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मामल्लन जलाशय: फिशरीज एनओसी के बिना 30% काम पूरा, 5,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका दांव पर

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मामल्लन जलाशय: फिशरीज एनओसी के बिना 30% काम पूरा, 5,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका दांव पर

सारांश

चेंगलपट्टू में मामल्लन जलाशय का 30% काम पूरा हो चुका है — लेकिन मत्स्य विभाग की NOC अभी भी नहीं मिली। 5,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका दाँव पर है और दो सरकारी विभागों के बीच खींचतान ने बड़े बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट्स में अंतर-विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

मामल्लन जलाशय परियोजना , चेंगलपट्टू , तमिलनाडु में मत्स्य विभाग की NOC के बिना निर्माण जारी है और लगभग 30% काम पूरा हो चुका है।
जलाशय 5,161 एकड़ में फैला है और इसकी वार्षिक भंडारण क्षमता 2.25 हजार मिलियन क्यूबिक फीट है।
WRD ने छह महीने निर्माण के बाद 21 जुलाई को पहली बार मत्स्य विभाग से औपचारिक NOC माँगी।
परियोजना से लगभग 5,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।
मत्स्य विभाग ने पर्यावरणीय और आजीविका प्रभाव आकलन के लिए अतिरिक्त दस्तावेज माँगे हैं, जो अभी तक नहीं मिले।

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में निर्माणाधीन मामल्लन जलाशय परियोजना विभागीय विवाद में फँस गई है — जल संसाधन विभाग (WRD) पर आरोप है कि उसने मत्स्य विभाग से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किए बिना ही निर्माण कार्य आगे बढ़ा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित पेयजल जलाशय का लगभग 30 प्रतिशत काम अब तक पूरा हो चुका है, जबकि मत्स्य विभाग की मंजूरी अभी भी लंबित है।

परियोजना का विवरण

यह जलाशय ईस्ट कोस्ट रोड और ओल्ड महाबलीपुरम रोड के बीच कोवलम सब-बेसिन में बनाया जा रहा है। लगभग 5,161 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना की वार्षिक भंडारण क्षमता 2.25 हजार मिलियन क्यूबिक फीट निर्धारित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य चेन्नई को पेयजल आपूर्ति बढ़ाना है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने जनवरी में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।

मुख्य विवाद: देरी से माँगी गई NOC

लगभग छह महीने तक निर्माण कार्य चलने के बाद WRD ने औपचारिक रूप से 21 जुलाई को अतिरिक्त मत्स्य एवं मछुआरा कल्याण निदेशक से संपर्क कर NOC का अनुरोध किया। इस देरी ने सरकार के भीतर गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि परियोजना स्थल समुद्र तट के निकट है और इससे लगभग 5,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

गौरतलब है कि परियोजना का उद्घाटन हो चुका था और काफी निर्माण पूर्ण हो गया था, फिर भी WRD ने जुलाई तक आवेदन नहीं किया — यह प्रक्रियागत चूक अब सवालों के घेरे में है।

सरकारी अधिकारियों की प्रतिक्रिया

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि WRD को निर्माण शुरू करने से पहले मत्स्य विभाग से परामर्श लेना और उसकी मंजूरी हासिल करना अनिवार्य था। अधिकारी के अनुसार, 'जब कोई बड़ी परियोजना तट के निकट हो और मछुआरों की आजीविका पर असर डालती हो, तो पूर्व-अनुमोदन और सही NOC लेना ज़रूरी है। आवश्यक मंजूरी के बिना निर्माण आरंभ करना एक गलती थी।'

मत्स्य विभाग का पक्ष

मत्स्य विभाग के अनुसार, जलाशय के संभावित पर्यावरणीय और आजीविका प्रभावों की जाँच के लिए अतिरिक्त जानकारी आवश्यक है। अधिकारियों ने बताया कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद WRD से संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने और उनकी समीक्षा के बाद ही NOC तथा संलग्न शर्तों पर निर्णय लिया जाएगा।

आगे की राह और अनिश्चितता

इस विवाद ने बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में विभागीय समन्वय की कमी को उजागर किया है। NOC लंबित रहने के बावजूद निर्माण जारी रहने से यह अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या WRD को परियोजना में बदलाव करने होंगे अथवा प्रभावित मछुआरा समुदायों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने होंगे। यह मामला तमिलनाडु में बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स में अंतर-विभागीय अनुपालन की व्यापक चुनौती को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मछुआरा परिवारों की आजीविका का सवाल तब उठाया जा रहा है जब 30% काम पहले ही हो चुका है — यह 'पहले बनाओ, बाद में पूछो' की नीति को दर्शाता है। असली परीक्षा यह है कि क्या मत्स्य विभाग की NOC प्रक्रिया अब भी परियोजना के डिज़ाइन को प्रभावित कर सकती है, या यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मामल्लन जलाशय परियोजना क्या है और यह कहाँ बन रही है?
मामल्लन जलाशय तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में ईस्ट कोस्ट रोड और ओल्ड महाबलीपुरम रोड के बीच कोवलम सब-बेसिन में निर्माणाधीन एक पेयजल परियोजना है। यह लगभग 5,161 एकड़ में फैली है और इसकी वार्षिक भंडारण क्षमता 2.25 हजार मिलियन क्यूबिक फीट है, जिसका उद्देश्य चेन्नई की पेयजल आपूर्ति बढ़ाना है।
WRD और मत्स्य विभाग के बीच विवाद की वजह क्या है?
जल संसाधन विभाग (WRD) ने मत्स्य विभाग से अनिवार्य NOC लिए बिना ही निर्माण शुरू कर दिया। लगभग छह महीने बाद, 21 जुलाई को WRD ने औपचारिक रूप से NOC माँगी — तब तक परियोजना का करीब 30% काम पूरा हो चुका था।
इस परियोजना से मछुआरा समुदाय पर क्या असर पड़ सकता है?
परियोजना समुद्र तट के निकट स्थित है और इससे लगभग 5,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। मत्स्य विभाग इसी कारण पर्यावरणीय और आजीविका प्रभाव के आकलन के लिए अतिरिक्त जानकारी माँग रहा है।
मत्स्य विभाग ने NOC क्यों नहीं दी है?
मत्स्य विभाग के अनुसार, जलाशय के संभावित पर्यावरणीय और आजीविका प्रभावों की जाँच के लिए अभी और दस्तावेज़ चाहिए। बार-बार अनुरोध के बावजूद WRD से संतोषजनक जानकारी नहीं मिली है, इसलिए NOC पर फैसला अभी लंबित है।
क्या परियोजना में बदलाव हो सकता है या निर्माण रुकेगा?
NOC लंबित रहने के बावजूद निर्माण जारी है, इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि WRD को परियोजना के डिज़ाइन में बदलाव करना होगा या मछुआरा समुदायों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय करने होंगे। यह निर्णय मत्स्य विभाग की समीक्षा पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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