31 अगस्त 2026
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भागलपुर बाढ़-कटाव: राघोपुर में गंगा की धारा मोड़ने की तैयारी, IWAI की ड्रेजिंग मशीन होगी तैनात

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भागलपुर बाढ़-कटाव: राघोपुर में गंगा की धारा मोड़ने की तैयारी, IWAI की ड्रेजिंग मशीन होगी तैनात

सारांश

भागलपुर में गंगा का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। राघोपुर में टूटे बांध की मरम्मत रोकने वाली तेज धारा से निपटने के लिए अब IWAI की ड्रेजिंग मशीन से नदी का रुख मोड़ने की अनूठी रणनीति अपनाई जा रही है। सीट पाइलिंग तकनीक से बांध बचाने की कोशिश जारी है।

मुख्य बातें

भागलपुर जिला प्रशासन ने 31 अगस्त को बाढ़-कटाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर अभियान तेज किया।
राघोपुर में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की ड्रेजिंग मशीन से गंगा की मुख्य धारा मोड़ने की तैयारी।
बाढ़ प्रमंडल के मुख्य अभियंता जय प्रकाश के अनुसार, सीट पाइलिंग से रेलवे बांध और प्रभावित आबादी को बचाया जा सकता है।
ध्वस्त बांध जमींदारी बांध है; रेलवे लाइन का पुराना बांध गंगा किनारे सुरक्षा की अंतिम कड़ी है।
महादेवपुर घाट , ब्रह्मस्थान और 'ई-नोज' बिंदु पर समानांतर कटाव-रोधी कार्य जारी।
जल संसाधन विभाग की विशेषज्ञ टीमें सभी संवेदनशील स्थलों का निरंतर निरीक्षण कर रही हैं।

बिहार के भागलपुर जिले में बाढ़ और कटाव की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने 31 अगस्त को युद्धस्तर पर राहत, बचाव और सुरक्षात्मक अभियान तेज कर दिया है। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल, भारी मशीनरी, तकनीकी विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में श्रमबल तैनात किए गए हैं। विशेष रूप से राघोपुर में गंगा की मुख्य धारा का रुख मोड़ने की दिशा में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की ड्रेजिंग मशीन के उपयोग की तैयारी शुरू कर दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

जिले के कई संवेदनशील स्थलों पर समानांतर रूप से निरोधक कार्य जारी हैं। रेलवे बांध के संरक्षण के साथ-साथ महादेवपुर घाट और ब्रह्मस्थान में भी सुरक्षात्मक कार्य तेज गति से चल रहे हैं। इसके अलावा 'ई-नोज' सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी कटाव-रोधी एवं सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। ठेकेदारों के साथ भारी मशीनें लगाई गई हैं ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी सुरक्षात्मक कार्य पूरे किए जा सकें।

विशेषज्ञ की राय: सीट पाइलिंग से बचाव संभव

भागलपुर के राघोपुर तटबंध पर मौजूद बाढ़ प्रमंडल के मुख्य अभियंता जय प्रकाश ने बताया कि सीट पाइलिंग एक ठोस तकनीकी माध्यम है, जिससे कटाव वाले स्थान और प्रभावित आबादी को सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो बांध ध्वस्त हुआ है, वह जमींदारी बांध है, जबकि जहाँ वे खड़े थे, वह रेलवे लाइन का पुराना बांध है जो सीधे गंगा नदी के किनारे स्थित है। मुख्य अभियंता के अनुसार, इसी स्थान पर लंबाई में सीट पाइलिंग कर बांध को बचाया जा सकता है।

गंगा की धारा मोड़ने की रणनीति

राघोपुर में गंगा के प्रचंड वेग से बढ़ते कटाव और टूटे बांध की मरम्मत में आ रही लगातार बाधाओं के बीच सरकार ने नदी की मुख्य धारा का रुख मोड़ने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, IWAI की ड्रेजिंग मशीन के जरिए नदी के बहाव को कटाव स्थल से हटाने की संभावना पर विचार किया गया है। गंगा की तेज धारा सीधे कटाव स्थल पर दबाव बना रही है, जिससे क्षतिग्रस्त बांध तक पहुँचना और वहाँ बाढ़ निरोधी कार्य करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। ड्रेजिंग का उद्देश्य तेज धारा का दबाव कम कर बांध की मरम्मत के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करना है।

