पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती 2026: भाजपा नेताओं ने किया एकात्म मानवदर्शन और अंत्योदय को नमन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने 25 सितंबर 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और भारतीय जनसंघ तथा भाजपा के वैचारिक आधार के रूप में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। नेताओं ने 'एकात्म मानवदर्शन' और 'अंत्योदय' के सिद्धांत को आज की सरकारी नीतियों की प्रेरणा बताया।
हर्ष मल्होत्रा ने गिनाया वैचारिक योगदान
केंद्रीय राज्य मंत्री और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मजयंती है। अगर किसी नेता ने भारतीय जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी को वैचारिक दिशा देने का काम किया, तो वे वही थे।' उन्होंने बताया कि उपाध्याय ने 1951 से 1968 तक भारतीय जनसंघ के महासचिव के रूप में सेवा दी और बाद में अध्यक्ष भी बने।
मल्होत्रा ने कहा कि 'एकात्म मानव' दर्शन आज भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकारों का मूल विचार है — जिसका केंद्र समाज के सबसे गरीब, पीड़ित और शोषित वर्ग का उत्थान है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 200 से अधिक गरीब कल्याण एवं जनकल्याण योजनाएं इसी दर्शन की अभिव्यक्ति हैं।
मल्होत्रा के अनुसार पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार की नीतियों और उपाध्याय के दर्शन के फलस्वरूप 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं — हालांकि यह आँकड़ा भाजपा का अपना दावा है।
मनोज तिवारी का वैश्विक प्रासंगिकता पर ज़ोर
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि 25 सितंबर पार्टी के लिए विशेष महत्व का दिन है क्योंकि इसी तिथि को पंडित उपाध्याय का जन्म हुआ था। उन्होंने उनके जन्मस्थान ब्रज क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उपाध्याय के विचार आज वैश्विक स्तर पर समीक्षा और अनुसरण का विषय बन रहे हैं।
तिवारी ने यह भी कहा कि उपाध्याय के दर्शन में वैश्विक आतंकवाद के समापन और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का हल निहित है। उनके अनुसार, 'जब तक अंत्योदय की भावना प्रत्येक देश के अंदर नहीं आएगी, तब तक गरीबी समाप्त नहीं हो सकती।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं कहते हैं कि वे उपाध्याय के दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं।
आशीष सूद ने 'चिती' और 'विराट' की अवधारणा समझाई
दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने पंडित उपाध्याय को भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं का 'आदर्श पुरुष' बताया। उन्होंने कहा कि उपाध्याय ने समग्र मानवतावाद के दर्शन में राष्ट्र की सामूहिक चेतना को 'चिती' के रूप में परिभाषित किया और समझाया कि इसके जागृत होने से राष्ट्र का 'विराट' स्वरूप उत्पन्न होता है।
सूद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड काल से ही सामूहिक चेतना के महत्व पर बल दिया है और यह क्रम अब भी जारी है — जो उपाध्याय की वैचारिक परंपरा की निरंतरता है।
बांसुरी स्वराज ने दी कूटनीतिक आयाम की याद
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, 'उन्होंने हमें समग्र मानवतावाद का दर्शन और अंत्योदय का सिद्धांत दिया, जिसके तहत विकास का लाभ कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह सिद्धांत प्रधानमंत्री मोदी की विकास नीतियों और कूटनीतिक दृष्टिकोण का आधार बना है।
पंडित उपाध्याय की विरासत का संक्षिप्त परिचय
गौरतलब है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गाँव में हुआ था। उन्होंने 'एकात्म मानवदर्शन' का प्रतिपादन किया, जो पश्चिमी पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों का विकल्प प्रस्तुत करता है। भाजपा उनकी जयंती को 'सुशासन दिवस' के रूप में भी मनाती है।
आने वाले समय में भाजपा इस वैचारिक विरासत को अपनी जनकल्याण योजनाओं की वैधता के आधार के रूप में प्रस्तुत करती रहेगी — यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इन दावों को ज़मीनी परिणामों से कितना जोड़ पाती है।