29 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'राखी घोटाला': राजभर का अखिलेश पर आरोप — ₹11,000 का वादा, मिले सिर्फ ₹1,100

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'राखी घोटाला': राजभर का अखिलेश पर आरोप — ₹11,000 का वादा, मिले सिर्फ ₹1,100

सारांश

रक्षाबंधन का त्योहार उत्तर प्रदेश में राजनीतिक घमासान का मैदान बन गया। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के कार्यालय में हुए लिफाफा वितरण को 'राखी घोटाला' बताया — आरोप है कि ₹11,000 का वादा कर बुलाई गई महिलाओं को महज ₹1,100 दिए गए।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 29 अगस्त 2026 को अखिलेश यादव पर 'राखी घोटाले' का आरोप लगाया।
कथित तौर पर महिलाओं को ₹11,000 देने का वादा कर लखनऊ में सपा कार्यालय बुलाया गया।
महिलाओं को कथित रूप से केवल ₹1,100 के लिफाफे दिए गए — वादे से ₹9,900 कम।
राजभर ने एक्स पोस्ट के ज़रिए अखिलेश यादव के संगठन के भीतरी लोगों पर हेराफेरी का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 29 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजभर का कहना है कि रक्षाबंधन के अवसर पर लखनऊ स्थित अखिलेश यादव के कार्यालय में आयोजित लिफाफा वितरण कार्यक्रम में महिलाओं को ₹11,000 देने का प्रलोभन देकर बुलाया गया, लेकिन कथित तौर पर उन्हें केवल ₹1,100 के लिफाफे थमाए गए। राजभर ने इसे सार्वजनिक रूप से 'राखी घोटाला' करार दिया है।

मुख्य आरोप: क्या हुआ कार्यक्रम में?

राजभर के अनुसार, सपा कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं को ₹11,000 प्रति व्यक्ति देने की बात कहकर आमंत्रित किया गया था। कथित तौर पर कार्यक्रम में पहुँचने पर महिलाओं को ₹1,100 के लिफाफे दिए गए — यानी वादे से ₹9,900 कम। राजभर ने दावा किया कि कुछ महिलाओं ने मौके पर ही लिफाफा खोलकर जाँच की और राशि में भारी अंतर पाया।

राजभर ने आरोप लगाया कि प्रत्येक लिफाफे से कथित तौर पर ₹10,000 की हेराफेरी की गई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह गड़बड़ी अखिलेश यादव के अपने संगठन के भीतर के लोगों द्वारा की गई।

राजभर की एक्स पोस्ट: सीधे शब्दों में हमला

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'अखिलेश जी, एक कहावत है कि लोगों का स्टेटस भले बदल जाए, लेकिन आदत नहीं बदल सकती। आप लोग सत्ता में रहें या न रहें, अपने खटकरमों से बाज नहीं आते।' उन्होंने आगे लिखा कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहार पर इस तरह का आचरण अपेक्षित नहीं था और कम से कम बहनों का मान रखा जाना चाहिए था।

राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव को 'शाह-ए-बेखबर' कहते हुए यह भी सुझाव दिया कि उनके अपने संगठन के लोगों ने यह हेराफेरी इसी भरोसे की कि नेतृत्व को भनक नहीं लगेगी।

राजभर की सलाह: 'विभीषणों' से छुटकारा पाएँ

राजभर ने अपने पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव को सलाह देते हुए लिखा कि जो लोग संगठन के भीतर से इस तरह की हरकतें कर रहे हैं, उनसे जितनी जल्दी छुटकारा मिले उतना बेहतर होगा। उन्होंने इन लोगों को 'विभीषण' की संज्ञा देते हुए कहा कि ये सब 'लंका लगाकर ही मानेंगे।'

गौरतलब है कि राजभर उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार में सहयोगी हैं और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा मुख्य विपक्षी दल है। इस आरोप को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

इस मामले में समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजभर के आरोप पूरी तरह एकपक्षीय हैं और सपा का पक्ष अभी अज्ञात है। राष्ट्र प्रेस ने सपा से टिप्पणी माँगी है।

आगे क्या

यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में रक्षाबंधन के बाद एक नया मोड़ ले सकता है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह सपा की संगठनात्मक साख पर सवाल खड़े करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप आगामी चुनावी मौसम में सपा की महिला मतदाताओं के बीच छवि को प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है — सपा का पक्ष सामने आना बाकी है। यह ध्यान देने योग्य है कि राजभर BJP के नेतृत्व वाली सरकार के सहयोगी हैं और यह आरोप ऐसे समय आए हैं जब उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी बढ़ रही है। रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक त्योहार को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना दोनों पक्षों के लिए जोखिम भरा हो सकता है — मतदाता इसे अवसरवाद के रूप में भी देख सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सपा इस आरोप का खंडन करेगी या चुप्पी साधेगी, क्योंकि दोनों ही स्थितियाँ उसके लिए राजनीतिक नुकसान उठा सकती हैं।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजभर ने अखिलेश यादव पर 'राखी घोटाले' का क्या आरोप लगाया?
राजभर का आरोप है कि सपा कार्यालय, लखनऊ में रक्षाबंधन पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं को ₹11,000 देने का वादा कर बुलाया गया, लेकिन कथित तौर पर उन्हें केवल ₹1,100 के लिफाफे दिए गए। उन्होंने इसे 'राखी घोटाला' कहा और प्रति लिफाफे ₹10,000 की हेराफेरी का दावा किया।
यह लिफाफा वितरण कार्यक्रम कब और कहाँ हुआ?
राजभर के अनुसार यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के आसपास, 29 अगस्त 2026 से दो दिन पहले, लखनऊ में अखिलेश यादव के कार्यालय में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में महिलाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों पर क्या कहा?
अभी तक समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है। राजभर के आरोप एकपक्षीय हैं और सपा का स्पष्टीकरण आना बाकी है।
ओम प्रकाश राजभर कौन हैं और उनका सपा से क्या संबंध है?
ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वे BJP के नेतृत्व वाली सरकार के सहयोगी हैं, जबकि अखिलेश यादव की सपा मुख्य विपक्षी दल है।
राजभर ने अखिलेश यादव को क्या सलाह दी?
राजभर ने अपने एक्स पोस्ट में अखिलेश यादव को सलाह दी कि वे अपने संगठन के उन लोगों से जल्द छुटकारा पाएँ जो इस तरह की हेराफेरी कर रहे हैं। उन्होंने इन लोगों को 'विभीषण' कहा और कहा कि ये 'लंका लगाकर ही मानेंगे।'
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले