30 अगस्त 2026
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राखी घोटाले पर ओपी राजभर का अखिलेश पर वार: ₹11,000 का वादा, दिए सिर्फ ₹1,100

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राखी घोटाले पर ओपी राजभर का अखिलेश पर वार: ₹11,000 का वादा, दिए सिर्फ ₹1,100

सारांश

रक्षा बंधन पर ₹11,000 का वादा और ₹1,100 की हकीकत — मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर 'राखी घोटाले' का सीधा आरोप लगाया। जेपीएनआईसी की लागत ₹200 करोड़ से ₹865 करोड़ तक पहुँचने पर भी सवाल उठाए। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ओबीसी राजनीति गरमाई।

मुख्य बातें

मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 30 अगस्त को अंबेडकर नगर में अखिलेश यादव पर रक्षा बंधन घोटाले का आरोप लगाया।
आरोप: ₹11,000 के इनाम की घोषणा की, लेकिन महिलाओं को दिए गए सिर्फ ₹1,100 के लिफाफे।
जेपीएनआईसी की शुरुआती लागत ₹200 करोड़ थी, जो बढ़कर ₹865 करोड़ हो गई — राजभर ने इसे जनता के धन का दुरुपयोग बताया।
योगी सरकार के दावे: 9 वर्षों में 9.5 लाख सरकारी नौकरियाँ; 6 महीनों में 1 लाख नियुक्ति पत्र और दिए जाएंगे।
राजभर ने 27% ओबीसी आरक्षण के उपवर्गीकरण की माँग दोहराई, 3 सितंबर 2013 के हाई कोर्ट आदेश का हवाला दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 30 अगस्त को अंबेडकर नगर में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने रक्षा बंधन जैसे पवित्र त्योहार को भी घोटाले में बदल दिया — पहले ₹11,000 के इनाम की घोषणा की और बाद में महिलाओं को सिर्फ ₹1,100 के लिफाफे थमा दिए।

जेपीएनआईसी विवाद: लागत ₹200 करोड़ से बढ़कर ₹865 करोड़

राजभर ने जेपीएनआईसी (JPNIC) परियोजना को लेकर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव को पहले यह बताना चाहिए कि जेपीएनआईसी जनता के लिए बनी इमारत थी या सैफई के लिए कोई प्राइवेट बंगला।' उनके अनुसार, इस परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत ₹200 करोड़ थी, लेकिन वास्तविक खर्च ₹865 करोड़ तक पहुँच गया — जिसे उन्होंने जनता के कर-धन के दुरुपयोग का उदाहरण बताया। राजभर ने कहा कि योगी सरकार ने इस परिसर को पीपीपी मॉडल के तहत पुनः जनता के लिए खोलने का निर्णय लिया है, और इसीलिए विपक्ष को आपत्ति हो रही है।

कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य पर तुलनात्मक दावे

राजभर ने दावा किया कि सपा शासनकाल में पूर्वांचल के गरीब बच्चे इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते थे, जबकि वर्तमान योगी सरकार में 12 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि 2016 की तुलना में डकैती में 90 प्रतिशत, लूट में 85 प्रतिशत, हत्या में 47 प्रतिशत और दुष्कर्म की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश के कार्यकाल में हर ज़िले में एक माफिया सक्रिय था और लाल टोपी वाले थानों पर कब्जा करते थे।

रोज़गार और भर्ती: योगी सरकार के दावे

राजभर के अनुसार, योगी सरकार ने 9 वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के ज़रिये 9.5 लाख सरकारी नौकरियाँ दी हैं और आगामी 6 महीनों में 1 लाख नियुक्ति पत्र और दिए जाएंगे। उन्होंने सपा सरकार पर आरोप लगाया कि उस दौर में भर्ती के विज्ञापन निकलते थे और 'चाचा-भतीजा' की दुकान खुल जाती थी — यानी पैसे लेकर नौकरियाँ बेची जाती थीं।

