25 जुलाई 2026
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बिहार में उद्योग स्थापना अब सिर्फ 30 दिन में, CM सम्राट चौधरी ने SIPB को बनाया नोडल एजेंसी

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बिहार में उद्योग स्थापना अब सिर्फ 30 दिन में, CM सम्राट चौधरी ने SIPB को बनाया नोडल एजेंसी

सारांश

बिहार में उद्योग लगाना अब पहले से कहीं आसान होगा — सिर्फ 30 दिन में मंजूरी और SIPB सचिवालय एकल नोडल एजेंसी के रूप में। CM सम्राट चौधरी की यह घोषणा राज्य को निवेश के लिए आकर्षक बनाने और युवाओं को घर पर रोज़गार देने की बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

बिहार में अब नए उद्योगों की स्थापना के लिए सभी सरकारी स्वीकृतियाँ मात्र 30 दिनों में मिलेंगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 जून 2026 को एक्स पर यह जानकारी साझा की।
SIPB (राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया।
सिंगल विंडो प्रणाली के ज़रिए सभी विभागीय अनुमोदन एक ही मंच पर उपलब्ध होंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि नए उद्योगों से बिहार के युवाओं को राज्य में ही रोज़गार के अवसर मिलें।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 9 जून 2026 को एक्स पर घोषणा की कि अब बिहार में नए उद्योगों की स्थापना के लिए सभी आवश्यक सरकारी स्वीकृतियाँ मात्र 30 दिनों के भीतर प्रदान की जाएंगी। इस निर्णय के तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है, जो सिंगल विंडो प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाएगा।

नई व्यवस्था में क्या बदलेगा

नए ढाँचे के अंतर्गत उद्योग स्थापना से जुड़े विभिन्न विभागों की स्वीकृतियाँ और अनुमोदन अब एक ही मंच — SIPB सचिवालय — के माध्यम से पूरे किए जाएंगे। इससे निवेशकों को अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सभी मंजूरियाँ तय समय-सीमा के भीतर मिल सकेंगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस बदलाव से अनुमोदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनेगी।

सरकार की मंशा और लक्ष्य

राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि निवेशकों को त्वरित सेवाएँ उपलब्ध कराकर बिहार को उद्योगों के लिए एक आकर्षक और भरोसेमंद गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए लगातार प्रयासरत है और यह निर्णय उसी दिशा में उठाया गया कदम है।

रोज़गार और अर्थव्यवस्था पर असर

सरकार का मानना है कि इस फैसले से राज्य में नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेज़ी आएगी। नए उद्योगों की स्थापना से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में काम मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार लंबे समय से औद्योगिक पिछड़ेपन और पलायन की समस्या से जूझ रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि बिहार में औद्योगिक निवेश को गति देने के प्रयास पहले भी किए जाते रहे हैं, लेकिन नौकरशाही की जटिलताएँ और विभागीय देरी बाधक रही हैं। SIPB सचिवालय को नोडल एजेंसी बनाने से विभागों के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि 30 दिन की यह समय-सीमा ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिहार में पहले भी ऐसे सुधारों की घोषणाएँ हुई हैं जो क्रियान्वयन के स्तर पर कमज़ोर पड़ गईं। असली कसौटी यह होगी कि SIPB सचिवालय के पास विभागों पर वास्तविक अधिकार है या नहीं — क्योंकि बिना दंडात्मक प्रावधान के समय-सीमा महज़ कागज़ी रहती है। बिहार की Ease of Doing Business रैंकिंग में सुधार की गुंजाइश अभी भी बड़ी है, और पलायन की समस्या तब तक हल नहीं होगी जब तक निवेश ज़मीन पर नहीं उतरता।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में उद्योग स्थापना की नई 30 दिन की मंजूरी प्रणाली क्या है?
यह बिहार सरकार की नई व्यवस्था है जिसके तहत नए उद्योगों की स्थापना के लिए सभी आवश्यक सरकारी स्वीकृतियाँ अब 30 दिनों के भीतर प्रदान की जाएंगी। SIPB सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी बनाया गया है जो सभी विभागीय अनुमोदन एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा।
SIPB सचिवालय को नोडल एजेंसी क्यों बनाया गया?
SIPB (राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद) सचिवालय को नोडल एजेंसी इसलिए बनाया गया है ताकि निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें। इससे विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और अनुमोदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व समयबद्ध बनेगी।
इस फैसले से बिहार के युवाओं को क्या फायदा होगा?
सरकार के अनुसार, नए उद्योगों की स्थापना से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में काम मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे पलायन की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है।
यह घोषणा कब और कैसे की गई?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो प्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
बिहार में पहले उद्योग स्थापना में कितना समय लगता था?
स्रोत में पूर्व की समय-सीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन सरकार की इस घोषणा से संकेत मिलता है कि पहले विभिन्न विभागों से अलग-अलग मंजूरियाँ लेने में काफी अधिक समय और प्रक्रियागत जटिलता का सामना करना पड़ता था।
राष्ट्र प्रेस
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