भूटान के PM त्शेरिंग तोबगे गुवाहाटी पहुंचे, CM हिमंत सरमा से कनेक्टिविटी और व्यापार पर बड़ी बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे सोमवार, 25 मई 2026 को गुवाहाटी पहुंचे, जहाँ उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में सीमा पार कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन और जलविद्युत सहयोग को केंद्र में रखा गया। दोनों नेताओं ने भारत-भूटान के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र में उप-क्षेत्रीय सहयोग को नई गति देने पर सहमति जताई।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'गुवाहाटी में भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे का स्वागत करके और उनसे मिलकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं।' सरमा ने इस दौरे को भूटान और पूर्वोत्तर क्षेत्र के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अधिकारियों के अनुसार, वार्ता में जलविद्युत, शिक्षा, बुनियादी ढाँचा और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे विषयों पर प्रमुखता से चर्चा हुई। सीमा पार व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक संवाद हुआ।
असम की भूमिका और 'एक्ट ईस्ट' नीति
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असम इस साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि असम और भूटान के बीच घनिष्ठ सहयोग 21वीं सदी में दक्षिण एशियाई क्षेत्र के आर्थिक और रणनीतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
गौरतलब है कि असम सरकार भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत राज्य को क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने में सक्रिय रूप से जुटी है। भूटान का असम के उन जिलों के साथ गहरा भौगोलिक और सांस्कृतिक जुड़ाव है जो इस हिमालयी राष्ट्र की सीमा से सटे हैं।
भारत-भूटान संबंधों का संदर्भ
भारत और भूटान के बीच पारंपरिक रूप से घनिष्ठ राजनयिक संबंध रहे हैं, और नई दिल्ली भूटान का एक प्रमुख विकास भागीदार रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में लगातार विस्तृत हो रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को बेहतर बनाने के प्रयासों को तेज़ किया है।
आगे की उम्मीदें
अधिकारियों ने बताया कि भूटान के प्रधानमंत्री के इस दौरे से उप-क्षेत्रीय सहयोग को और मज़बूती मिलने और पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश तथा सतत विकास के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। यह दौरा दोनों देशों के बीच जमीनी स्तर पर संपर्क और साझा विकास की दिशा में एक नई शुरुआत का संकेत देता है।