प्रशासन की निगरानी और समन्वय

जल संसाधन विभाग की विशेषज्ञ टीमें विभिन्न स्थलों का निरंतर निरीक्षण कर रही हैं। विशेषज्ञों से प्राप्त तकनीकी सुझावों के आधार पर मौके पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ टीमों के समन्वित प्रयास से सभी जरूरी कार्य समय पर पूरे करने का प्रयास किया जा रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार के कई जिले मानसून की बाढ़ से जूझ रहे हैं और गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब बना हुआ है।

आगे की राह

गौरतलब है कि राघोपुर जैसे क्षेत्रों में गंगा का कटाव हर वर्ष बड़ी आबादी को विस्थापित करता है और कृषि भूमि को निगल जाता है। ड्रेजिंग मशीन की तैनाती और सीट पाइलिंग जैसे तकनीकी हस्तक्षेप इस बार दीर्घकालिक समाधान की दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता अभी तत्काल बांध सुरक्षा और प्रभावित आबादी को राहत पहुँचाना है, जबकि स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञ सुझावों पर काम जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि बांध सुरक्षा के लिए हर साल आपातकालीन उपाय क्यों अपनाने पड़ते हैं। जमींदारी बांध का ध्वस्त होना और रेलवे बांध पर निर्भरता यह दर्शाती है कि दशकों पुराना बुनियादी ढाँचा मानसून के बढ़ते दबाव को झेलने में सक्षम नहीं रहा। ड्रेजिंग और सीट पाइलिंग तात्कालिक राहत दे सकती हैं, पर बिहार में गंगा कटाव की स्थायी समस्या के लिए दीर्घकालिक नदी प्रबंधन नीति की दरकार है जो अभी तक अधूरी है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भागलपुर में बाढ़-कटाव रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
जिला प्रशासन ने संवेदनशील स्थलों पर भारी मशीनरी, तकनीकी विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में श्रमबल तैनात किए हैं। महादेवपुर घाट, ब्रह्मस्थान और 'ई-नोज' बिंदु पर समानांतर कटाव-रोधी कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।
राघोपुर में गंगा की धारा मोड़ने की योजना क्यों बनाई गई है?
गंगा की तेज धारा सीधे कटाव स्थल पर दबाव बना रही है, जिससे टूटे बांध तक पहुँचना और मरम्मत करना लगभग असंभव हो गया है। IWAI की ड्रेजिंग मशीन से नदी का बहाव हटाकर बांध मरम्मत के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
सीट पाइलिंग क्या है और यह कटाव रोकने में कैसे मदद करती है?
सीट पाइलिंग एक तकनीकी विधि है जिसमें धातु या कंक्रीट की चादरें जमीन में गहराई तक ठोकी जाती हैं, जो नदी के कटाव को रोकती हैं। बाढ़ प्रमंडल के मुख्य अभियंता जय प्रकाश के अनुसार, रेलवे बांध के किनारे लंबाई में सीट पाइलिंग कर बांध और आबादी को बचाया जा सकता है।
राघोपुर में कौन सा बांध टूटा है और रेलवे बांध की क्या स्थिति है?
राघोपुर में ध्वस्त हुआ बांध जमींदारी बांध है। रेलवे लाइन का पुराना बांध अभी भी खड़ा है और गंगा नदी के किनारे स्थित है। यही बांध अभी सुरक्षा की प्रमुख कड़ी है और इसे सीट पाइलिंग से मजबूत करने की योजना है।
भागलपुर में बाढ़-कटाव से कौन से क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं?
राघोपुर, महादेवपुर घाट, ब्रह्मस्थान और 'ई-नोज' बिंदु इस समय सबसे संवेदनशील क्षेत्र हैं। इन सभी स्थानों पर जल संसाधन विभाग की टीमें निरंतर निगरानी कर रही हैं और सुरक्षात्मक कार्य जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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