्त सभा में शरजील इमाम और उमर खालिद — जो दिल्ली दंगों के आरोपी हैं और जिन पर देश-विरोधी भाषा के उपयोग के आरोप हैं — की जयकार हो रही थी, और उस कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेता भी मौजूद थे। कदम ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'क्या पितृ पक्ष में उनकी ओर से यही स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि है?'
चुनाव आयोग और मतदाता सूची विवाद
मतदाता सूची की विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर विपक्ष के विरोध को कदम ने निराधार बताया। उनका तर्क था कि एसआईआर के ज़रिए मतदाता सूची को शुद्ध किया जा रहा है, जबकि विपक्ष फर्जी मतदाताओं के नाम बनाए रखने के लिए इसका विरोध कर रहा है। उन्होंने इसे लोकसभा चुनाव से पहले संविधान को लेकर फैलाए गए भ्रम की निरंतरता बताया।
मोहन भागवत के बयान पर कदम का समर्थन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के 'अगर धर्म संकट में है तो देश को भी नुकसान होगा' वाले बयान का बचाव करते हुए कदम ने कहा कि इसे व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'देश केवल भौगोलिक नक्शा नहीं है — देश वहाँ रहने वाले लोगों से बनता है। जब धर्म संकट में होता है, तो देश भी संकट में होता है।' साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ विपक्षी नेता कुछ धर्मों के लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने की वर्षगाँठ
मराठी भाषा को 'शास्त्रीय भाषा' (अभिजात भाषा) का दर्जा मिलने के दो वर्ष पूर्ण होने पर राम कदम ने कहा कि यह दर्जा केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में दिलाया। उन्होंने कहा, 'संस्कृत के बाद मराठी एक ऐसी भाषा है जिसकी मिठास अनूठी है।' यह दर्जा मुंबई और महाराष्ट्र की पहचान से जुड़ी एक बहुप्रतीक्षित माँग थी।
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है और आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में संविधान, मतदाता सूची और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं।