15 अक्टूबर 2026
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बिहार के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह पर निगरानी ब्यूरो की छापेमारी, ₹1.10 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का आरोप

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बिहार के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह पर निगरानी ब्यूरो की छापेमारी, ₹1.10 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का आरोप

सारांश

बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी — ₹1.10 करोड़ की बेहिसाब दौलत, 14 अचल संपत्तियाँ और सिलीगुड़ी की ज़मीन के दस्तावेज़। 2014 से सरकारी सेवा में रहे इस अभियंता ने कथित तौर पर ये संपत्तियाँ अपने वार्षिक विवरण में नहीं दर्शाईं।

मुख्य बातें

बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 15 अक्टूबर 2026 को चंद्रशेखर सिंह (कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग) के पटना, कटिहार और सारण में एक साथ छापे मारे।
आरोप है कि सिंह ने ज्ञात आय से 88 प्रतिशत अधिक — अर्थात ₹1 करोड़ 10 लाख 96 हजार 883 रुपए की संपत्ति अर्जित की।
छापेमारी में ₹5.70 लाख नकद, सोने-चांदी के आभूषण और 14 अचल संपत्तियों के दस्तावेज़ बरामद हुए; अचल संपत्तियों का अनुमानित मूल्य ₹1 करोड़ 79 लाख 41 हजार 883 रुपए ।
सिलीगुड़ी के व्यावसायिक क्षेत्र में 2021 में खरीदी गई ज़मीन के दस्तावेज़ भी मिले; पत्नी श्वेता कुमारी के नाम पर 92 डिसमिल ज़मीन से जुड़ी 10 डीड बरामद।
मामले में 13 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(बी) के तहत एफआईआर दर्ज; जाँच जारी।

बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के पटना, कटिहार और सारण स्थित तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। ब्यूरो के अनुसार, सिंह पर अपनी ज्ञात आय से करीब 88 प्रतिशत अधिक — अर्थात ₹1 करोड़ 10 लाख 96 हजार 883 रुपए की बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। छापेमारी में ₹5.70 लाख नकद, सोने-चांदी के आभूषण, जमीन के दस्तावेज और बैंक, शेयर व एलआईसी निवेश से जुड़े कागजात बरामद किए गए हैं।

मामले का कानूनी आधार

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, चंद्रशेखर सिंह के विरुद्ध 13 अक्टूबर 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 121/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना से प्राप्त तलाशी वारंट के आधार पर ब्यूरो की तीन टीमों ने एक साथ कार्रवाई शुरू की।

बरामद संपत्तियाँ और दस्तावेज़

जाँच के दौरान आरोपी, उनकी पत्नी श्वेता कुमारी और परिजनों के नाम पर कुल 14 अचल संपत्तियाँ सामने आई हैं, जिनका अनुमानित मूल्य ₹1 करोड़ 79 लाख 41 हजार 883 रुपए है। इसके अतिरिक्त 5 चल संपत्तियों का मूल्य ₹16 लाख 55 हजार रुपए बताया गया है।

उल्लेखनीय है कि सिलीगुड़ी के एक महँगे व्यावसायिक इलाके में वर्ष 2021 में खरीदी गई ज़मीन के दस्तावेज़ भी बरामद हुए। श्वेता कुमारी के नाम पर 92 डिसमिल ज़मीन से जुड़ी 10 डीड मिली हैं। इसके अलावा पटना स्थित तीन बेडरूम वाला फ्लैट और कटिहार स्थित पैतृक आवास में दो बेडरूम वाले फ्लैट की जानकारी भी सामने आई है।

आरोपी की सेवा पृष्ठभूमि

ब्यूरो के अनुसार, चंद्रशेखर सिंह वर्ष 2014 से ग्रामीण कार्य विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। वे बांका, बायसी और फारबिसगंज में सहायक अभियंता के रूप में तैनात रहे। इसके बाद भागलपुर में गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला और किशनगंज-2 में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्य किया। जून 2026 से वे छपरा में गुणवत्ता नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।

