5 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गंडक बाढ़ में लापरवाही: बिहार सरकार ने गोपालगंज-छपरा के 7 इंजीनियर तत्काल निलंबित किए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गंडक बाढ़ में लापरवाही: बिहार सरकार ने गोपालगंज-छपरा के 7 इंजीनियर तत्काल निलंबित किए

सारांश

गंडक नदी की बाढ़ में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद बिहार सरकार ने जवाबदेही तय की — गोपालगंज के 3 और छपरा के 4 इंजीनियरों को तत्काल निलंबित किया। सितंबर के अंत में नेपाल सीमा पर भारी बारिश से उपजी इस बाढ़ ने चार जिलों को प्रभावित किया था।

मुख्य बातें

बिहार जल संसाधन विभाग ने 5 अक्टूबर 2026 को गंडक बाढ़ में तटबंध क्षति के मामले में 7 इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
गोपालगंज बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के 3 अधिकारी — मो.
जावेद अंसारी और विकास कुमार — निलंबित; मुख्यालय गया निर्धारित।
छपरा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के 4 अधिकारी — संतोष कुमार प्रभाकर , सुनील कुमार , बिनोद कुमार और चंद्रशेखर कुमार — निलंबित; मुख्यालय डिहरी निर्धारित।
कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के नियम-9 (1) (क) के तहत की गई; सभी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय।
सितंबर 2026 के अंत में नेपाल सीमा पर भारी बारिश से गंडक का जलस्तर बढ़ा, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण में बाढ़ गंभीर हुई।

बिहार के जल संसाधन विभाग ने गंडक नदी की बाढ़ के दौरान तटबंध क्षतिग्रस्त होने और उसके बाद अपेक्षित कार्रवाई में लापरवाही बरतने के आरोप में गोपालगंज और छपरा के सात इंजीनियरों को 5 अक्टूबर 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभाग की ओर से अलग-अलग अधिसूचनाएँ जारी कर यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 (1) (क) के तहत की गई है।

गोपालगंज के तीन अधिकारी निलंबित

गोपालगंज बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से जुड़े तीन अधिकारियों पर गाज गिरी है। निलंबित अधिकारियों में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी मो. जावेद अंसारी और तत्कालीन कनीय अभियंता विकास कुमार शामिल हैं। तीनों पर तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई में शिथिलता बरतने का आरोप है।

निलंबन अवधि के दौरान इन तीनों का मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, गया का कार्यालय निर्धारित किया गया है। इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

छपरा के चार इंजीनियरों पर भी कार्रवाई

रविवार देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, छपरा बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल से जुड़े चार अधिकारियों को भी निलंबित किया गया। इनमें कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, अवर प्रमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी बिनोद कुमार और कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार शामिल हैं।

निलंबन अवधि में छपरा से जुड़े इन चारों का मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी का कार्यालय निर्धारित किया गया है। इन्हें भी नियमों के अनुरूप जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

बाढ़ की पृष्ठभूमि और तटबंध क्षति

गौरतलब है कि सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा। इसके परिणामस्वरूप पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई।

नदी के बढ़े जलस्तर के दबाव में कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। इस दौरान सरकार और जल संसाधन विभाग की ओर से तटबंधों की निरंतर निगरानी, क्षतिग्रस्त हिस्सों की त्वरित मरम्मत और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में हर वर्ष बाढ़ के दौरान तटबंध प्रबंधन की चुनौतियाँ सामने आती हैं।

सरकार का संदेश और आगे की कार्रवाई

सात इंजीनियरों के इस निलंबन के ज़रिये जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि तटबंधों की सुरक्षा और बाढ़ आपदा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। विभाग की यह कार्रवाई गंडक बाढ़ के बाद जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

आगे विभागीय जाँच की प्रक्रिया के तहत इन अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि जाँच में लापरवाही सिद्ध होने पर किस स्तर की अनुशासनात्मक कार्रवाई आगे की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या केवल मध्य-स्तरीय अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है। बिहार में हर वर्ष गंडक और कोसी समेत कई नदियों के तटबंध बाढ़ में क्षतिग्रस्त होते हैं, और हर बार कुछ अधिकारी निलंबित होते हैं — फिर भी स्थायी समाधान नहीं निकलता। जब तक तटबंध निर्माण और रख-रखाव में संरचनात्मक खामियों की जाँच नहीं होती और उच्च स्तर की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तब तक यह चक्र हर मानसून में दोहराता रहेगा।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में गंडक बाढ़ के बाद कितने इंजीनियर निलंबित किए गए?
बिहार जल संसाधन विभाग ने गंडक नदी की बाढ़ में तटबंध क्षतिग्रस्त होने और लापरवाही बरतने के आरोप में कुल 7 इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। इनमें गोपालगंज के 3 और छपरा के 4 अधिकारी शामिल हैं।
गोपालगंज से कौन-से इंजीनियर निलंबित हुए?
गोपालगंज बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से तत्कालीन कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी मो. जावेद अंसारी और तत्कालीन कनीय अभियंता विकास कुमार को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय जल संसाधन विभाग का गया कार्यालय होगा।
छपरा से किन इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई?
छपरा बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल से कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, अवर प्रमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी बिनोद कुमार और कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार को निलंबित किया गया है। इनका मुख्यालय निलंबन अवधि में डिहरी कार्यालय होगा।
गंडक नदी में बाढ़ कैसे आई और कौन-से जिले प्रभावित हुए?
सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा। इससे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई और कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए।
निलंबित इंजीनियरों पर किस नियम के तहत कार्रवाई की गई है?
सभी 7 इंजीनियरों को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 (1) (क) के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले