15 अक्टूबर 2026
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BJP तेलंगाना प्रमुख रामचंद्र राव का विपक्ष पर पलटवार, ओवैसी की SIR याचिका को बताया 'वोट बैंक राजनीति'

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BJP तेलंगाना प्रमुख रामचंद्र राव का विपक्ष पर पलटवार, ओवैसी की SIR याचिका को बताया 'वोट बैंक राजनीति'

सारांश

BJP तेलंगाना अध्यक्ष रामचंद्र राव ने विपक्ष के विरोध को 'दोहरापन' बताया — इमरजेंसी का हवाला देकर कांग्रेस को घेरा और ओवैसी की SIR याचिका को अल्पसंख्यक वोट बैंक की सुनियोजित राजनीति करार दिया।

मुख्य बातें

BJP तेलंगाना अध्यक्ष एन.
रामचंद्र राव ने 15 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर पलटवार किया।
राव ने कहा कि कांग्रेस और AAP को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का विरोध करने का हक नहीं, क्योंकि कांग्रेस ने खुद इमरजेंसी के दौरान डीआईआर और मीसा जैसे कानूनों से नागरिकों को जेल में डाला था।
असदुद्दीन ओवैसी की सर्वोच्च न्यायालय में दायर SIR पुनर्विचार याचिका को राव ने 'लोगों को गुमराह करने' की कोशिश बताया।
राव के अनुसार किसी भी अल्पसंख्यक मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय पहले ही SIR प्रक्रिया पर विस्तृत फैसला सुना चुका है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने 15 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। राव ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना, नागरिकों को सुरक्षा देना और सार्वजनिक व निजी संपत्ति की रक्षा करना सरकार एवं प्रशासन का मूल दायित्व है।

विपक्ष के विरोध पर BJP का रुख

राव ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके छात्र संगठन एनएसयूआई ने सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास किया, जिसके चलते प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। उनके अनुसार, अब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों इस प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध कर रही हैं, जो उन्हें न्यायसंगत नहीं लगता।

राव ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी को याद रखना चाहिए कि उनके कार्यकाल में इमरजेंसी लगाई गई थी और लोगों को बिना किसी कारण के जेल में डाल दिया गया था। यहाँ तक कि छोटे छात्रों को भी डीआईआर (भारत रक्षा अधिनियम) और 'मीसा' (आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम) के तहत जेल में डाल दिया गया था।" उन्होंने जोड़ा, "इसलिए दिल्ली पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों पर कांग्रेस या AAP को विरोध करने का कोई हक नहीं है।"

ओवैसी पर सीधा निशाना

हैदराबाद से सांसद और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी राव ने तीखा हमला बोला। राव ने आरोप लगाया कि ओवैसी ने सर्वोच्च न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर की है और लोगों को यह भ्रम दे रहे हैं कि मतदाता सूची से अल्पसंख्यकों के नाम हटाए जा रहे हैं।

राव ने कहा, "यह सिर्फ लोगों को भ्रमित करने की कोशिश है। किसी भी अल्पसंख्यक मतदाता का नाम नहीं हटाया गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी, जो खुद इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा ले चुके हैं, अब वोट बैंक की राजनीति के लिए वही भाषा बोल रहे हैं जो कांग्रेस बोल रही है।

SIR प्रक्रिया पर BJP का बचाव

राव ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर विस्तृत फैसला सुना चुका है और कई स्पष्टीकरण दे चुका है। उनके अनुसार, इसके बावजूद ओवैसी पुनर्विचार याचिकाएँ दायर कर केवल अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

राव ने कांग्रेस पर भी यही आरोप लगाया — कि वह SIR हटाने की माँग केवल अल्पसंख्यकों के बीच अपना वोट बैंक सुदृढ़ करने के लिए उठा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं और मतदाता सूची पुनरीक्षण राष्ट्रीय बहस का विषय बना हुआ है।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए चलाई जाती है। इस प्रक्रिया को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों ने आशंकाएँ जताई हैं, जबकि BJP इसे पारदर्शी और संवैधानिक रूप से वैध बताती रही है। आलोचकों का कहना है कि इस विवाद की जड़ में मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर विश्वसनीयता का संकट है, जो आगामी चुनावों से पहले और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि SIR पर अदालती रुख और राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच की खाई ही असली लोकतांत्रिक तनाव का बिंदु है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एन. रामचंद्र राव कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
एन. रामचंद्र राव भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष हैं। 15 अक्टूबर 2026 को उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार का दायित्व है और कांग्रेस व AAP को प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
ओवैसी ने SIR पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका क्यों दायर की?
हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की है।
BJP ने ओवैसी के आरोपों को क्यों खारिज किया?
रामचंद्र राव ने कहा कि किसी भी अल्पसंख्यक मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया गया है और सर्वोच्च न्यायालय पहले ही SIR प्रक्रिया पर विस्तृत फैसला दे चुका है। उनके अनुसार ओवैसी की यह याचिका अल्पसंख्यक वोट बैंक में अपनी राजनीतिक स्थिति मज़बूत करने की कोशिश है।
SIR प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची की सटीकता और अद्यतनता सुनिश्चित करने के लिए चलाई जाने वाली प्रक्रिया है। इसमें फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए और नए पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं।
कांग्रेस और AAP ने किस बात का विरोध किया?
कांग्रेस और AAP ने प्रशासन द्वारा उठाए गए उन कदमों का विरोध किया जो एनएसयूआई के विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक शांति बनाए रखने के नाम पर उठाए गए। BJP ने इस विरोध को राजनीति से प्रेरित और ऐतिहासिक रूप से दोहरा मानक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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