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ईओयू का दरभंगा BDO पर छापा: ₹89.13 लाख की अनुपातहीन संपत्ति, 6 ठिकानों पर तलाशी

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ईओयू का दरभंगा BDO पर छापा: ₹89.13 लाख की अनुपातहीन संपत्ति, 6 ठिकानों पर तलाशी

सारांश

बिहार ईओयू ने दरभंगा के BDO चंद्रमोहन पासवान के 6 ठिकानों पर छापा मारा और ₹89.13 लाख की कथित अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा किया। यह मई 2026 में ईओयू की दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान की बढ़ती रफ्तार को दर्शाती है।

मुख्य बातें

ईओयू ने 27 मई 2026 को दरभंगा के केवटी ब्लॉक BDO चंद्रमोहन पासवान के 6 ठिकानों पर छापेमारी की।
कथित अनुपातहीन संपत्ति का मूल्य ₹89.13 लाख , ज्ञात आय से 81.03% अधिक।
मुजफ्फरपुर की विशेष सतर्कता अदालत से वारंट लेकर दरभंगा, मधुबनी में तलाशी चलाई गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज; जाँच जारी।
इससे पहले 15 मई को जमुई के अभियंता गोपाल कुमार पर छापे में ₹2.006 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति मिली थी।
कार्रवाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान का हिस्सा।

बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बुधवार, 27 मई 2026 को दरभंगा के केवटी ब्लॉक के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) चंद्रमोहन पासवान से जुड़े 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जाँच में कथित तौर पर उनकी ज्ञात आय से 81.03 प्रतिशत अधिक संपत्ति का पता चला है, जिसका अनुमानित मूल्य ₹89.13 लाख आँका गया है। ईओयू ने पासवान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

छापेमारी का विवरण

ईओयू की टीमों ने मुजफ्फरपुर की विशेष सतर्कता अदालत से मंगलवार को तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद यह कार्रवाई शुरू की। तलाशी अभियान निम्नलिखित स्थानों पर चलाया गया — दरभंगा के बहादुरपुर इलाके में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियाँ; मधुबनी के बाबूबरही ब्लॉक में पैतृक घर और व्यावसायिक परिसर; तथा दरभंगा जिले के केवटी ब्लॉक में आधिकारिक कार्यालय और आवास।

ईओयू के अनुसार जाँच के दौरान बैंक खाते के विवरण, निवेश रिकॉर्ड, भूमि और संपत्ति के दस्तावेज, आभूषण तथा अन्य चल-अचल संपत्तियों की जाँच की गई। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों से अतिरिक्त वित्तीय लेनदेन के महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं।

पूर्व में भी हुई थी कार्रवाई

यह ऐसे समय में आया है जब ईओयू ने इससे पहले 15 मई को जमुई जिले के झाझा ब्लॉक में ग्रामीण कार्य प्रभाग में तैनात कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के परिसरों पर भी छापेमारी की थी। उस मामले में शुरुआती जाँच में कथित तौर पर ₹2.006 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति का पता चला था, जो उनकी ज्ञात आय से 81.5 प्रतिशत अधिक बताई गई। पटना के कंकड़बाग इलाके, जमुई और झाझा स्थित ग्रामीण कार्य प्रभाग के कार्यालय में तलाशी के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

गौरतलब है कि यह दूसरी बड़ी छापेमारी है जो ईओयू ने इसी महीने बिहार के सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध की है, जो राज्य में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान की बढ़ती गति को दर्शाती है।

सरकार का रुख और व्यापक अभियान

इन छापेमारियों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार के उस व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। ईओयू की सक्रियता यह संकेत देती है कि राज्य सरकार जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर भी निगरानी कस रही है।

आगे की जाँच

ईओयू ने स्पष्ट किया है कि चंद्रमोहन पासवान के मामले में जाँच अभी जारी है और कई वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जाँच की जा रही है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब दरभंगा के BDO पर — यह दर्शाती हैं कि निशाना केवल शीर्ष अधिकारियों तक सीमित नहीं, बल्कि ब्लॉक स्तर तक पहुँच रहा है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये छापे केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई हैं या इनसे दोषसिद्धि तक की दर में वास्तविक सुधार आएगा। बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों में एफआईआर दर्ज होना और अदालत में सज़ा मिलना — इन दोनों के बीच की खाई ऐतिहासिक रूप से चौड़ी रही है। जब तक मुकदमों की प्रगति और दोषसिद्धि के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक इस अभियान की असली सफलता को परखना मुश्किल है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईओयू ने दरभंगा BDO पर छापा क्यों मारा?
ईओयू ने BDO चंद्रमोहन पासवान पर कथित तौर पर अपनी ज्ञात आय से 81.03% अधिक संपत्ति जमा करने के आरोप में छापेमारी की। अनुमानित अनुपातहीन संपत्ति का मूल्य ₹89.13 लाख बताया गया है।
चंद्रमोहन पासवान के खिलाफ कौन-सा कानूनी कदम उठाया गया है?
ईओयू ने पासवान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। जाँच अभी जारी है और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है।
छापेमारी किन-किन स्थानों पर हुई?
तलाशी अभियान दरभंगा के बहादुरपुर इलाके में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों, मधुबनी के बाबूबरही ब्लॉक में पैतृक घर और व्यावसायिक परिसरों, तथा दरभंगा जिले के केवटी ब्लॉक में आधिकारिक कार्यालय और आवास पर चलाया गया।
बिहार ईओयू का यह अभियान किस व्यापक संदर्भ में है?
यह छापेमारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान का हिस्सा है। इससे पहले 15 मई को जमुई के कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के परिसरों पर भी ईओयू ने छापा मारा था, जिसमें ₹2.006 करोड़ की कथित अनुपातहीन संपत्ति मिली थी।
गोपाल कुमार वाले मामले में क्या हुआ था?
15 मई को जमुई के झाझा ब्लॉक के कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के परिसरों पर छापे में ₹2.006 करोड़ की कथित अनुपातहीन संपत्ति का पता चला, जो उनकी ज्ञात आय से 81.5% अधिक थी। पटना के कंकड़बाग, जमुई और झाझा में तलाशी के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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