19 अक्टूबर 2026
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भोजपुर में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश: दिल्ली से संचालित नेटवर्क के 9 सदस्य गिरफ्तार

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भोजपुर में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश: दिल्ली से संचालित नेटवर्क के 9 सदस्य गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली से संचालित साइबर ठगी गिरोह के नौ सदस्य बिहार के चकिया गांव से पकड़े गए। CPP और इंश्योरेंस स्कीम का झांसा, जस्टडायल से डेटा चोरी, और एक्स-लाइट से अज्ञात कॉलिंग — यह गिरोह जून 2026 से सक्रिय था। 27 मोबाइल, 34 सिम और एथिकल हैकिंग ट्रेन्ड सदस्य बरामद।

मुख्य बातें

भोजपुर साइबर पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को चकिया गांव, सिकरहटा में छापेमारी कर अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया।
गिरोह दिल्ली के प्रेमनगर से संचालित होता था और जून 2026 से सक्रिय था।
बरामदगी में 27 मोबाइल फोन , 34 सिम कार्ड , 2 लैपटॉप , 11 डेबिट कार्ड और ₹22 हजार नकद शामिल।
ठगी का तरीका: जस्टडायल से डेटा लेकर CPP और इंश्योरेंस के नाम पर ₹2,499–₹2,500 वसूलना।
गिरोह के एक सदस्य ने एथिकल हैकिंग का प्रशिक्षण लिया था; एक संदिग्ध अभी भी दिल्ली में फरार।
BNS, IT एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज; कुल ठगी राशि की जाँच जारी।

बिहार के भोजपुर जिले की साइबर पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को क्रेडिट कार्ड प्रोटेक्शन प्लान (CPP) और इंश्योरेंस ऑफर का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सिकरहटा थाना क्षेत्र के चकिया गांव में छापेमारी कर पुलिस ने गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया, जिनका संचालन दिल्ली के प्रेमनगर क्षेत्र से हो रहा था।

छापेमारी और बरामदगी

साइबर डीएसपी सह साइबर थानाध्यक्ष रौशन कुमार ने रविवार को प्रेस वार्ता में बताया कि सिकरहटा थानाध्यक्ष को सूचना मिली थी कि चकिया गांव में कुछ संदिग्ध व्यक्ति मोबाइल और लैपटॉप के जरिए अवैध गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं। पुलिस टीम ने मौके पर पहुँचकर दो अलग-अलग कमरों की तलाशी ली।

आरोपितों के पास से 27 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 34 सिम कार्ड, 11 डेबिट कार्ड और ₹22 हजार नकद बरामद किए गए। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर लैपटॉप और सिस्टम की जाँच की गई, जिसमें इंटरनेट कॉलिंग के लिए एक्स-लाइट और एपीके फाइलें बनाने व बदलाव के लिए एपीके स्टूडियो जैसे सॉफ्टवेयर मिले।

ठगी का तरीका

जाँच में सामने आया कि गिरोह जस्टडायल के माध्यम से संभावित पीड़ितों का डेटा जुटाता था। इसके बाद एक्स-लाइट सॉफ्टवेयर के जरिए इंटरनेट कॉलिंग की जाती थी, जिससे कॉलर की पहचान कर पाना और उसी नंबर पर वापस संपर्क करना मुश्किल हो जाता था।

लोगों को क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस प्लान देने का झांसा दिया जाता था और इसके लिए ₹2,499 से ₹2,500 का भुगतान करने को कहा जाता था। आरोपित ओटीपी हासिल कर भुगतान करवा लेते थे। ठगी की रकम पेटीएम जैसे डिजिटल वॉलेट में ली जाती थी और शिकायत आने पर वॉलेट बदल दिया जाता था।

ग्राहकों का डेटा व्हाट्सएप पर 24 घंटे के टाइमर वाले संदेशों के जरिए साझा किया जाता था, ताकि संदेश स्वतः डिलीट हो जाएँ। ठगी की रकम एटीएम के पास कैश डिपॉजिट, वॉलेट और ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से आपस में बाँटी जाती थी।

गिरोह का नेटवर्क और सदस्य

डीएसपी रौशन कुमार के अनुसार, गिरफ्तार नौ आरोपितों में बिहार के विभिन्न जिलों के निवासी और पश्चिम बंगाल का एक व्यक्ति शामिल है। गिरोह का एक अन्य सदस्य अभी भी दिल्ली में है और फरार बताया जा रहा है।

गिरोह के सदस्य जून 2026 से दिल्ली के प्रेमनगर क्षेत्र में रहकर इस गतिविधि में संलिप्त थे। करीब 10-15 दिन पहले वे चकिया गांव पहुँचे और दो कमरों से अपना नेटवर्क चलाने लगे। गिरोह के एक सदस्य ने एथिकल हैकिंग का प्रशिक्षण लिया था, जो तकनीकी सहायता देता था।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच

पुलिस ने BNS, IT एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपितों के पास से 25 से अधिक संभावित पीड़ितों के नाम वाली एक सूची भी बरामद हुई है।

गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और कुल ठगी की रकम कितनी है, इसकी जाँच जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में डिजिटल वित्तीय ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और साइबर अपराधी नित नए तरीके अपनाते जा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजपुर साइबर ठगी गिरोह किस तरह लोगों को निशाना बनाता था?
गिरोह जस्टडायल से ग्राहकों का डेटा जुटाता था और फिर एक्स-लाइट सॉफ्टवेयर के जरिए इंटरनेट कॉलिंग करके लोगों को क्रेडिट कार्ड प्रोटेक्शन प्लान (CPP) या इंश्योरेंस ऑफर का झांसा देता था। ₹2,499 से ₹2,500 की रकम ओटीपी के जरिए वसूलकर पेटीएम जैसे डिजिटल वॉलेट में ली जाती थी।
गिरफ्तार आरोपित कहाँ के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार नौ आरोपितों में बिहार के विभिन्न जिलों के निवासी और पश्चिम बंगाल का एक व्यक्ति शामिल है। गिरोह का एक अन्य सदस्य दिल्ली में फरार बताया जा रहा है।
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कौन-सी धाराएँ लगाई हैं?
भोजपुर पुलिस ने BNS (भारतीय न्याय संहिता), IT एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। कुल ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या की जाँच अभी जारी है।
गिरोह एक्स-लाइट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल क्यों करता था?
एक्स-लाइट सॉफ्टवेयर इंटरनेट-आधारित कॉलिंग की सुविधा देता है, जिससे कॉल करने वाले का असली नंबर छिप जाता है और पीड़ित उसी नंबर पर वापस संपर्क नहीं कर सकते। यह पहचान छिपाने का एक तकनीकी तरीका है जो साइबर जाँच को जटिल बना देता है।
गिरोह ने पकड़े जाने से बचने के लिए क्या तरीके अपनाए?
गिरोह ने कई तरीके अपनाए — ग्राहकों का डेटा व्हाट्सएप पर 24 घंटे के टाइमर वाले संदेशों में साझा किया जाता था ताकि वे खुद-ब-खुद डिलीट हो जाएँ। शिकायत आने पर डिजिटल वॉलेट बदल दिया जाता था और नकद ATM कैश डिपॉजिट व ग्राहक सेवा केंद्रों के जरिए बाँटा जाता था।
राष्ट्र प्रेस
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