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जेपीएनआईसी पर योगी का हमला: '₹864 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा — यह सपा के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है'

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जेपीएनआईसी पर योगी का हमला: '₹864 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा — यह सपा के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है'

सारांश

₹200 करोड़ की परियोजना पर ₹864 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरी — सीएम योगी ने जेपीएनआईसी को सपा के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक करार देते हुए अखिलेश यादव की समिति भंग की और वसूली का ऐलान किया। यह महज एक इमारत का विवाद नहीं, बल्कि 2027 से पहले यूपी की राजनीतिक जमीन पर सीधा प्रहार है।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने जेपीएनआईसी को सपा के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक बताया।
परियोजना की मूल लागत ₹200 करोड़ थी, लेकिन ₹864 करोड़ खर्च होने के बाद भी यह अधूरी रही।
अखिलेश यादव , डिंपल यादव व अन्य को शामिल कर बनाई गई सपा समिति भंग; केंद्र लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपा गया।
सरकार ने जनता के पैसे की वसूली का प्रयास करने की घोषणा की।
स्नातक अंतिम वर्ष की 50,000 बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर स्कूटी देने की घोषणा।
60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को निगम बसों में स्थायी निशुल्क यात्रा सुविधा लागू।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 अगस्त को लखनऊ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) समाजवादी पार्टी (सपा) के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में इस केंद्र को पार्टी की 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अड्डे' की तरह संचालित किया गया।

मुख्य आरोप और लागत विवाद

मुख्यमंत्री ने कहा कि जेपीएनआईसी की मूल लागत ₹200 करोड़ आँकी गई थी, लेकिन ₹864 करोड़ खर्च होने के बावजूद यह परियोजना अधूरी रही। जो काम 18 महीनों में पूरा होना था, वह दो साल बाद भी लंबित था। उन्होंने कहा, 'यह पैसा सैफई सिंडिकेट का नहीं, उत्तर प्रदेश की जनता का है — और जनता के खजाने पर किसी राजनीतिक दल को डकैती डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती।'

योगी के अनुसार, सेंटर पर सपा का नियंत्रण बनाए रखने के लिए एक समिति गठित की गई थी, जिसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, अखिलेश के निजी सचिव और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी शामिल थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने वह समिति भंग कर दी है और अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के मार्गदर्शन में इसे संचालित किया जाएगा।

सरकार की कार्रवाई और वसूली का इरादा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार न केवल इस केंद्र को वापस ले चुकी है, बल्कि खर्च की गई धनराशि की वसूली का भी प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे महापुरुष के नाम पर इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता और उनकी स्मृति को अब सही ढंग से जीवंत किया जाएगा।

योगी ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार अपराध, बेईमानी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

वीरांगना अवंतीबाई लोधी प्रतिमा का लोकार्पण

मुख्यमंत्री रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य अश्वारोही प्रतिमा के लोकार्पण के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम क्षत्रिय लोधी महासभा के तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

योगी ने कहा कि अवंतीबाई लोधी ने मात्र 26 वर्ष की आयु में 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों को चुनौती दी थी। उनके सम्मान में अलीगढ़ में एक स्टेडियम का निर्माण भी कराया जा रहा है।

महिला सशक्तीकरण और घोषणाएँ

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि स्नातक अंतिम वर्ष की 50,000 बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर स्कूटी प्रदान की जाएंगी। उन्होंने बताया कि 27, 28 और 29 अगस्त को महिलाओं को परिवहन निगम व सिटी बस सेवा में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। इसके अलावा, 60 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को अब निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा स्थायी रूप से शुरू की गई है।

उन्होंने मिशन शक्ति अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान और स्वावलंबन से जुड़ा है। साथ ही उन्होंने तीन महिला बटालियनों — ऊदा देवी, झलकारी बाई और अवंतीबाई लोधी के नाम पर — के गठन का भी उल्लेख किया, जो लखनऊ, गोरखपुर और बदायूं में निर्माणाधीन हैं।

सपा पर तीखे प्रहार

योगी ने कहा कि सपा 'दंगों की बादशाह' रही है और कर्फ्यू उसकी पहचान। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान खाली जमीनों पर कब्जे और महिलाओं में भय का माहौल था। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर सपा नेताओं ने एक शब्द की श्रद्धांजलि तक नहीं दी।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और समाज की एकता व महापुरुषों के आदर्शों को आगे बढ़ाने की अपील की।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वसूली का दावा तब तक खोखला रहेगा जब तक कोई एफआईआर, ईडी जाँच या न्यायिक कार्यवाही सामने न आए। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी परियोजनाओं में लागत वृद्धि किसी एक दल की विशेषता नहीं रही — असली परीक्षा यह है कि क्या भाजपा सरकार इस मामले में जवाबदेही का कोई ठोस ढाँचा खड़ा करती है, या यह भी महज चुनावी भाषण बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएनआईसी विवाद क्या है?
जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) लखनऊ में बनाया गया एक केंद्र है, जिसकी मूल लागत ₹200 करोड़ थी। सीएम योगी के अनुसार सपा शासनकाल में ₹864 करोड़ खर्च होने के बावजूद यह 18 महीने की समयसीमा से दो साल बाद भी अधूरा रहा और पार्टी ने इसे अपनी समिति के नियंत्रण में रखा।
सरकार ने जेपीएनआईसी के बारे में क्या कार्रवाई की है?
योगी सरकार ने अखिलेश यादव व अन्य सपा नेताओं से बनी समिति को भंग कर दिया है और केंद्र को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के मार्गदर्शन में सौंप दिया है। साथ ही राज्य के खजाने से खर्च ₹864 करोड़ की वसूली का प्रयास करने की भी घोषणा की गई है।
वीरांगना अवंतीबाई लोधी कौन थीं और उनकी प्रतिमा क्यों स्थापित की गई?
वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में मात्र 26 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र नेतृत्व किया था। उनकी भव्य अश्वारोही प्रतिमा का लोकार्पण सीएम योगी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने क्षत्रिय लोधी महासभा के कार्यक्रम में किया।
सीएम योगी ने महिलाओं के लिए कौन-सी नई घोषणाएँ कीं?
मुख्यमंत्री ने स्नातक अंतिम वर्ष की 50,000 बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर स्कूटी देने की घोषणा की। इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को सरकारी निगम बसों में स्थायी निशुल्क यात्रा सुविधा भी शुरू की गई है।
जेपीएनआईसी में सपा की समिति में कौन-कौन शामिल थे?
सीएम योगी के अनुसार इस समिति में अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, अखिलेश के निजी सचिव और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी शामिल थे। सरकार ने इस समिति को भंग कर केंद्र का नियंत्रण वापस ले लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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