3 अक्टूबर 2026
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रामदास आठवले का अभिजीत दिपके को कड़ा जवाब — PM और CM पर टिप्पणी के लिए माफी माँगें

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रामदास आठवले का अभिजीत दिपके को कड़ा जवाब — PM और CM पर टिप्पणी के लिए माफी माँगें

सारांश

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने अभिजीत दिपके को कड़े शब्दों में माफी माँगने के लिए कहा — PM मोदी और CM फडणवीस पर की गई टिप्पणियों को 'भाषा की खराब शैली' करार देते हुए। साथ ही उन्होंने मराठवाड़ा-विदर्भ में सूखे की विकट स्थिति पर चिंता जताते हुए 1,800 राहत किट भेजने की घोषणा की।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 3 अक्टूबर 2026 को मुंबई में अभिजीत दिपके से PM मोदी और CM फडणवीस पर दिए बयानों के लिए सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
आठवले ने कहा कि बाबा साहेब डॉ.
भीमराव अंबेडकर को 'नेहरू की देन' बताना पूरी तरह गलत है; अंबेडकर ने संविधान निर्माण से देश को बहुमूल्य योगदान दिया।
BJP नेता प्रतुल शाहदेव ने दिपके पर AAP , कांग्रेस और राहुल गांधी के मोहरे के रूप में काम करने का आरोप लगाया।
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में गंभीर सूखे की स्थिति में किसान बर्बाद; आठवले ने 1,800 राहत किट भेजने की घोषणा की।
आठवले ने कॉरपोरेट, राजनीतिक दलों और NGO से सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 3 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दिपके के उन बयानों की कड़ी आलोचना की, जो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान दिए थे। आठवले ने दिपके से सार्वजनिक रूप से माफी माँगने की माँग की।

आठवले का सीधा जवाब

आठवले ने कहा, 'आत्मविश्वास अच्छी बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में भाषा की शैली खराब नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना गलत है कि 'नेहरू ने बाबा साहेब अंबेडकर को बनाया।'

आठवले ने कहा, 'डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान का मसौदा तैयार करके पूरे देश के लिए अमूल्य योगदान दिया। वे हमारे समाज से आते हैं और उनके बारे में इस तरह की बात करना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं।' उन्होंने माँग की कि दिपके अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगें।

भाजपा नेता का आरोप — विपक्ष का मोहरा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रतुल शाहदेव ने भी अभिजीत दिपके पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिपके 'हाल के दिनों में पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं।' शाहदेव का आरोप है कि दिपके आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और राहुल गांधी के समर्थन में काम करते रहे हैं और यह बात अब सामने आ गई है।

शाहदेव ने यह भी याद दिलाया कि जब जंतर-मंतर पर धरना चल रहा था, तब राहुल गांधी सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने दिपके की तुलना अरविंद केजरीवाल से करते हुए कहा कि दिपके ने भी वैसे ही दावे किए — कि वे केवल छात्रों के हित के लिए काम करते हैं और राजनीति से उनका कोई नाता नहीं — जैसे केजरीवाल ने राजनीति में न आने की सौगंध खाई थी।

महाराष्ट्र सूखे पर आठवले की चिंता

राजनीतिक विवाद के साथ-साथ आठवले ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, विदर्भ और अन्य जिलों में गंभीर सूखे की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं और खेतिहर मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है।

आठवले ने बताया कि कुछ प्रभावित गाँवों में 1,800 राहत किट भेजने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कॉरपोरेट जगत, सभी राजनीतिक दलों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) से अपील की कि वे भी पीड़ित किसानों की मदद के लिए आगे आएँ। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सूखा घोषित कर दिया है और हर तालुका में राहत वितरण जारी है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन किया था। गौरतलब है कि ऐसे प्रदर्शनों में भाग लेने वाले नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के बयान अक्सर राजनीतिक वर्ग की तीखी प्रतिक्रिया को आमंत्रित करते हैं। आठवले महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रमुख दलित नेता के रूप में जाने जाते हैं, और बाबा साहेब अंबेडकर के सम्मान पर उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि अभिजीत दिपके इस माफी की माँग पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं, और क्या यह विवाद आगे कोई नया मोड़ लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उन्हें किस स्तर की प्रतिक्रिया झेलनी पड़ती है। BJP का यह आरोप कि दिपके 'विपक्ष के मोहरे' हैं, उस पुरानी रणनीति का हिस्सा है जिसमें स्वतंत्र आवाजों को दलीय राजनीति की छाया में दिखाने की कोशिश की जाती है। अंबेडकर को लेकर विवाद अलग ही राजनीतिक आयाम रखता है — महाराष्ट्र में दलित वोट बैंक संवेदनशील है और आठवले का हस्तक्षेप इस संदर्भ में उनकी राजनीतिक स्थिति को भी मजबूत करता है। मराठवाड़ा-विदर्भ के सूखे पर उनकी चिंता जायज है, लेकिन इस संकट को राजनीतिक विवाद के साथ एक ही प्रेस वार्ता में रखना अनजाने में एक गंभीर मानवीय संकट को सुर्खियों से दूर भी कर सकता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके ने ऐसा क्या कहा जिस पर विवाद हुआ?
अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बारे में आपत्तिजनक बयान दिए। उन्होंने यह भी कहा कि नेहरू ने बाबा साहेब अंबेडकर को 'बनाया', जिस पर आठवले ने कड़ी आपत्ति जताई।
रामदास आठवले ने अभिजीत दिपके से क्या माँग की?
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने माँग की कि दिपके प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बारे में दिए गए आपत्तिजनक बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगें। उन्होंने कहा कि अत्यधिक आत्मविश्वास में भाषा की शैली नहीं बिगड़नी चाहिए।
BJP नेता प्रतुल शाहदेव ने दिपके पर क्या आरोप लगाए?
BJP नेता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि अभिजीत दिपके आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और राहुल गांधी के मोहरे के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दिपके की तुलना अरविंद केजरीवाल से करते हुए कहा कि दोनों ने राजनीति से दूर रहने का दावा किया, लेकिन उनके बयान विपक्षी राजनीति से मेल खाते हैं।
महाराष्ट्र सूखे पर आठवले ने क्या घोषणा की?
आठवले ने मराठवाड़ा, विदर्भ और अन्य जिलों में गंभीर सूखे की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रभावित गाँवों में 1,800 राहत किट भेजने की घोषणा की। उन्होंने कॉरपोरेट जगत, राजनीतिक दलों और NGO से भी मदद के लिए आगे आने की अपील की।
सीजेपी का यह प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन किया था। इसी प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके ने वे बयान दिए जो बाद में राजनीतिक विवाद का कारण बने।
राष्ट्र प्रेस
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