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बीरभूम खदान घोटाला: तुलु मंडल मामले में एक और अधिकारी गिरफ्तार, मोहम्मदबाजार के पूर्व BLRO सब्यसाची मंडल हिरासत में

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बीरभूम खदान घोटाला: तुलु मंडल मामले में एक और अधिकारी गिरफ्तार, मोहम्मदबाजार के पूर्व BLRO सब्यसाची मंडल हिरासत में

सारांश

बीरभूम खदान घोटाले में एसआईटी का शिकंजा और कसा — मोहम्मदबाजार के पूर्व BLRO अधिकारी सब्यसाची मंडल गिरफ्तार। फरार तुलु मंडल के बहनोई के घर से ₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलो सोना मिला था। अब 'घोषित अपराधी' घोषित कराने की कवायद जारी है।

मुख्य बातें

सब्यसाची मंडल , मोहम्मदबाजार के पूर्व बीएलआरओ अधिकारी, को शनिवार देर रात पूछताछ में बयानों की विसंगतियों के बाद गिरफ्तार किया गया।
आरोप है कि उन्होंने 2022 से 2025 के बीच फर्जी डीसीआर के जरिए सरकारी राजस्व में हेराफेरी में तुलु मंडल की मदद की।
फिलहाल सब्यसाची झाड़ग्राम जिले में कलेक्टर और भूमि अधिग्रहण अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
इस मामले में पहले कोषाध्यक्ष विश्वजीत साहा और तुलु के करीबी कौसर अली को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
तुलु मंडल के बहनोई के घर से ₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलोग्राम सोना बरामद होने के बाद तुलु फरार है; अनुमान है वह दुबई या तुर्किये में है।
सरकारी वकील ने सूरी जिला अदालत में तुलु को 'घोषित अपराधी' घोषित करने और संपत्तियाँ जब्त करने का आवेदन किया है।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में फरार पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल से जुड़े वित्तीय गबन और भ्रष्टाचार मामले में पुलिस ने एक और सरकारी अधिकारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान सब्यसाची मंडल के रूप में हुई है, जो मोहम्मदबाजार ब्लॉक के भूमि एवं भूमि सुधार कार्यालय (बीएलआरओ) के पूर्व अधिकारी हैं। उन्हें शनिवार देर रात पूछताछ के दौरान बयानों में कई विसंगतियाँ सामने आने के बाद गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी की परिस्थितियाँ

पुलिस के अनुसार, सब्यसाची मंडल को पहले शनिवार को पूछताछ के लिए सूरी बुलाया गया था। जाँच के दौरान उनके बयानों में कई गंभीर विसंगतियाँ पाई गईं, जिसके बाद उसी रात उन्हें हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल वे झाड़ग्राम जिले में कलेक्टर और भूमि अधिग्रहण अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

जाँच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सब्यसाची के तुलु मंडल से विशेष संबंध थे। उन पर सरकारी राजस्व के गबन और फर्जी डुप्लीकेट कार्बन रसीद (डीसीआर) गिरोह को मदद पहुँचाने का आरोप है।

कथित भूमिका और आरोप

जाँचकर्ताओं के अनुसार, सब्यसाची मंडल वर्ष 2022 से 2025 तक मोहम्मदबाजार के बीएलआरओ पद पर तैनात रहे। इसी अवधि में कथित तौर पर फर्जी डीसीआर के जरिए सरकारी राजस्व में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। आरोप है कि इस दौरान तुलु मंडल ने प्रशासन के एक वर्ग की मिलीभगत से फर्जी रसीदें तैयार करवाईं और सरकार को मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा हड़प लिया।

मामले में अब तक की गिरफ्तारियाँ

यह मामले में अब तक की नवीनतम गिरफ्तारी है। इससे पहले पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने बीएलआरओ कार्यालय के कोषाध्यक्ष विश्वजीत साहा समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया था। पाँच दौर की पूछताछ के बाद बयानों में विसंगतियाँ सामने आने पर साहा को हिरासत में लिया गया था।

इसके अलावा तुलु मंडल के बेहद करीबी कर्मचारी कौसर अली को भी कई दौर की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। जाँचकर्ताओं का दावा है कि कौसर तुलु की बेहिसाबी आय के अलावा उसके कई बैंक खातों का प्रबंधन करता था। पुलिस ने उसके पास से कई बैंक चेकबुक बरामद की थीं।

