गंडक बाढ़ में लापरवाही: बिहार सरकार ने गोपालगंज-छपरा के 7 इंजीनियर तत्काल निलंबित किए
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के जल संसाधन विभाग ने गंडक नदी की बाढ़ के दौरान तटबंध क्षतिग्रस्त होने और उसके बाद अपेक्षित कार्रवाई में लापरवाही बरतने के आरोप में गोपालगंज और छपरा के सात इंजीनियरों को 5 अक्टूबर 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभाग की ओर से अलग-अलग अधिसूचनाएँ जारी कर यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 (1) (क) के तहत की गई है।
गोपालगंज के तीन अधिकारी निलंबित
गोपालगंज बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से जुड़े तीन अधिकारियों पर गाज गिरी है। निलंबित अधिकारियों में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी मो. जावेद अंसारी और तत्कालीन कनीय अभियंता विकास कुमार शामिल हैं। तीनों पर तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई में शिथिलता बरतने का आरोप है।
निलंबन अवधि के दौरान इन तीनों का मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, गया का कार्यालय निर्धारित किया गया है। इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
छपरा के चार इंजीनियरों पर भी कार्रवाई
रविवार देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, छपरा बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल से जुड़े चार अधिकारियों को भी निलंबित किया गया। इनमें कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, अवर प्रमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी बिनोद कुमार और कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार शामिल हैं।
निलंबन अवधि में छपरा से जुड़े इन चारों का मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी का कार्यालय निर्धारित किया गया है। इन्हें भी नियमों के अनुरूप जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
बाढ़ की पृष्ठभूमि और तटबंध क्षति
गौरतलब है कि सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा। इसके परिणामस्वरूप पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई।
नदी के बढ़े जलस्तर के दबाव में कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। इस दौरान सरकार और जल संसाधन विभाग की ओर से तटबंधों की निरंतर निगरानी, क्षतिग्रस्त हिस्सों की त्वरित मरम्मत और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में हर वर्ष बाढ़ के दौरान तटबंध प्रबंधन की चुनौतियाँ सामने आती हैं।
सरकार का संदेश और आगे की कार्रवाई
सात इंजीनियरों के इस निलंबन के ज़रिये जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि तटबंधों की सुरक्षा और बाढ़ आपदा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। विभाग की यह कार्रवाई गंडक बाढ़ के बाद जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
आगे विभागीय जाँच की प्रक्रिया के तहत इन अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि जाँच में लापरवाही सिद्ध होने पर किस स्तर की अनुशासनात्मक कार्रवाई आगे की जाती है।