बिहार: सीवान उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के 5 ठिकानों पर ईओयू का छापा, ₹2.36 करोड़ की अवैध संपत्ति उजागर
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के सीवान में तैनात उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 9 जुलाई 2026 को एक साथ पाँच ठिकानों पर छापेमारी की। प्रारंभिक जाँच में यह सामने आया है कि आरोपी अधिकारी ने अपनी वैध आय से ₹2 करोड़ 36 लाख 31 हजार अधिक की संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 201.97 प्रतिशत अधिक है।
मामला कैसे दर्ज हुआ
बिहार पुलिस मुख्यालय (आर्थिक अपराध प्रभाग) के अनुसार, अंकेश कुमार गोंड के खिलाफ बुधवार, 8 जुलाई को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके तुरंत बाद पटना की विशेष न्यायालय (निगरानी) से तलाशी वारंट प्राप्त कर पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में पाँच अलग-अलग टीमें गठित की गईं।
किन-किन स्थानों पर हुई छापेमारी
ईओयू की टीमों ने एक साथ निम्नलिखित पाँच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया:
पटना के दानापुर स्थित आवास; मुंगेर के चंदनबाग स्थित पैतृक घर; मुंगेर के लल्लूपोखर स्थित व्यवसायिक भवन; सीवान स्थित उत्पाद विभाग का कार्यालय कक्ष; तथा चित्रगुप्त नगर स्थित किराए का आवास। गुरुवार सुबह भी यह छापेमारी अभियान जारी रहा।
जाँच में क्या मिला
सीवान उत्पाद विभाग के बैरक और कार्यालय परिसर में ईओयू की टीम सुबह से दस्तावेजों और अभिलेखों की गहन जाँच कर रही है। टीम बैंक खातों, निवेश, चल-अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी पड़ताल में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान पूरा होने के बाद आर्थिक अपराध इकाई विस्तृत जानकारी साझा करेगी।
कितनी बड़ी है अवैध संपत्ति
जाँच में प्रथम दृष्टया यह स्थापित हुआ है कि आरोपी अधिकारी की कुल संपत्ति उनकी वैध आय से ₹2 करोड़ 36 लाख 31 हजार अधिक है — यानी ज्ञात आय का लगभग 202 प्रतिशत। गौरतलब है कि यह आँकड़ा प्रारंभिक जाँच पर आधारित है; अंतिम रिपोर्ट में यह संख्या बदल भी सकती है।
आगे क्या होगा
ईओयू के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जाँच पूरी होने के बाद विधिक कार्रवाई के अगले चरण तय किए जाएंगे। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की इन धाराओं के तहत दोषसिद्धि पर कठोर दंड का प्रावधान है। यह कार्रवाई बिहार में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ ईओयू के बढ़ते अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।