राखी घोटाले पर ओपी राजभर का अखिलेश पर वार: ₹11,000 का वादा, दिए सिर्फ ₹1,100
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 30 अगस्त को अंबेडकर नगर में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने रक्षा बंधन जैसे पवित्र त्योहार को भी घोटाले में बदल दिया — पहले ₹11,000 के इनाम की घोषणा की और बाद में महिलाओं को सिर्फ ₹1,100 के लिफाफे थमा दिए।
जेपीएनआईसी विवाद: लागत ₹200 करोड़ से बढ़कर ₹865 करोड़
राजभर ने जेपीएनआईसी (JPNIC) परियोजना को लेकर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव को पहले यह बताना चाहिए कि जेपीएनआईसी जनता के लिए बनी इमारत थी या सैफई के लिए कोई प्राइवेट बंगला।' उनके अनुसार, इस परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत ₹200 करोड़ थी, लेकिन वास्तविक खर्च ₹865 करोड़ तक पहुँच गया — जिसे उन्होंने जनता के कर-धन के दुरुपयोग का उदाहरण बताया। राजभर ने कहा कि योगी सरकार ने इस परिसर को पीपीपी मॉडल के तहत पुनः जनता के लिए खोलने का निर्णय लिया है, और इसीलिए विपक्ष को आपत्ति हो रही है।
कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य पर तुलनात्मक दावे
राजभर ने दावा किया कि सपा शासनकाल में पूर्वांचल के गरीब बच्चे इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते थे, जबकि वर्तमान योगी सरकार में 12 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि 2016 की तुलना में डकैती में 90 प्रतिशत, लूट में 85 प्रतिशत, हत्या में 47 प्रतिशत और दुष्कर्म की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश के कार्यकाल में हर ज़िले में एक माफिया सक्रिय था और लाल टोपी वाले थानों पर कब्जा करते थे।
रोज़गार और भर्ती: योगी सरकार के दावे
राजभर के अनुसार, योगी सरकार ने 9 वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के ज़रिये 9.5 लाख सरकारी नौकरियाँ दी हैं और आगामी 6 महीनों में 1 लाख नियुक्ति पत्र और दिए जाएंगे। उन्होंने सपा सरकार पर आरोप लगाया कि उस दौर में भर्ती के विज्ञापन निकलते थे और 'चाचा-भतीजा' की दुकान खुल जाती थी — यानी पैसे लेकर नौकरियाँ बेची जाती थीं।
ओबीसी आरक्षण: उपवर्गीकरण की माँग
राजभर ने ओबीसी आरक्षण के उपवर्गीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने 3 सितंबर 2013 के हाई कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल 12 जातियाँ ही उठा रही हैं और इसे शेष जातियों में बाँटा जाना चाहिए। उन्होंने 2001 में राजनाथ सिंह द्वारा हुकुम सिंह की अध्यक्षता में गठित सामाजिक न्याय समिति का उल्लेख किया, जिसने 27 प्रतिशत को 7, 9 और 11 प्रतिशत में विभाजित करने की सिफारिश की थी। राजभर ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति डीएम, एसपी, मुख्यमंत्री या राज्यपाल बन चुका है, उसके बेटे को आरक्षण की ज़रूरत नहीं — आरक्षण केवल उन गरीबों का हक है जो विकास की मुख्यधारा से अभी तक जुड़ नहीं पाए हैं।
आगे की राजनीतिक दिशा
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं। भाजपा गठबंधन और सपा के बीच ओबीसी और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा तेज़ होती दिख रही है। राजभर का यह हमला स्पष्ट रूप से उसी चुनावी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।