बिहार में अब 30 दिनों में उद्योग स्थापना संभव, विजय कुमार सिन्हा ने बताई नई निवेश नीति
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 11 जून 2026 को घोषणा की कि राज्य में उद्योग स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया अब मात्र 30 दिनों में पूरी की जा सकेगी। एनडीए सरकार की इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बिहार को निवेश और औद्योगिक विकास के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
नई व्यवस्था में क्या है खास
सिन्हा के अनुसार, उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सरल बनाने के लिए एक नई नीतिगत रूपरेखा लागू की जा रही है। इसके तहत निवेशकों को समयबद्ध सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए सिंगल विंडो प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे उद्योग स्थापना से जुड़ी सभी अनुमतियों और स्वीकृतियों का त्वरित निपटारा हो सकेगा।
एकल नोडल एजेंसी की भूमिका
राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह कदम निवेशकों को एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और अनुमोदन प्रक्रिया में होने वाली देरी कम होगी।
रोज़गार और औद्योगिक विकास पर असर
मंत्री सिन्हा ने कहा कि इस पहल से राज्य में नए उद्योग स्थापित होंगे, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और बिहार के युवाओं के लिए रोज़गार के अधिक अवसर सृजित होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में बेरोज़गारी और पलायन की समस्या लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। गौरतलब है कि राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई नीतिगत सुधार कर रही है।
मंत्री का एक्स पर संदेश
सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'अब मात्र 30 दिनों में बिहार में लगाइए उद्योग। एनडीए सरकार बिहार को निवेश और उद्योग के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सरल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे निवेशकों को बेहतर सुविधा और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी।'
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि नीतिगत घोषणाओं को ज़मीन पर उतारने के लिए क्रियान्वयन तंत्र की मज़बूती सबसे अहम होगी। सिंगल विंडो और नोडल एजेंसी की अवधारणा देश के कई राज्यों में पहले भी लागू की जा चुकी है, और बिहार के लिए इसकी सफलता निर्भर करेगी कि विभागीय समन्वय कितना प्रभावी रहता है।