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भाजपा सांसद कौशल किशोर का 13 सितंबर को लखनऊ में आत्मसम्मान रैली का ऐलान, बोले- जानबूझकर किया गया अपमान

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भाजपा सांसद कौशल किशोर का 13 सितंबर को लखनऊ में आत्मसम्मान रैली का ऐलान, बोले- जानबूझकर किया गया अपमान

सारांश

भाजपा सांसद कौशल किशोर ने 13 सितंबर को लखनऊ में आत्मसम्मान रैली का ऐलान किया है — जो अपमान के आरोप, संविदा कर्मियों की पीड़ा और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का मिला-जुला संदेश है। मलिहाबाद रैली पर कथित दबाव की कहानी इस बार और बड़े मंच पर दोहराई जा रही है।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद कौशल किशोर ने 13 सितंबर को लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर आत्मसम्मान रैली की घोषणा की।
रैली पासी महासंघ के बैनर तले आयोजित होगी और सुबह 10 बजे शुरू होगी।
किशोर ने संविदा व आउटसोर्सिंग प्रथा को 'गुलामी की व्यवस्था' करार दिया और इसे समाप्त करने की माँग की।
रैली पंडित दीनदयाल उपाध्याय , डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों को समर्पित है।
कथित तौर पर 19 मई की मलिहाबाद स्वाभिमान रैली पर दबाव डाला गया था और पुलिस एस्कॉर्ट व गनर वापस ले लिए गए थे।
किशोर ने स्पष्ट किया कि वे अभी भी भाजपा में हैं और रहेंगे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद कौशल किशोर ने 1 सितंबर को घोषणा की कि 13 सितंबर को लखनऊ के दुबग्गा स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर एक बड़ी आत्मसम्मान रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर अपमानित किया गया है और यह रैली केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान के लिए नहीं, बल्कि देश के शहीदों, सनातन धर्म के रक्षकों और कम वेतन पर काम कर रहे संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मियों के स्वाभिमान के लिए है। रैली का आयोजन पासी महासंघ के बैनर तले किया जा रहा है।

रैली का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

सांसद कौशल किशोर ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग और संविदा प्रथा को वे 'गुलामी की व्यवस्था' मानते हैं। उनके अनुसार, 'आउटसोर्सिंग और संविदा की यह प्रथा आत्मसम्मान को झकझोरती है। यह लोगों को गुलाम बनाने की प्रथा है और इसे खत्म होना चाहिए।' उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि 13 सितंबर को सुबह 10 बजे राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर बड़ी संख्या में पहुँचें।

किशोर ने बताया कि यह रैली पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों को समर्पित है।

मलिहाबाद रैली विवाद की पृष्ठभूमि

कौशल किशोर ने बताया कि इससे पहले 19 मई को मलिहाबाद में स्वाभिमान रैली का आयोजन किया गया था, जिसे रोकने की कथित तौर पर पूरी कोशिश की गई। उनके अनुसार, उन पर दबाव बनाया गया, पुलिस एस्कॉर्ट और गनर वापस ले लिए गए और रैली न करने को कहा गया — यह सब तब, जब उनकी ही पार्टी की सरकार सत्ता में है।

उन्होंने बताया कि मलिहाबाद रैली की पृष्ठभूमि यह थी कि मलिहाबाद को बसाने वाले मल्ही पासी का ऐतिहासिक गेट उखाड़ दिया गया था। इसे पुनः स्थापित कराने के लिए उन्हें और मलिहाबाद विधायक (उनकी पत्नी) को 5 दिन तक तपती धूप में धरने पर बैठना पड़ा। गेट का विरोध करने वालों ने बिना अनुमति प्रदर्शन किया, होर्डिंग पर पथराव किया और उन्हें व उनकी विधायक पत्नी को अपशब्द कहे गए।

सिद्धांतों से भटकाव पर चेतावनी

सांसद ने राजनीतिक दलों को परोक्ष रूप से आगाह करते हुए कहा कि जब भी कोई व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल अपने मूल उसूलों और विचारधारा से भटकता है, तो जनता का विश्वास टूट जाता है। उन्होंने न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का उदाहरण देते हुए कहा, 'गेंद जितनी ऊपर चली जाती है और फिर जब गिरती है, तो उसकी स्पीड लगातार बढ़ती जाती है — उसे कोई रोक नहीं सकता।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी किसी एक विशेष राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक सिद्धांत के रूप में सभी पर लागू होती है।

आगे की राह

13 सितंबर की आत्मसम्मान रैली यह संकेत देती है कि भाजपा के भीतर असंतोष के स्वर मुखर हो रहे हैं, भले ही कौशल किशोर यह दोहराते रहे कि वे पार्टी में हैं और रहेंगे। रैली की सफलता और उसमें जुटने वाली भीड़ यह तय करेगी कि यह मुद्दा आंतरिक दबाव का रूप लेता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पार्टी के भीतर दलित-पिछड़े नेतृत्व की उपेक्षा की एक बड़ी कहानी का हिस्सा लगता है। मलिहाबाद में पुलिस एस्कॉर्ट वापस लेने का कथित प्रकरण यदि सच है, तो यह सत्तारूढ़ दल के आंतरिक लोकतंत्र पर गंभीर सवाल उठाता है। संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों का मुद्दा वास्तविक और व्यापक है, लेकिन इसे एक सांसद की व्यक्तिगत राजनीति से अलग करके देखना ज़रूरी है। असली परीक्षा 13 सितंबर को होगी — रैली में जुटने वाली भीड़ तय करेगी कि यह आवाज़ दबाई जाएगी या दल के भीतर बदलाव की शुरुआत बनेगी।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौशल किशोर की आत्मसम्मान रैली कब और कहाँ होगी?
यह रैली 13 सितंबर को लखनऊ के दुबग्गा स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर सुबह 10 बजे आयोजित होगी। इसका आयोजन पासी महासंघ के बैनर तले किया जा रहा है।
कौशल किशोर ने रैली क्यों बुलाई है?
सांसद कौशल किशोर ने कहा कि उन्हें जानबूझकर अपमानित किया गया है और यह रैली संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मियों के स्वाभिमान, देश के शहीदों और सनातन धर्म के रक्षकों के सम्मान के लिए है। वे संविदा प्रथा को समाप्त करने की माँग भी कर रहे हैं।
मलिहाबाद रैली विवाद क्या था?
19 मई को मलिहाबाद में स्वाभिमान रैली का आयोजन किया गया था, जिसे कथित तौर पर रोकने की कोशिश की गई। किशोर के अनुसार, उनकी अनुमति रद्द की गई, पुलिस एस्कॉर्ट और गनर वापस लिए गए और उन्हें व उनकी विधायक पत्नी को अपशब्द कहे गए।
कौशल किशोर किस पार्टी से हैं और क्या वे पार्टी छोड़ रहे हैं?
कौशल किशोर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे पहले भी भाजपा में थे और आज भी हैं — रैली पार्टी-विरोध नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सम्मान और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित है।
रैली किन नेताओं के सिद्धांतों को समर्पित है?
आत्मसम्मान रैली पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों और विचारधारा को समर्पित है।
राष्ट्र प्रेस
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