शहतूत: गर्मियों का स्वादिष्ट फल जो सेहत का भी खजाना है
सारांश
Key Takeaways
- स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक
- एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर
- मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त
- त्वचा की सुरक्षा के लिए लाभकारी
- रक्त को शुद्ध करने में सहायक
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जैसे-जैसे गर्मियों का मौसम शुरू होता है, रसीले फलों की भरमार बाजार में देखने को मिलती है। तरबूज और खरबूज के साथ ही शहतूत भी मार्च और अप्रैल के महीनों में उपलब्ध होता है, लेकिन इसकी विशेषता यह है कि यह केवल सीमित समय के लिए मिलता है।
शहतूत को अन्य भाषाओं में 'तूत' या 'मलबेरी' के नाम से जाना जाता है। लोग अक्सर इसके स्वाद की तारीफ करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि यह स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है? यह पेड़ अपनी रसीले फलों, पत्तियों और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है।
आयुर्वेद में शहतूत की छाल, फल और जड़ को गुणों का खजाना माना गया है। सदियों से इनका उपयोग कई बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है, जैसे खांसी, बुखार और डायबिटीज। शहतूत के फल में विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और पाचन में मदद करती है। इसे पित्तवातशामक माना जाता है, जो रक्त को शुद्ध करने में सहायक है। इसका स्वाद मीठा और खट्टा दोनों होता है, जो शरीर में बढ़ते वात को संतुलित करने में मदद करता है।
शहतूत की छाल का काढ़ा और चूर्ण भी कई रोगों में फायदेमंद होता है, लेकिन इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना अनिवार्य है।
इन फलों में एंटी-एजिंग गुण होते हैं, जो बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करते हैं और झुर्रियों की समस्या से बचाते हैं। यदि आपके चेहरे पर दाग-धब्बे और सूखापन है, तो शहतूत का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। यह चेहरे को नई चमक प्रदान करता है और आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। विटामिन 'ए' का अच्छा स्रोत होने के कारण यह आंखों की रोशनी को बेहतर बनाता है।
शहतूत में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो त्वचा को बाहरी संक्रमण से सुरक्षित रखते हैं। यह एक्जिमा और सोरायसिस जैसे रोगों में भी दवा की तरह कार्य करता है। इसके अलावा, शहतूत में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे मधुमेह के रोगी भी इसका सेवन कर सकते हैं। यह रक्त में शर्करा के स्तर को संतुलित रखने में सहायक है और इसमें आयरन की मात्रा भी अधिक होती है। शरीर में रक्त की पूर्ति और एनीमिया से बचने के लिए इसका सेवन रोजाना किया जा सकता है।