13 अगस्त 2026
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बिहार शराबबंदी जारी रहेगी, दूसरे राज्यों की शराब कंपनियों पर अब होगी एफआईआर: मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी

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बिहार शराबबंदी जारी रहेगी, दूसरे राज्यों की शराब कंपनियों पर अब होगी एफआईआर: मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी

सारांश

बिहार के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने शराबबंदी खत्म होने की अफवाहों को खारिज किया और एक नया कदम उठाया — अब दूसरे राज्यों से बिहार में आने वाली शराब की कंपनियों पर भी एफआईआर होगी। दस साल पुराना यह कानून और सख्त होने की राह पर है।

मुख्य बातें

बिहार के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने 13 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि शराबबंदी कानून में कोई संशोधन नहीं होगा।
अन्य राज्यों से बिहार में अवैध रूप से आने वाली शराब की संबंधित कंपनियों पर अब एफआईआर दर्ज की जाएगी; प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक शराब जब्त हुई; हेरोइन, स्मैक और गांजा की जब्ती भी बढ़ी।
शराबबंदी करीब दस वर्षों से लागू है; इसका उद्देश्य महिलाओं, दलितों और अति पिछड़ा वर्ग को लाभ पहुँचाना था।
सोशल मीडिया पर शराबबंदी खत्म होने की चर्चाओं को मंत्री ने निराधार बताया।

बिहार के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य में शराबबंदी कानून न तो समाप्त होगा और न ही उसमें कोई संशोधन किया जाएगा। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी घोषणा की कि अन्य राज्यों से सीमा पार कर बिहार में आने वाली शराब के मामलों में अब संबंधित शराब कंपनियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी।

शराबबंदी पर सरकार का रुख

मंत्री मदन सहनी ने कहा कि शराबबंदी पहले भी लागू थी, आज भी है और आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन चर्चाओं को सिरे से खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि बिहार में शराबबंदी खत्म होने वाली है। उन्होंने बताया कि विभाग स्तर पर इस कानून की समय-समय पर समीक्षा होती रहती है और पिछले महीने भी ऐसी समीक्षा की गई थी।

गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी करीब दस वर्षों से लागू है। मंत्री ने बताया कि यह कानून तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उस मंशा के तहत लागू किया गया था जिसका उद्देश्य खासतौर पर महिलाओं, दलितों, अनुसूचित जाति-जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग के परिवारों को शराब की लत से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना था।

आम जनता पर असर

सहनी ने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले कई ऐसे लोग थे जो प्रतिदिन लगभग ₹500 कमाते थे और उसका बड़ा हिस्सा नशे पर खर्च कर देते थे, जिससे वे घर खाली हाथ लौटते थे। उनके अनुसार, शराबबंदी लागू होने के बाद ऐसे परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शराब की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और विपक्ष कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहा है।

कंपनियों पर एफआईआर की नई कार्रवाई

मंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब दूसरे राज्यों से बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाली शराब की संबंधित कंपनियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पिछले महीने ही विभाग को निर्देश दिया जा चुका है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। यह कदम उन कंपनियों को जवाबदेह बनाने की दिशा में उठाया गया है जिनकी शराब अवैध रूप से राज्य में पहुँच रही है।

जब्ती और प्रवर्तन

सहनी ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक मात्रा में शराब जब्त की गई है। इसके अलावा हेरोइन, स्मैक और गांजा समेत अन्य मादक पदार्थों की जब्ती भी पहले की तुलना में बढ़ी है। विभाग की ओर से लगातार छापेमारी की जा रही है और सूखे नशे के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। पूर्णिया में सामने आए एक ताजे मामले में भी विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

कांवरियों पर आरोपों को नकारा

कांवरियों के नशे में यात्रा करने संबंधी सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। उन्होंने ऐसे दावों को महज सुनी-सुनाई जानकारी बताते हुए स्पष्ट किया कि बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते। आने वाले दिनों में शराबबंदी के प्रवर्तन को और सख्त करने की तैयारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत कंपनियों के खिलाफ बिहार पुलिस की एफआईआर कितनी प्रभावी होगी। दस साल बाद भी जब्ती के आँकड़े बढ़ रहे हैं — यह सफलता की निशानी है या तस्करी के बढ़ते नेटवर्क का संकेत, यह सवाल सरकार को जवाब देना होगा।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बिहार में शराबबंदी कानून खत्म होने वाला है?
नहीं। मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने 13 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि बिहार में शराबबंदी कानून में कोई संशोधन नहीं होगा और यह पहले की तरह लागू रहेगा। सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को उन्होंने निराधार बताया।
शराब कंपनियों पर एफआईआर का नया प्रावधान क्या है?
अब दूसरे राज्यों से बिहार की सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाली शराब की संबंधित उत्पादक कंपनियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। मंत्री के अनुसार, इस संबंध में पिछले महीने विभाग को निर्देश दिया जा चुका है और प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
बिहार में शराबबंदी से किसे फायदा हुआ है?
सरकार के अनुसार, शराबबंदी से मुख्य रूप से महिलाओं, दलितों, अनुसूचित जाति-जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग के परिवारों को लाभ मिला है। पहले जो लोग रोजाना करीब ₹500 कमाकर उसका बड़ा हिस्सा नशे पर खर्च करते थे, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
बिहार में शराब और नशीले पदार्थों की जब्ती का क्या हाल है?
मंत्री मदन सहनी के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक मात्रा में शराब जब्त की गई है। इसके अलावा हेरोइन, स्मैक और गांजा समेत अन्य मादक पदार्थों की जब्ती भी बढ़ी है और विभाग की ओर से लगातार छापेमारी जारी है।
बिहार में शराबबंदी कब से लागू है?
बिहार में शराबबंदी करीब दस वर्षों से लागू है। यह कानून तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को शराब की लत से होने वाले नुकसान से बचाना था।
राष्ट्र प्रेस
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