बिस्वनाथ में 'दीक्षा' योजना लॉन्च: विधायक पल्लब लोचन दास ने 30 मेधावी छात्रों को NEET-JEE कोचिंग देने की पहल शुरू की
सारांश
मुख्य बातें
असम के बिस्वनाथ विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कदम उठाते हुए विधायक पल्लब लोचन दास ने 3 अगस्त 2025 को 'दीक्षा' योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के मेधावी छात्रों को NEET और JEE जैसी अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराना है। इस योजना का विधिवत उद्घाटन असम के शिक्षा मंत्री एवं बिस्वनाथ जिले के अभिभावक मंत्री डॉ. रणोज पेगू ने कमलाकांत नाट्य समाज सभागार में किया।
योजना का स्वरूप और लाभार्थी
इस पहल के अंतर्गत बिस्वनाथ के 30 मेधावी छात्रों को एक विशेष समूह 'सुपर 30' के रूप में चुना गया है। इन सभी छात्रों को NEET और JEE की तैयारी के लिए पूर्णतः निशुल्क कोचिंग प्रदान की जाएगी। इस समूह की संपूर्ण शैक्षणिक जिम्मेदारी अग्रणी शिक्षण संस्थान हेलियन द्वारा वहन की जाएगी।
यह पहल उन छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो आर्थिक कारणों से महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
शिक्षा मंत्री की घोषणा
उद्घाटन समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगू ने कहा, 'जल्द ही पूरे राज्य में यूट्यूब के माध्यम से पढ़ाई शुरू की जाएगी।' उनके इस वक्तव्य से स्पष्ट होता है कि असम सरकार डिजिटल शिक्षा को व्यापक स्तर पर विस्तार देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ऑनलाइन शिक्षा का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर न्यूज़ लाइव के प्रबंध निदेशक सैयद ज़रीर हुसैन, जिला आयुक्त करबी सैकिया करण, बिस्वनाथ जिला मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. हिरण्य बोरा, तथा जिला भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष असीम कुमार दास सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
डिजिटल शिक्षा की बढ़ती प्रासंगिकता
गौरतलब है कि ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा ग्रहण करने की प्रवृत्ति में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषकर ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के छात्रों के लिए यह विकल्प न केवल सुलभ है, बल्कि न्यूनतम व्यय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर भी देता है।
'दीक्षा' योजना इसी दिशा में एक ठोस प्रयास है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो भविष्य में इसे बिस्वनाथ के अन्य क्षेत्रों तथा असम के दूसरे जिलों में भी विस्तारित किए जाने की संभावना है।