राजभर का अखिलेश पर हमला: JPNIC के ₹865 करोड़ का हिसाब माँगा, अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 11 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार करते हुए जेपी नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) के निर्माण पर खर्च हुए कथित ₹865 करोड़ का सार्वजनिक जवाब माँगा। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राजभर ने अखिलेश यादव से यह भी पूछा कि परियोजना अधूरी क्यों छोड़ी गई और संचालन समिति में परिवार के सदस्यों को क्यों शामिल किया गया था।
मुख्य आरोप: ₹865 करोड़ और अधूरा निर्माण
राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि लोकनायक के नाम पर JPNIC जैसी परियोजना बनाने के लिए ₹865 करोड़ खर्च किए गए, फिर भी निर्माण अधूरा रह गया। उन्होंने सीधे सवाल दागा कि इस राशि में से कितना हिस्सा वास्तव में निर्माण कार्य में लगा और कितना अन्यत्र गया। राजभर के अनुसार, यह जनता के पैसों की बर्बादी का मामला है।
राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा — 'आखिर लोकनायक के नाम पर आपने JPNIC जैसा लूट का अड्डा बनाने का जो हसीन सपना पाला था, उसे ₹865 करोड़ खर्च करके भी अधूरा क्यों छोड़ दिया? बता दीजिए ₹865 करोड़ में आपके जेब में कितना गया?'
परिवारवाद पर सवाल
राजभर ने JPNIC की संचालन समिति की संरचना पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, इस समिति में अखिलेश यादव के साथ उनकी पत्नी डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और सैफई परिवार के अन्य सदस्यों को रखा गया था। राजभर ने पूछा कि जनता के पैसों से बनी इमारत के संचालन में परिवार को क्यों शामिल किया गया था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रस्तावित होटल, क्लब और जिम की कमाई आखिरकार किसकी जेब में जानी थी — यह परियोजना किसके आर्थिक हित में थी।
अयोध्या चुनाव की चुनौती
राजभर ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हवाला देते हुए कहा कि अयोध्या से चुनाव लड़ने की अखिलेश यादव की चुनौती मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर ली है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा — 'अब पीछे नहीं भागिएगा। वरना आपके लोडर कहेंगे कि हमारा नेता एसी, पीसी और ट्विटर से बाहर ही नहीं निकलता है।'
राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे आमंत्रण देते हुए कहा कि अयोध्या से नामांकन भरकर चुनाव लड़ें, ताकि उन्हें पता चल सके कि इटावा-मैनपुरी के बाहर उनकी वास्तविक राजनीतिक स्थिति क्या है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो रही है। JPNIC परियोजना सपा के शासनकाल में शुरू हुई थी और कथित तौर पर अधूरी रही। गौरतलब है कि राजभर पहले समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थे, लेकिन बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा बन गए और अब योगी सरकार में मंत्री हैं। उनके इस हमले को सपा के विरुद्ध भाजपा की व्यापक चुनावी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या
राजभर के इस हमले पर समाजवादी पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, JPNIC और अयोध्या चुनाव जैसे मुद्दे आने वाले हफ्तों में और धार पकड़ सकते हैं, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच चुनावी बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है।