पवन कुमार पर ईओयू का शिकंजा: पटना-दिल्ली समेत 6 ठिकानों पर छापा, ₹3.89 करोड़ की अवैध संपत्ति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 24 जून 2026 (बुधवार) को भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के पटना, भागलपुर, नोएडा और नई दिल्ली स्थित 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जाँच में पवन कुमार के विरुद्ध उनकी ज्ञात आय से 103.94 प्रतिशत अधिक — यानी कथित तौर पर ₹3 करोड़ 89 लाख 79 हज़ार रुपए की संपत्ति अर्जित करने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं।
मामला कैसे दर्ज हुआ
ईओयू के अनुसार, प्राप्त सूचना के सत्यापन के बाद 23 जून 2026 को पवन कुमार के विरुद्ध ईओयू थाना कांड संख्या 12/26 दर्ज किया गया। उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके बाद विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट प्राप्त कर बुधवार की सुबह छापेमारी अभियान शुरू किया गया।
किन ठिकानों पर हुई तलाशी
ईओयू ने एक साथ निम्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया:
पटना के उत्तरी श्रीकृष्णापुरी स्थित यमुना निवास अपार्टमेंट, फ्लैट नंबर बी-305; पटना स्थित उनका कार्यालय; भागलपुर के आनंदगढ़ कॉलोनी, तिलकामांझी स्थित मकान; नोएडा सेक्टर-75 स्थित फ्लैट; नोएडा स्थित एक अन्य आवासीय ठिकाना; तथा नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 स्थित फ्लैट। यह ठिकानों की भौगोलिक विविधता ही संपत्ति के कथित विस्तार की ओर संकेत करती है।
अभियंता का पद और जिम्मेदारियाँ
पवन कुमार वर्तमान में भवन निरूपण अंचल-1, पटना में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त वह निदेशक, निरूपण इकाई, पटना भवन प्रमंडल, भवन निर्माण विभाग, बिहार का अतिरिक्त दायित्व भी संभाल रहे हैं। गौरतलब है कि इतने महत्त्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी के विरुद्ध इस स्तर की जाँच बिहार के भवन निर्माण विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
तलाशी में क्या खंगाला जा रहा है
ईओयू के अनुसार, तलाशी के दौरान अचल संपत्ति, बैंक खाते, निवेश, नकदी, आभूषण और अन्य दस्तावेज़ों की जाँच की जा रही है। यह कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक और पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में की जा रही है। सभी छह ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई जारी है और छापेमारी पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
आगे क्या होगा
तलाशी पूरी होने के बाद ईओयू बरामद दस्तावेज़ों और संपत्तियों का मूल्यांकन करेगी। यदि साक्ष्य पर्याप्त पाए गए तो पवन कुमार की गिरफ्तारी और विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला बिहार में सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध ईओयू की बढ़ती सक्रियता का ताज़ा उदाहरण है।