तुलु मंडल का कारोबारी नेटवर्क और फरारी

तुलु मंडल पर बीरभूम के मोहम्मदबाजार और नलहाटी समेत कई इलाकों में पत्थर और बालू के कारोबार पर कथित एकाधिकार रखने का आरोप है। यह मामला पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है।

तुलु के बहनोई मिनार मंडल के घर पर छापेमारी के दौरान ₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलोग्राम सोना बरामद होने के बाद से तुलु फरार चल रहा है। जाँचकर्ताओं का अनुमान है कि वह दुबई या तुर्किये भाग गया है।

कानूनी कार्रवाई और आगे की दिशा

हाल ही में सरकारी वकील ने सूरी जिला अदालत में तुलु मंडल को 'घोषित अपराधी' घोषित करने और उसकी संपत्तियाँ जब्त करने के लिए आवेदन दायर किया है। यह ऐसे समय में आया है जब एसआईटी की जाँच का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और एक के बाद एक सरकारी अधिकारी इस नेटवर्क के आरोपी के रूप में सामने आ रहे हैं। मामले की आगामी सुनवाई और संभावित संपत्ति जब्ती पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रशासन में व्यापक मिलीभगत का जाल है। गौरतलब है कि सब्यसाची मंडल जैसे वरिष्ठ अधिकारी का नाम सामने आना दर्शाता है कि नेटवर्क राजस्व विभाग के उच्च स्तर तक फैला हो सकता है। यह मामला उस दौर से जुड़ा बताया जाता है जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में थी, फिर भी जाँच की गति और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन पर सवाल बने हुए हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या एसआईटी तुलु मंडल को अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए स्वदेश वापस लाने में सफल होती है, या यह मामला भी उन लंबित प्रत्यर्पण फाइलों में दब जाता है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सब्यसाची मंडल कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
सब्यसाची मंडल मोहम्मदबाजार ब्लॉक के भूमि एवं भूमि सुधार कार्यालय (बीएलआरओ) के पूर्व अधिकारी हैं, जो वर्तमान में झाड़ग्राम जिले में कलेक्टर पद पर कार्यरत हैं। पूछताछ के दौरान उनके बयानों में कई विसंगतियाँ सामने आने पर उन्हें शनिवार देर रात गिरफ्तार किया गया। उन पर तुलु मंडल के साथ मिलकर फर्जी डीसीआर के जरिए सरकारी राजस्व के गबन में सहयोग करने का आरोप है।
तुलु मंडल कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
तुलु मंडल बीरभूम के मोहम्मदबाजार और नलहाटी इलाकों में पत्थर व बालू कारोबार पर कथित एकाधिकार रखने वाले खदान मालिक हैं। उन पर फर्जी डुप्लीकेट कार्बन रसीदों (डीसीआर) के जरिए करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व में गबन और प्रशासन की मिलीभगत से अकूत संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। बहनोई के घर छापे के बाद से वे फरार हैं।
तुलु मंडल के बहनोई के घर से क्या बरामद हुआ था?
तुलु मंडल के बहनोई मिनार मंडल के घर पर तलाशी के दौरान ₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलोग्राम सोना बरामद हुआ था। इसी बरामदगी के बाद तुलु मंडल फरार हो गया और तब से पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
इस मामले में अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है?
एसआईटी अब तक बीएलआरओ कोषाध्यक्ष विश्वजीत साहा, तुलु के करीबी कर्मचारी कौसर अली और अब पूर्व बीएलआरओ अधिकारी सब्यसाची मंडल सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। प्रत्येक गिरफ्तारी से पहले कई दौर की पूछताछ की गई और बयानों में विसंगतियाँ पाई गईं।
तुलु मंडल को 'घोषित अपराधी' घोषित करने की प्रक्रिया क्या है?
सरकारी वकील ने सूरी जिला अदालत में तुलु मंडल को 'घोषित अपराधी' घोषित करने और उसकी संपत्तियाँ जब्त करने के लिए आवेदन दायर किया है। यह कानूनी प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब कोई आरोपी लंबे समय से फरार हो और उसे गिरफ्तार करना संभव न हो। जाँचकर्ताओं का अनुमान है कि तुलु दुबई या तुर्किये में छिपा है।
राष्ट्र प्रेस
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