भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप: नरकटिया बांध पर महिलाओं ने गाए पारंपरिक गीत, हजारों परिवार संकट में
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने और तेज कटाव के कारण दियारा क्षेत्र के हजारों परिवारों का जीवन संकट में पड़ गया है। नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर इलाके में नरकटिया बांध पर स्थानीय महिलाओं ने 2 सितंबर को एक अनोखे तरीके से गंगा को शांत करने की प्रार्थना की — पारंपरिक गीत गाकर। महिलाओं का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
नरकटिया बांध पर भावुक दृश्य
वीडियो में महिलाएं नरकटिया बांध पर एकत्र होकर 'हे मैया, हे गंगा मैया, तोरा प्रणाम...' जैसे पारंपरिक लोकगीत गाती दिखाई दे रही हैं। उनका कहना है कि उनके लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि माँ के समान है और संकट की इस घड़ी में वे अपनी आस्था के सहारे उनसे रहम की गुहार लगा रही हैं।
स्थानीय महिला फगुनी देवी ने कहा कि गंगा मैया से उनकी एकमात्र प्रार्थना है कि नदी अपना पानी समेट ले और कटाव बंद हो जाए। उन्होंने भावुक होकर कहा, 'अगर कटाव नहीं रुका तो गांव उजड़ जाएगा और बाल-बच्चों को लेकर लोग कहां जाएंगे।' एक अन्य महिला देवी ने भी कहा कि गंगा का रूप बेहद रौद्र है और लगातार कटान हो रहा है।
कटाव से हुई तबाही
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेज कटाव के कारण राघोपुर में कई घर पहले ही नदी में समा चुके हैं। बांध के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों के सामने अपना आशियाना बचाने की कड़ी चुनौती है। प्रशासन की ओर से कई परिवारों को घर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
भागलपुर के शंकरपुर इलाके में भी स्थिति गंभीर है। रेलवे लाइन के समीप स्थित चैती दुर्गा मंदिर और बजरंगबली मंदिर गंगा की तेज धारा में समा गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कई दिनों से जमीन लगातार नदी की ओर खिसक रही थी और कटाव तेज होता जा रहा था।
प्रशासन की कार्रवाई
प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें कटाव निरोधक कार्य में जुटी हैं। बांध को बचाने के लिए आवश्यक संसाधन और मशीनरी तैनात की गई है। विभागीय टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं।
आस्था और भय का संगम
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी पीढ़ियां प्रकृति का सम्मान करती थीं, उससे भय भी मानती थीं और उसकी शक्ति को समझती थीं। आज भी संकट की इस घड़ी में वही आस्था लोगों को सहारा दे रही है। यह घटना एक ओर जहाँ लोगों की गहरी धार्मिक परंपरा को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ और कटाव से उपजा भय भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
एक तरफ प्रशासन तकनीकी उपायों से बांध को बचाने में लगा है, तो दूसरी तरफ महिलाएं गीत और प्रार्थना के माध्यम से गंगा मैया से अपने गांव और परिवारों पर दया करने की विनती कर रही हैं। आने वाले दिनों में जलस्तर और कटाव की स्थिति पर सबकी निगाहें टिकी हैं।