11 अक्टूबर 2026
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जेपीएनआईसी की लागत ₹17 करोड़ से ₹850 करोड़: ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव से माँगा जवाब

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जेपीएनआईसी की लागत ₹17 करोड़ से ₹850 करोड़: ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव से माँगा जवाब

सारांश

जेपी जयंती पर सपा के विरोध प्रदर्शन को 'राजनीतिक नाटक' बताते हुए UP उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव से एक बड़ा सवाल दागा — जेपीएनआईसी की लागत ₹17 करोड़ से ₹850 करोड़ कैसे पहुँची और फाइव स्टार सुविधाएँ किसके लिए बनाई गईं?

मुख्य बातें

UP उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 11 अक्टूबर 2026 को जेपी जयंती पर अखिलेश यादव के जेपीएनआईसी विरोध को 'राजनीतिक नाटक' करार दिया।
जेपीएनआईसी की प्रारंभिक लागत ₹17 करोड़ से बढ़कर ₹850 करोड़ पहुँचने पर जवाबदेही माँगी गई।
परियोजना में फाइव स्टार सुविधाओं और स्विमिंग पूल निर्माण पर सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाए गए।
योगी सरकार ने जेपीएनआईसी को बेचने के आरोपों को नकारते हुए इसे बेहतर प्रबंधन के लिए लीज पर दिए जाने की बात कही।
पाठक ने सपा पर जेपी और लोहिया के नाम का इस्तेमाल कार्यकाल के सवालों से बचने के लिए करने का आरोप लगाया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 11 अक्टूबर 2026 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा जेपीएनआईसी (JPNIC) पर किए गए विरोध प्रदर्शन को 'राजनीतिक नाटक' करार दिया। पाठक ने जानना चाहा कि परियोजना की प्रारंभिक लागत जो करीब ₹17 करोड़ बताई गई थी, वह सपा सरकार के कार्यकाल में बढ़कर ₹850 करोड़ तक कैसे पहुँची।

लागत विस्फोट पर जवाबदेही की माँग

उपमुख्यमंत्री पाठक ने सवाल उठाया कि जेपीएनआईसी की लागत में इतनी भारी बढ़ोतरी के पीछे क्या कारण थे। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में जनहित के बजाय फाइव स्टार सुविधाएँ और स्विमिंग पूल जैसी व्यवस्थाएँ जोड़ी गईं, जिनकी एक सार्वजनिक स्मारक संस्थान में आवश्यकता संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि जनता की मेहनत की कमाई का इस तरह उपयोग किए जाने पर स्पष्टीकरण अनिवार्य है।

सपा पर राजनीतिक पाखंड का आरोप

पाठक ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी जेपी और डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम का उपयोग अपने कार्यकाल के सवालों से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा, 'लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने अपना सम्पूर्ण जीवन भ्रष्टाचार, कदाचार और परिवारवाद के विरुद्ध संघर्ष में समर्पित किया। ऐसे महापुरुषों के नाम पर राजनीतिक प्रदर्शन करने के बजाय उनके आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।'

लीज व्यवस्था का बचाव

उपमुख्यमंत्री ने जेपीएनआईसी को बेचे जाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि योगी सरकार ने संस्थान के बेहतर संचालन और प्रबंधन के उद्देश्य से इसे लीज पर देने की व्यवस्था की है — यह कदम सार्वजनिक संपत्ति की बर्बादी रोकने और उसका अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुटता की अपील

पाठक ने जनता से भ्रष्टाचार, कदाचार और परिवारवाद के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के विचारों को आत्मसात करना और उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्चे सम्मान की अभिव्यक्ति है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सपा के बीच राजनीतिक तीखापन लगातार बढ़ रहा है।

आगे क्या

गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने अभी तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। जेपीएनआईसी की लीज व्यवस्था और लागत वृद्धि के विस्तृत दस्तावेज़ सार्वजनिक न होने के कारण विपक्ष का दबाव जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सपा के लिए जेपी की विरासत को अपने पक्ष में भुनाने का। असली सवाल यह है कि ₹17 करोड़ से ₹850 करोड़ तक की लागत वृद्धि का ऑडिट सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ। लीज बनाम बिक्री की बहस तब तक अधूरी रहेगी जब तक लीज की शर्तें और लाभार्थी पारदर्शी नहीं होते। 2027 के चुनावों से पहले इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े नैरेटिव युद्ध की आहट हैं।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएनआईसी (JPNIC) क्या है और यह विवाद क्यों है?
जेपीएनआईसी यानी जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर लखनऊ में स्थित एक सार्वजनिक संस्थान है। विवाद इसलिए है क्योंकि इसकी लागत कथित तौर पर ₹17 करोड़ से बढ़कर ₹850 करोड़ पहुँच गई और परियोजना में फाइव स्टार सुविधाएँ व स्विमिंग पूल जोड़े गए, जिन पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं।
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव से किस बात का जवाब माँगा?
UP उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव से पूछा कि सपा के कार्यकाल में जेपीएनआईसी की लागत ₹17 करोड़ से ₹850 करोड़ तक क्यों और कैसे बढ़ी। उन्होंने फाइव स्टार सुविधाओं और स्विमिंग पूल पर जनता का पैसा खर्च किए जाने का भी जवाब माँगा।
क्या जेपीएनआईसी को बेचा जा रहा है?
नहीं, योगी सरकार ने बिक्री के आरोपों को गलत बताया है। सरकार के अनुसार जेपीएनआईसी को बेचा नहीं गया, बल्कि बेहतर संचालन और प्रबंधन के लिए लीज पर दिया गया है। हालाँकि, लीज की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
सपा ने जेपी जयंती पर जेपीएनआईसी पर प्रदर्शन क्यों किया?
समाजवादी पार्टी ने 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर जेपीएनआईसी की लीज व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया। हालाँकि, BJP ने इस प्रदर्शन को 'राजनीतिक नाटक' करार देते हुए कहा कि सपा अपने कार्यकाल के सवालों से ध्यान भटकाने के लिए जेपी का नाम इस्तेमाल कर रही है।
इस विवाद का UP की राजनीति पर क्या असर होगा?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में यह विवाद BJP और सपा के बीच भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन को लेकर बड़े नैरेटिव युद्ध का हिस्सा बन सकता है। जेपीएनआईसी का मुद्दा दोनों दलों के लिए चुनावी प्रचार में एक प्रमुख मुद्दा बनने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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