NIT राउरकेला की AI माइक्रोस्कोपी तकनीक से ब्लड कैंसर की तेज़ और सटीक पहचान संभव
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने एक एआई-सक्षम ऑटोफोकस माइक्रोस्कोपी प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) और मलेरिया की पहचान कम समय में, उच्च सटीकता के साथ करने में सक्षम है। मात्र ₹1.20 लाख की लागत से तैयार इस स्वदेशी प्रणाली को पेटेंट भी प्राप्त हो चुका है, जो इसे भारतीय स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कदम बनाता है।
तकनीक की कार्यप्रणाली
शोध टीम ने इस ऑप्टोफ्लूडिक डिजिटल माइक्रोस्कोपी प्लेटफॉर्म में डीप लर्निंग आधारित एआई को ऑप्टिकल इमेजिंग और स्वचालित गति नियंत्रण प्रणाली के साथ एकीकृत किया है। यह प्रणाली माइक्रोस्कोपिक छवियों का रियल-टाइम विश्लेषण करती है और स्वतः फोकस समायोजित कर लेती है, जिससे परीक्षण प्रक्रिया तेज़, सटीक और अधिक विश्वसनीय बनती है।
पारंपरिक माइक्रोस्कोपी में फोकस को हाथ से समायोजित करना पड़ता है, जिससे समय अधिक लगता है और त्रुटियों की संभावना बनी रहती है। यही देरी कई बार गलत निदान और उपचार में बाधा बन जाती है। नई प्रणाली इस मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम कर देती है।
प्रयोगशाला में सफल परिणाम
प्रयोगशाला स्तर पर इस प्रणाली ने ब्लड कैंसर, मलेरिया और रक्त कोशिका वर्गीकरण से जुड़ी जाँचों में सटीक परिणाम दिए हैं। इसमें एआई-संचालित ऑटोफोकस, स्वचालित गति नियंत्रण, क्लाउड-सक्षम शिक्षण और जटिल जैविक नमूनों की उन्नत इमेजिंग जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
यह तकनीक NIT राउरकेला के इनक्यूबेशन सेंटर में स्थापित स्टार्टअप ग्लोविस्टा इंस्ट्रुमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से तैयार की गई है। गौरतलब है कि यह महंगे आयातित स्वचालित माइक्रोस्कोपी सिस्टम का एक किफ़ायती स्वदेशी विकल्प बनने की क्षमता रखती है।
शोध दल और वित्त पोषण
इस परियोजना का नेतृत्व सहायक प्रोफेसर डॉ. ईरु बनोथ ने किया। शोध दल में शोध स्नातक डॉ. शेख अहमदसैदुलु, डिज़ाइन इंजीनियर अमोल लालचंद साल्वे और प्रोडक्ट मैनेजर पद्मनाभन सेल्वाकुमार शामिल रहे।
इस परियोजना को नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग से अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है, जो इसकी संस्थागत विश्वसनीयता को और मज़बूत करता है।
आगे की राह
शोधकर्ताओं के अनुसार अगला चरण इस प्रणाली के लिए बड़े पैमाने पर डेटा तैयार करना और विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड ट्रायल करना होगा, ताकि इसे वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी रूप से उपयोग किया जा सके। शोधकर्ताओं का लक्ष्य एक हैंडहेल्ड उपकरण विकसित करना है, जो डिजिटल पैथोलॉजी, पॉइंट-ऑफ-केयर हेल्थ डिवाइस, स्मार्ट लैब ऑटोमेशन और दूरस्थ स्वास्थ्य जाँच जैसी सेवाओं को नई गति दे सके।
'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप यह तकनीक भारत में स्वदेशी स्वास्थ्य नवाचार को नई पहचान दिला सकती है और ग्रामीण व दूरदराज़ के क्षेत्रों में सुलभ निदान की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।