भागलपुर बाढ़-कटाव: राघोपुर में गंगा की धारा मोड़ने की तैयारी, IWAI की ड्रेजिंग मशीन होगी तैनात
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भागलपुर जिले में बाढ़ और कटाव की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने 31 अगस्त को युद्धस्तर पर राहत, बचाव और सुरक्षात्मक अभियान तेज कर दिया है। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल, भारी मशीनरी, तकनीकी विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में श्रमबल तैनात किए गए हैं। विशेष रूप से राघोपुर में गंगा की मुख्य धारा का रुख मोड़ने की दिशा में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की ड्रेजिंग मशीन के उपयोग की तैयारी शुरू कर दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
जिले के कई संवेदनशील स्थलों पर समानांतर रूप से निरोधक कार्य जारी हैं। रेलवे बांध के संरक्षण के साथ-साथ महादेवपुर घाट और ब्रह्मस्थान में भी सुरक्षात्मक कार्य तेज गति से चल रहे हैं। इसके अलावा 'ई-नोज' सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी कटाव-रोधी एवं सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। ठेकेदारों के साथ भारी मशीनें लगाई गई हैं ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी सुरक्षात्मक कार्य पूरे किए जा सकें।
विशेषज्ञ की राय: सीट पाइलिंग से बचाव संभव
भागलपुर के राघोपुर तटबंध पर मौजूद बाढ़ प्रमंडल के मुख्य अभियंता जय प्रकाश ने बताया कि सीट पाइलिंग एक ठोस तकनीकी माध्यम है, जिससे कटाव वाले स्थान और प्रभावित आबादी को सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो बांध ध्वस्त हुआ है, वह जमींदारी बांध है, जबकि जहाँ वे खड़े थे, वह रेलवे लाइन का पुराना बांध है जो सीधे गंगा नदी के किनारे स्थित है। मुख्य अभियंता के अनुसार, इसी स्थान पर लंबाई में सीट पाइलिंग कर बांध को बचाया जा सकता है।
गंगा की धारा मोड़ने की रणनीति
राघोपुर में गंगा के प्रचंड वेग से बढ़ते कटाव और टूटे बांध की मरम्मत में आ रही लगातार बाधाओं के बीच सरकार ने नदी की मुख्य धारा का रुख मोड़ने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, IWAI की ड्रेजिंग मशीन के जरिए नदी के बहाव को कटाव स्थल से हटाने की संभावना पर विचार किया गया है। गंगा की तेज धारा सीधे कटाव स्थल पर दबाव बना रही है, जिससे क्षतिग्रस्त बांध तक पहुँचना और वहाँ बाढ़ निरोधी कार्य करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। ड्रेजिंग का उद्देश्य तेज धारा का दबाव कम कर बांध की मरम्मत के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करना है।
प्रशासन की निगरानी और समन्वय
जल संसाधन विभाग की विशेषज्ञ टीमें विभिन्न स्थलों का निरंतर निरीक्षण कर रही हैं। विशेषज्ञों से प्राप्त तकनीकी सुझावों के आधार पर मौके पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ टीमों के समन्वित प्रयास से सभी जरूरी कार्य समय पर पूरे करने का प्रयास किया जा रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार के कई जिले मानसून की बाढ़ से जूझ रहे हैं और गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब बना हुआ है।
आगे की राह
गौरतलब है कि राघोपुर जैसे क्षेत्रों में गंगा का कटाव हर वर्ष बड़ी आबादी को विस्थापित करता है और कृषि भूमि को निगल जाता है। ड्रेजिंग मशीन की तैनाती और सीट पाइलिंग जैसे तकनीकी हस्तक्षेप इस बार दीर्घकालिक समाधान की दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता अभी तत्काल बांध सुरक्षा और प्रभावित आबादी को राहत पहुँचाना है, जबकि स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञ सुझावों पर काम जारी रहेगा।