9 जुलाई 2026
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बिहार: सीवान उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के 5 ठिकानों पर ईओयू का छापा, ₹2.36 करोड़ की अवैध संपत्ति उजागर

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बिहार: सीवान उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के 5 ठिकानों पर ईओयू का छापा, ₹2.36 करोड़ की अवैध संपत्ति उजागर

सारांश

बिहार ईओयू ने सीवान के उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के पाँच ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। प्रारंभिक जाँच में ज्ञात आय से ₹2.36 करोड़ यानी करीब 202% अधिक संपत्ति के साक्ष्य मिले हैं। जाँच अभी जारी है।

मुख्य बातें

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 8-9 जुलाई 2026 को सीवान उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के 5 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
प्रारंभिक जाँच में आरोपी के पास वैध आय से ₹2 करोड़ 36 लाख 31 हजार अधिक संपत्ति, यानी लगभग 201.97% अधिक होने के साक्ष्य मिले।
मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत दर्ज।
तलाशी स्थल: पटना (दानापुर) , मुंगेर (चंदनबाग व लल्लूपोखर) , सीवान कार्यालय और चित्रगुप्त नगर किराए का मकान ।
बैंक खाते, निवेश और चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेजों की जाँच जारी; विस्तृत रिपोर्ट अभियान पूरा होने के बाद आएगी।

बिहार के सीवान में तैनात उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 9 जुलाई 2026 को एक साथ पाँच ठिकानों पर छापेमारी की। प्रारंभिक जाँच में यह सामने आया है कि आरोपी अधिकारी ने अपनी वैध आय से ₹2 करोड़ 36 लाख 31 हजार अधिक की संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 201.97 प्रतिशत अधिक है।

मामला कैसे दर्ज हुआ

बिहार पुलिस मुख्यालय (आर्थिक अपराध प्रभाग) के अनुसार, अंकेश कुमार गोंड के खिलाफ बुधवार, 8 जुलाई को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके तुरंत बाद पटना की विशेष न्यायालय (निगरानी) से तलाशी वारंट प्राप्त कर पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में पाँच अलग-अलग टीमें गठित की गईं।

किन-किन स्थानों पर हुई छापेमारी

ईओयू की टीमों ने एक साथ निम्नलिखित पाँच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया:

पटना के दानापुर स्थित आवास; मुंगेर के चंदनबाग स्थित पैतृक घर; मुंगेर के लल्लूपोखर स्थित व्यवसायिक भवन; सीवान स्थित उत्पाद विभाग का कार्यालय कक्ष; तथा चित्रगुप्त नगर स्थित किराए का आवास। गुरुवार सुबह भी यह छापेमारी अभियान जारी रहा।

जाँच में क्या मिला

सीवान उत्पाद विभाग के बैरक और कार्यालय परिसर में ईओयू की टीम सुबह से दस्तावेजों और अभिलेखों की गहन जाँच कर रही है। टीम बैंक खातों, निवेश, चल-अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी पड़ताल में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान पूरा होने के बाद आर्थिक अपराध इकाई विस्तृत जानकारी साझा करेगी।

कितनी बड़ी है अवैध संपत्ति

जाँच में प्रथम दृष्टया यह स्थापित हुआ है कि आरोपी अधिकारी की कुल संपत्ति उनकी वैध आय से ₹2 करोड़ 36 लाख 31 हजार अधिक है — यानी ज्ञात आय का लगभग 202 प्रतिशत। गौरतलब है कि यह आँकड़ा प्रारंभिक जाँच पर आधारित है; अंतिम रिपोर्ट में यह संख्या बदल भी सकती है।

आगे क्या होगा

ईओयू के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जाँच पूरी होने के बाद विधिक कार्रवाई के अगले चरण तय किए जाएंगे। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की इन धाराओं के तहत दोषसिद्धि पर कठोर दंड का प्रावधान है। यह कार्रवाई बिहार में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ ईओयू के बढ़ते अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस छापेमारी की असली कसौटी है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकेश कुमार गोंड कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
अंकेश कुमार गोंड बिहार के सीवान में तैनात उत्पाद निरीक्षक हैं। उन पर अपनी वैध आय से लगभग 202% अधिक, यानी ₹2 करोड़ 36 लाख 31 हजार की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
ईओयू ने किन-किन स्थानों पर छापेमारी की?
आर्थिक अपराध इकाई ने पटना के दानापुर स्थित आवास, मुंगेर के चंदनबाग स्थित पैतृक घर, मुंगेर के लल्लूपोखर स्थित व्यवसायिक भवन, सीवान उत्पाद विभाग कार्यालय और चित्रगुप्त नगर स्थित किराए के आवास — कुल पाँच स्थानों पर एक साथ तलाशी ली।
यह मामला किस कानून के तहत दर्ज हुआ है?
यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के तहत दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत आय से अधिक संपत्ति रखना दंडनीय अपराध है।
जाँच में अब तक क्या मिला है?
प्रारंभिक जाँच में बैंक खाते, निवेश, चल-अचल संपत्तियों और वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ईओयू विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी और विधिक कार्रवाई के अगले चरण तय किए जाएंगे। पटना की विशेष न्यायालय (निगरानी) इस मामले की सुनवाई करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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