कोझिकोड में भाजयुमो ने प्रियंका गांधी और रमेश चेन्निथला को दिखाए काले झंडे, कई कार्यकर्ता हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने 27 सितंबर 2026 को कोझिकोड जिले में वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के काफिलों को काले झंडे दिखाकर अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए। पुलिस ने मौके पर हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों को हटाया और युवा मोर्चा के कई नेताओं को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई एक दिन पहले कोल्लम में यूथ कांग्रेस द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को काले झंडे दिखाने की घटना की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया बताई जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
पहला विरोध प्रदर्शन कुट्टियाडी इलाके में जानकीकाडु के पास हुआ, जहाँ भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने रमेश चेन्निथला के काफिले को रोकने का प्रयास किया। कार्यकर्ता सड़क के संकरे हिस्से पर गाड़ियों की ओर दौड़े और काले झंडे लहराए। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और काफिले को आगे बढ़ने दिया।
दूसरी घटना थिरुवंबडी में थंबलामन्ना के पास हुई, जहाँ प्रियंका गांधी वाड्रा का काफिला गुजर रहा था। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और केरल पुलिस की सुरक्षा के बावजूद सड़क किनारे इंतज़ार कर रहे भाजयुमो कार्यकर्ता काले झंडे लेकर गाड़ियों के करीब आ गए।
हिरासत में लिए गए नेता
थिरुवंबडी पुलिस ने भाजयुमो के कई नेताओं को हिरासत में लिया, जिनमें जिला अध्यक्ष वीवी श्रीहरी और महासचिव नितिन मधुसूदनन शामिल हैं। दोनों स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को काफिलों से दूर हटाया और स्थिति को नियंत्रण में रखा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि एक दिन पहले कोल्लम में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के काफिले को काले झंडे दिखाए थे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घटना को केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा में 'गंभीर चूक' करार दिया था। इसी के जवाब में भाजयुमो ने केरल भर में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन तेज करने का ऐलान किया। इससे पहले युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने कोल्लम में केरल के मंत्री के. मुरलीधरन के काफिले को भी काले झंडे दिखाए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब केरल में BJP और कांग्रेस के बीच जमीनी स्तर पर टकराव की घटनाएँ बढ़ रही हैं। कोझिकोड में दोनों नेताओं के रास्तों पर पहले से ही कार्यकर्ताओं की तैनाती बताती है कि यह प्रदर्शन पूर्व-नियोजित था।
सुरक्षा को लेकर सवाल
इन घटनाओं ने राजनीतिक नेताओं के काफिलों की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर उस स्थिति में जब प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरे को तोड़कर गाड़ियों के करीब आ जाते हैं। CRPF सुरक्षा के बावजूद प्रियंका गांधी वाड्रा के काफिले के पास कार्यकर्ताओं का पहुँचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
भाजयुमो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और तेज किए जाएँगे। दोनों पार्टियों के बीच 'काले झंडे' की राजनीति के इस सिलसिले के जारी रहने की आशंका है, जो केरल के राजनीतिक माहौल में तनाव को और बढ़ा सकती है।