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शहतूत की पत्तियाँ: ब्लड शुगर नियंत्रण से इम्युनिटी तक, जानें इनके औषधीय गुण

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शहतूत की पत्तियाँ: ब्लड शुगर नियंत्रण से इम्युनिटी तक, जानें इनके औषधीय गुण

सारांश

शहतूत सिर्फ गर्मियों का फल नहीं — इसकी पत्तियाँ भी एक शक्तिशाली औषधि हैं। प्रोटीन, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ये पत्तियाँ ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में सहायक मानी जाती हैं, और रेशम उद्योग की रीढ़ भी हैं।

मुख्य बातें

शहतूत (वैज्ञानिक नाम: मोरस इंडिका ) एक 10–15 मीटर ऊँचा मध्यम आकार का पेड़ है, जिसके फल सफेद, गुलाबी और बैंगनी रंग के होते हैं।
फलों में विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं; पाचन और इम्युनिटी के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
पत्तियों में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं; ब्लड शुगर और खराब कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में सहायक मानी जाती हैं।
बिहार सरकार के वन, जलवायु एवं पर्यावरण विभाग ने शहतूत के औषधीय गुणों की पुष्टि की है।
रेशम उद्योग के लिए शहतूत की पत्तियाँ अनिवार्य हैं; भारत में बड़े पैमाने पर खेती से ग्रामीण रोज़गार को बढ़ावा मिलता है।

गर्मियों में उपलब्ध शहतूत (वैज्ञानिक नाम: मोरस इंडिका) केवल एक स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि आयुर्वेद की दृष्टि से एक बहुमूल्य औषधीय पौधा भी है। बिहार सरकार के वन, जलवायु एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, इसके फल और पत्तियाँ दोनों ही पोषक तत्वों से समृद्ध हैं और शरीर को कई तरह से स्वस्थ रखने में सहायक मानी जाती हैं। 28 मई को जारी जानकारी के अनुसार, शहतूत की पत्तियों में ब्लड शुगर नियंत्रण सहित अनेक स्वास्थ्य लाभ छिपे हैं।

शहतूत का पेड़: पहचान और विशेषताएँ

मोरस इंडिका एक तेज़ी से बढ़ने वाला मध्यम आकार का पेड़ है, जिसकी ऊँचाई सामान्यतः 10 से 15 मीटर तक होती है। इसके फल सफेद, गुलाबी और गहरे बैंगनी रंग के होते हैं। लोग इन्हें ताज़ा खाने के अलावा जूस, जेली, मुरब्बा और सूखे मेवे के रूप में भी उपयोग करते हैं।

फल में पोषण का भंडार

विशेषज्ञों के अनुसार शहतूत के फलों में विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। माना जाता है कि इनका नियमित सेवन पाचन को बेहतर बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और रक्त को शुद्ध रखने में सहायक हो सकता है। आयुर्वेद में भी शहतूत का उपयोग दीर्घकाल से होता आया है।

पत्तियों के औषधीय गुण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शहतूत की पत्तियाँ भी सेहत के लिए उतनी ही उपयोगी हैं। इन पत्तियों में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें चाय, पाउडर और कुछ क्षेत्रों में सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। माना जाता है कि इन पत्तियों का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार हो सकता है।

रेशम उद्योग और ग्रामीण रोज़गार में भूमिका

शहतूत का पेड़ स्वास्थ्य लाभों के साथ-साथ रेशम उद्योग के लिए भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। रेशम के कीड़े इसी पेड़ की पत्तियाँ खाकर रेशम तैयार करते हैं। यही कारण है कि भारत में बड़े पैमाने पर शहतूत की खेती की जाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर भी उत्पन्न होते हैं।

पर्यावरणीय महत्त्व और विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण की दृष्टि से भी शहतूत का पेड़ उपयोगी माना जाता है — यह तेज़ी से बढ़ता है और मिट्टी की संरचना को मज़बूत बनाए रखने में सहायक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक फलों और पौधों को दैनिक जीवन में शामिल करना समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है — और शहतूत इस दिशा में एक सुलभ व प्रभावी विकल्प है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'माना जाता है' जैसे वाक्यांश यह भी संकेत देते हैं कि इन दावों की पुष्टि के लिए नियंत्रित नैदानिक अध्ययन अभी सीमित हैं। ब्लड शुगर नियंत्रण जैसे गंभीर स्वास्थ्य दावों को चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। साथ ही, रेशम उद्योग और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा शहतूत का आर्थिक पहलू अक्सर स्वास्थ्य चर्चाओं में अनदेखा रह जाता है, जो इस पेड़ की व्यापक उपयोगिता को अधूरा प्रस्तुत करता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहतूत की पत्तियाँ स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद हैं?
शहतूत की पत्तियों में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर नियंत्रण और खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक मानी जाती हैं। इन्हें चाय, पाउडर या सब्जी के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
शहतूत का वैज्ञानिक नाम क्या है और यह कैसा पेड़ होता है?
शहतूत का वैज्ञानिक नाम 'मोरस इंडिका' है। यह तेज़ी से बढ़ने वाला मध्यम आकार का पेड़ है जिसकी ऊँचाई सामान्यतः 10 से 15 मीटर तक होती है और इसके फल सफेद, गुलाबी व गहरे बैंगनी रंग के होते हैं।
शहतूत के फल खाने से क्या फायदे होते हैं?
शहतूत के फलों में विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। माना जाता है कि इनका सेवन पाचन सुधारने, इम्युनिटी बढ़ाने और रक्त शुद्धि में सहायक हो सकता है।
रेशम उद्योग में शहतूत का क्या महत्त्व है?
रेशम के कीड़े शहतूत की पत्तियाँ खाकर ही रेशम तैयार करते हैं, इसलिए यह पेड़ रेशम उद्योग की नींव है। भारत में बड़े पैमाने पर शहतूत की खेती होती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं।
क्या शहतूत की पत्तियाँ डायबिटीज़ में उपयोगी हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार शहतूत की पत्तियाँ ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती हैं, हालाँकि यह दावा आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित है। डायबिटीज़ के रोगियों को इन्हें चिकित्सक की सलाह के बाद ही अपने आहार में शामिल करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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