गौरतलब है कि जिस अवधि में सिलीगुड़ी की ज़मीन कथित तौर पर खरीदी गई, उस समय आरोपी फारबिसगंज में सहायक अभियंता के पद पर तैनात थे और उन्होंने इन संपत्तियों को अपने वार्षिक संपत्ति विवरण में नहीं दर्शाया था।

जाँच की स्थिति

बरामद आभूषणों का मूल्यांकन अभी जारी है, जबकि बैंक खातों, शेयर और एलआईसी निवेश के दस्तावेजों की भी जाँच की जा रही है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि तलाशी और अनुसंधान की कार्रवाई अभी जारी है तथा संपत्तियों का कुल मूल्यांकन पूरा होने के बाद अंतिम आँकड़ा सामने आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ग्रामीण कार्य विभाग में तैनाती और अनुबंध आवंटन लंबे समय से अवैध कमाई के अवसर माने जाते हैं। चंद्रशेखर सिंह के मामले में चौंकाने वाली बात यह नहीं कि संपत्ति आय से अधिक है — बल्कि यह है कि सिलीगुड़ी जैसे दूरस्थ शहर में व्यावसायिक ज़मीन खरीदी गई, जो संपत्ति छुपाने की एक सुनियोजित रणनीति की ओर संकेत करती है। वार्षिक संपत्ति विवरण में गड़बड़ी की आदत प्रशासनिक निगरानी तंत्र की सीमाओं को भी रेखांकित करती है — यह पूछा जाना चाहिए कि 2014 से कार्यरत एक अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई 2026 तक क्यों नहीं हुई।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में निगरानी ब्यूरो ने चंद्रशेखर सिंह पर क्यों छापा मारा?
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के विरुद्ध आय से 88 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में 15 अक्टूबर 2026 को तीन ठिकानों पर छापेमारी की। मामले में 13 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
छापेमारी में ₹5.70 लाख नकद, सोने-चांदी के आभूषण, 14 अचल संपत्तियों के दस्तावेज़ (मूल्य ₹1 करोड़ 79 लाख 41 हजार 883 रुपए), 5 चल संपत्तियाँ (₹16 लाख 55 हजार रुपए), सिलीगुड़ी की ज़मीन के दस्तावेज़, तथा बैंक खातों, शेयर और एलआईसी निवेश से जुड़े कागजात बरामद हुए। आभूषणों का मूल्यांकन अभी जारी है।
चंद्रशेखर सिंह पर कुल कितनी बेहिसाब संपत्ति का आरोप है?
निगरानी ब्यूरो के अनुसार, चंद्रशेखर सिंह पर ₹1 करोड़ 10 लाख 96 हजार 883 रुपए की आय से अधिक संपत्ति का आरोप है, जो उनकी ज्ञात आय से करीब 88 प्रतिशत अधिक है। हालाँकि आभूषणों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद यह आँकड़ा बदल सकता है।
सिलीगुड़ी की ज़मीन का मामला क्या है?
जाँच में सामने आया है कि सिलीगुड़ी के एक महँगे व्यावसायिक इलाके में वर्ष 2021 में ज़मीन खरीदी गई थी। आरोपी की पत्नी श्वेता कुमारी के नाम पर 92 डिसमिल ज़मीन से जुड़ी 10 डीड बरामद हुई हैं। कथित तौर पर इन संपत्तियों को वार्षिक संपत्ति विवरण में नहीं दर्शाया गया था।
चंद्रशेखर सिंह बिहार सरकार में कब से कार्यरत हैं?
चंद्रशेखर सिंह वर्ष 2014 से ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यरत हैं। वे बांका, बायसी और फारबिसगंज में सहायक अभियंता रहे, फिर भागलपुर और किशनगंज-2 में तैनात हुए। जून 2026 से वे छपरा में गुणवत्ता नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के पद पर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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