ओबीसी आरक्षण: उपवर्गीकरण की माँग

राजभर ने ओबीसी आरक्षण के उपवर्गीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने 3 सितंबर 2013 के हाई कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल 12 जातियाँ ही उठा रही हैं और इसे शेष जातियों में बाँटा जाना चाहिए। उन्होंने 2001 में राजनाथ सिंह द्वारा हुकुम सिंह की अध्यक्षता में गठित सामाजिक न्याय समिति का उल्लेख किया, जिसने 27 प्रतिशत को 7, 9 और 11 प्रतिशत में विभाजित करने की सिफारिश की थी। राजभर ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति डीएम, एसपी, मुख्यमंत्री या राज्यपाल बन चुका है, उसके बेटे को आरक्षण की ज़रूरत नहीं — आरक्षण केवल उन गरीबों का हक है जो विकास की मुख्यधारा से अभी तक जुड़ नहीं पाए हैं।

आगे की राजनीतिक दिशा

यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं। भाजपा गठबंधन और सपा के बीच ओबीसी और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा तेज़ होती दिख रही है। राजभर का यह हमला स्पष्ट रूप से उसी चुनावी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। जेपीएनआईसी की लागत वृद्धि का आँकड़ा यदि सही है, तो यह सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में लागत-विस्फोट की उस पुरानी समस्या की याद दिलाता है जो किसी एक दल तक सीमित नहीं रही। ओबीसी आरक्षण उपवर्गीकरण की माँग संवैधानिक और न्यायिक दृष्टि से वैध है, लेकिन इसे चुनावी मंच से उठाना इसकी विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है। 2027 से पहले पिछड़े वर्गों को लेकर यह प्रतिस्पर्धा दोनों पक्षों की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर राखी घोटाले का क्या आरोप लगाया?
राजभर के अनुसार, अखिलेश यादव ने रक्षा बंधन पर महिलाओं को ₹11,000 देने की घोषणा की थी, लेकिन वास्तव में उन्हें सिर्फ ₹1,100 के लिफाफे दिए गए। राजभर ने इसे 'बहनों के त्योहार को घोटाले में बदलना' करार दिया।
जेपीएनआईसी विवाद क्या है और इसकी लागत कितनी बढ़ी?
जेपीएनआईसी एक सार्वजनिक परियोजना है जिसकी शुरुआती अनुमानित लागत ₹200 करोड़ थी, लेकिन वास्तविक खर्च ₹865 करोड़ तक पहुँच गया। राजभर ने इसे जनता के कर-धन के दुरुपयोग का उदाहरण बताया और कहा कि योगी सरकार अब इसे पीपीपी मॉडल के तहत जनता के लिए पुनः खोल रही है।
योगी सरकार ने कितनी सरकारी नौकरियाँ दी हैं?
राजभर के दावे के अनुसार, योगी सरकार ने 9 वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के ज़रिये 9.5 लाख सरकारी नौकरियाँ दी हैं। इसके अलावा अगले 6 महीनों में 1 लाख और नियुक्ति पत्र दिए जाने का दावा किया गया है।
ओबीसी आरक्षण उपवर्गीकरण पर राजभर का क्या कहना है?
राजभर ने 3 सितंबर 2013 के हाई कोर्ट आदेश का हवाला देते हुए कहा कि 27% ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल 12 जातियाँ उठा रही हैं। उन्होंने माँग की कि इसे शेष पिछड़ी जातियों में बाँटा जाए और संपन्न ओबीसी परिवारों के लिए आरक्षण समाप्त किया जाए।
2016 की तुलना में उत्तर प्रदेश में अपराध में कितनी कमी आई है?
राजभर ने दावा किया कि 2016 की तुलना में डकैती 90%, लूट 85%, हत्या 47% और दुष्कर्म की घटनाएँ 53% घटी हैं। ये आँकड़े सरकारी दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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