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भूटान के राजा ने PM मोदी को समर्पित किया 76वाँ स्तूप, गेलेफू में 108 स्तूपों की ऐतिहासिक स्थापना

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भूटान के राजा ने PM मोदी को समर्पित किया 76वाँ स्तूप, गेलेफू में 108 स्तूपों की ऐतिहासिक स्थापना

सारांश

भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 1 नवंबर को निर्मित 108 स्तूपों में से 76वाँ स्तूप PM मोदी को समर्पित किया। यह केवल एक प्रतीकात्मक इशारा नहीं — यह भारत-भूटान की आर्थिक, आध्यात्मिक और कूटनीतिक साझेदारी की सार्वजनिक स्वीकृति है।

मुख्य बातें

भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने 1 नवंबर 2026 को गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 76वाँ स्तूप PM नरेंद्र मोदी को समर्पित किया।
हजारों स्वयंसेवकों ने मात्र एक दिन में 108 स्तूपों का निर्माण पूरा किया; प्रत्येक की ऊँचाई 15 मीटर ।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया और समर्पण पट्टिका का अनावरण किया।
PM मोदी ने फेसबुक पर संदेश जारी कर इस सम्मान को भारत की जनता की ओर से स्वीकार किया।
भारत ने असम के हतिसार में अस्थायी इमिग्रेशन सुविधा दी और स्थायी इमिग्रेशन चेक पोस्ट की प्रतिबद्धता भी जताई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को कहा कि भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक द्वारा गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में उन्हें एक स्तूप समर्पित किए जाने से वे गहरे रूप से भावुक और सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह सम्मान समस्त भारतवासियों की ओर से स्वीकार किया।

PM मोदी की प्रतिक्रिया

फेसबुक पर साझा किए गए एक संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'भूटान के राजा और वहाँ के लोगों की इस विशेष आत्मीयता और उदारता से मैं बहुत प्रभावित हूँ। मैं भारत के लोगों की ओर से इसे गहरी कृतज्ञता के साथ स्वीकार करता हूँ।' उन्होंने आगे कहा कि 'जांगचुप चोर्टेन' (स्तूप) दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत तथा भारत-भूटान की गहरी मित्रता का स्थायी प्रतीक बना रहेगा।

मुख्य समारोह और स्तूप समर्पण

1 नवंबर 2026 को गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 स्तूपों की स्थापना के बाद भूटान के राजा नामग्याल वांगचुक और भारत के केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त रूप से 76वें स्तूप को प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित करने वाली पट्टिका का अनावरण किया। इस भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में विस्तृत अनुष्ठान संपन्न हुए।

राजा नामग्याल वांगचुक ने कहा कि यह समर्पण PM मोदी की गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के विजन के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता और उसे साकार करने में भारत के सशक्त समर्थन की सराहना का प्रतीक है। मंत्री रिजिजू ने भी इस विशेष सम्मान के लिए भूटान के राजा का हृदय से आभार जताया और गेलेफू परियोजना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

स्तूप निर्माण की विशेषताएँ

उल्लेखनीय यह है कि हजारों स्वयंसेवकों ने मात्र एक दिन में 108 स्तूपों का निर्माण पूरा किया। प्रत्येक स्तूप की ऊँचाई 15 मीटर है और इन्हें असम सीमा के निकट आई (माउ) नदी के तट पर 108 मीटर की समान दूरी पर स्थापित किया गया है। यह विशाल धार्मिक परिसर बौद्ध स्थापत्य कला और सामुदायिक प्रयास का अद्वितीय उदाहरण माना जा रहा है।

भारत का कूटनीतिक और अवसंरचनात्मक समर्थन

इस आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए भारत सरकार ने असम के हतिसार में एक विशेष अस्थायी इमिग्रेशन सुविधा को मंजूरी दी, जिससे विभिन्न देशों के नागरिकों की आवाजाही सहज हो सकी। इससे पहले सितंबर 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भूटान यात्रा के दौरान गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के विजन के प्रति भारत सरकार का समर्थन दोहराया था।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हतिसार में एक स्थायी इमिग्रेशन चेक पोस्ट स्थापित करने की भी प्रतिबद्धता जताई है, जो निवेशकों और पर्यटकों के लिए गेलेफू तक पहुँच को और सरल बनाएगी। गौरतलब है कि यह परियोजना भारत-भूटान के दीर्घकालिक एवं भरोसेमंद द्विपक्षीय संबंधों की एक और महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

भारत-भूटान संबंधों का व्यापक संदर्भ

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना भूटान की आर्थिक विविधीकरण की महत्वाकांक्षा का केंद्र है, और भारत इस परियोजना के सबसे प्रमुख भागीदारों में से एक है। इस स्तूप समर्पण ने उस साझेदारी को एक आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक आयाम दे दिया है, जो दोनों देशों के बीच केवल आर्थिक सहयोग से परे एक गहरे सभ्यतागत संबंध को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भारत के बुनियादी ढाँचे व इमिग्रेशन समर्थन के बिना यह व्यवहार्य नहीं होगी। दूसरी ओर, भारत के लिए यह उस 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की ठोस उपलब्धि है जो प्रायः कूटनीतिक बैठकों तक सीमित रहती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि हतिसार इमिग्रेशन चेक पोस्ट की प्रतिबद्धता अकेले एक बड़ा कदम है — यह भारत के पूर्वोत्तर और भूटान के दक्षिणी आर्थिक गलियारे को जोड़ने की दिशा में निर्णायक सक्षमकर्ता साबित हो सकती है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूटान के राजा ने PM मोदी को कौन-सा स्तूप समर्पित किया और कहाँ?
भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने 1 नवंबर 2026 को गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में निर्मित 108 स्तूपों में से 76वाँ स्तूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया। यह स्तूप असम सीमा के निकट आई (माउ) नदी के तट पर स्थित है।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी क्या है और भारत की इसमें क्या भूमिका है?
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का एक महत्वाकांक्षी आर्थिक और आध्यात्मिक विकास परियोजना का विजन है। भारत इस परियोजना का प्रमुख समर्थक है और उसने हतिसार में इमिग्रेशन सुविधाएँ स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
PM मोदी ने स्तूप समर्पण पर क्या कहा?
PM मोदी ने फेसबुक पर लिखा कि वे भूटान के राजा और वहाँ के लोगों की इस आत्मीयता और उदारता से बेहद प्रभावित हैं और इस सम्मान को वे भारत की जनता की ओर से गहरी कृतज्ञता के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि यह 'जांगचुप चोर्टेन' भारत-भूटान की साझा आध्यात्मिक विरासत और मित्रता का स्थायी प्रतीक बना रहेगा।
108 स्तूपों का निर्माण कितने समय में हुआ और इनकी विशेषता क्या है?
बताया गया है कि हजारों स्वयंसेवकों ने मात्र एक दिन में इन 108 स्तूपों का निर्माण पूरा किया। प्रत्येक स्तूप की ऊँचाई 15 मीटर है और इन्हें आई (माउ) नदी के तट पर 108 मीटर की समान दूरी पर स्थापित किया गया है।
भारत ने इस आयोजन के लिए क्या व्यवस्थाएँ कीं?
भारत सरकार ने इस आयोजन के लिए असम के हतिसार में एक विशेष अस्थायी इमिग्रेशन सुविधा को मंजूरी दी। साथ ही, भारत ने हतिसार में एक स्थायी इमिग्रेशन चेक पोस्ट स्थापित करने की भी प्रतिबद्धता जताई है, जिससे गेलेफू तक निवेशकों और पर्यटकों की आवाजाही सहज होगी।
राष्ट्र प्रेस
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