ईओयू का दरभंगा BDO पर छापा: ₹89.13 लाख की अनुपातहीन संपत्ति, 6 ठिकानों पर तलाशी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बुधवार, 27 मई 2026 को दरभंगा के केवटी ब्लॉक के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) चंद्रमोहन पासवान से जुड़े 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जाँच में कथित तौर पर उनकी ज्ञात आय से 81.03 प्रतिशत अधिक संपत्ति का पता चला है, जिसका अनुमानित मूल्य ₹89.13 लाख आँका गया है। ईओयू ने पासवान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
छापेमारी का विवरण
ईओयू की टीमों ने मुजफ्फरपुर की विशेष सतर्कता अदालत से मंगलवार को तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद यह कार्रवाई शुरू की। तलाशी अभियान निम्नलिखित स्थानों पर चलाया गया — दरभंगा के बहादुरपुर इलाके में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियाँ; मधुबनी के बाबूबरही ब्लॉक में पैतृक घर और व्यावसायिक परिसर; तथा दरभंगा जिले के केवटी ब्लॉक में आधिकारिक कार्यालय और आवास।
ईओयू के अनुसार जाँच के दौरान बैंक खाते के विवरण, निवेश रिकॉर्ड, भूमि और संपत्ति के दस्तावेज, आभूषण तथा अन्य चल-अचल संपत्तियों की जाँच की गई। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों से अतिरिक्त वित्तीय लेनदेन के महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं।
पूर्व में भी हुई थी कार्रवाई
यह ऐसे समय में आया है जब ईओयू ने इससे पहले 15 मई को जमुई जिले के झाझा ब्लॉक में ग्रामीण कार्य प्रभाग में तैनात कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के परिसरों पर भी छापेमारी की थी। उस मामले में शुरुआती जाँच में कथित तौर पर ₹2.006 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति का पता चला था, जो उनकी ज्ञात आय से 81.5 प्रतिशत अधिक बताई गई। पटना के कंकड़बाग इलाके, जमुई और झाझा स्थित ग्रामीण कार्य प्रभाग के कार्यालय में तलाशी के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
गौरतलब है कि यह दूसरी बड़ी छापेमारी है जो ईओयू ने इसी महीने बिहार के सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध की है, जो राज्य में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान की बढ़ती गति को दर्शाती है।
सरकार का रुख और व्यापक अभियान
इन छापेमारियों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार के उस व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। ईओयू की सक्रियता यह संकेत देती है कि राज्य सरकार जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर भी निगरानी कस रही है।
आगे की जाँच
ईओयू ने स्पष्ट किया है कि चंद्रमोहन पासवान के मामले में जाँच अभी जारी है और कई वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जाँच की जा रही है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।