भारत में गरीबी दर 27.1% से घटकर 2.3% हुई: BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने गिनाए मोदी सरकार के आँकड़े
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 31 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 2011 और 2023 के बीच भारत में 49.3 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने यह जानकारी अपने फेसबुक हैंडल पर साझा की और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सरकार की प्रगति को रेखांकित किया।
गरीबी उन्मूलन के आँकड़े
नवीन ने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अत्यधिक गरीबी की दर, जो 2011 में 27.1 प्रतिशत थी, 2023 में घटकर मात्र 2.3 प्रतिशत रह गई है। उनके अनुसार, यह विश्व में सबसे तेज़ गरीबी गिरावट की दर है। गौरतलब है कि यह दावा सरकारी स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के हवाले से किया गया है, जिसका स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
रोज़गार और महिला सशक्तिकरण
रोज़गार के मोर्चे पर नवीन ने दावा किया कि 2017 और 2023 के बीच 13.4 करोड़ नए रोज़गार सृजित हुए, जो कामकाजी उम्र की आबादी में वृद्धि से लगभग दोगुना है। उन्होंने बताया कि इस वृद्धि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रामीण महिलाओं द्वारा वेतनभोगी काम अपनाने से आया है, जिससे परिवारों में कमाने वालों की संख्या में इज़ाफा हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब रोज़गार के आँकड़ों की पद्धति और विश्वसनीयता पर विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है।
बुनियादी सुविधाएँ और कल्याणकारी योजनाएँ
बिजली पहुँच के संदर्भ में नवीन ने 2022 के सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि 99 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुँच चुकी है और ग्रामीण-शहरी अंतर में उल्लेखनीय कमी आई है। कल्याणकारी योजनाओं के मोर्चे पर उन्होंने निम्नलिखित आँकड़े प्रस्तुत किए:
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ से अधिक पक्के मकान बनाए गए हैं। 3 करोड़ महिलाएँ 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं और आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 60 करोड़ नागरिक आते हैं।
उज्ज्वला गैस कनेक्शन की संख्या 10 करोड़ तक पहुँच चुकी है, जबकि जन धन खातों की कुल संख्या 32 करोड़ हो गई है। नवीन ने यह भी बताया कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के ज़रिए लाभार्थियों को सीधे ₹53 लाख करोड़ से अधिक हस्तांतरित किए गए हैं।
अंत्योदय और विकसित भारत का एजेंडा
नवीन ने अपनी पोस्ट में कहा कि 'भारत की प्रगति जीवन में आए बदलावों और सृजित अवसरों में परिलक्षित होती है।' उन्होंने अंत्योदय की भावना को समावेशी विकास के एजेंडे की धुरी बताया। उनके अनुसार, ये आँकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि सरकार का फोकस अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने पर रहा है।
आगे की दिशा
BJP अध्यक्ष के इस बयान को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इन आँकड़ों की स्वतंत्र जाँच और तुलनात्मक अध्ययन ज़रूरी है, ताकि दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सके। सरकार के समर्थकों का तर्क है कि वैश्विक स्तर पर भारत का गरीबी उन्मूलन एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है।