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कैबिनेट का बड़ा फैसला: एटीएफ कीमतें स्थिर रखने को एयरलाइनों के लिए ₹10,000 करोड़ की मंजूरी

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कैबिनेट का बड़ा फैसला: एटीएफ कीमतें स्थिर रखने को एयरलाइनों के लिए ₹10,000 करोड़ की मंजूरी

सारांश

पश्चिम एशिया संकट से ATF कीमतें दो महीनों में ₹60.50 से ₹142 प्रति लीटर पहुँचने के बीच, मोदी कैबिनेट ने तेल विपणन कंपनियों को ₹10,000 करोड़ की ब्याज-मुक्त सहायता मंजूर की। यह योजना 36 महीनों तक एयरलाइनों को अपेक्षाकृत स्थिर ईंधन कीमतें सुनिश्चित करेगी, और कीमतें गिरने पर वसूली समेकित निधि में लौटेगी।

मुख्य बातें

मोदी कैबिनेट ने 3 जून 2026 को OMC को ₹10,000 करोड़ की ब्याज-मुक्त सहायता मंजूर की।
यह ATF मूल्य स्थिरीकरण सहायता 36 महीनों तक लागू रहेगी, वार्षिक समीक्षा के साथ।
ATF कीमत मार्च 2026 में ₹60.50/लीटर से बढ़कर मई 2026 में ₹142/लीटर पहुँची — लगभग 2.5 गुना उछाल।
योजना सभी अनुसूचित भारतीय एयरलाइनों के लिए, घरेलू व अंतरराष्ट्रीय परिचालन पर लागू।
भाग लेने वाली एयरलाइनों को तीन वर्षों तक केवल OMC से ATF खरीदना होगा।
कीमतें गिरने पर अंतर राशि भारत की समेकित निधि में वापस होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 3 जून 2026 को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में तेल विपणन कंपनियों (OMC) को ₹10,000 करोड़ की एकमुश्त ब्याज-मुक्त बजटीय सहायता देने को मंजूरी दी गई। इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के बीच एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की अस्थिर कीमतों के झटके से घरेलू एयरलाइनों को बचाना है।

योजना का ढाँचा

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सहायता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से OMC को अग्रिम राशि के रूप में दी जाएगी। यह ATF मूल्य स्थिरीकरण सहायता 36 महीनों तक लागू रहेगी, जिसकी प्रतिवर्ष समीक्षा होगी या तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी अग्रिम राशि की वसूली व समायोजन नहीं हो जाता — जो भी पहले हो।

कैसे काम करेगा तंत्र

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की आयात समता मूल्य (IPP) तय बेंचमार्क से ऊपर जाती है, तो OMC को होने वाले नुकसान की भरपाई इसी कोष से होगी। इसके विपरीत, जब वैश्विक ATF कीमतें नीचे आएँगी, तब अंतर की राशि OMC से वसूल कर भारत की समेकित निधि में वापस जमा कराई जाएगी।

योजना सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइनों के लिए उपलब्ध होगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों परिचालनों पर लागू होगी। भाग लेने वाली एयरलाइनों को अधिकतम तीन वर्षों तक केवल OMC से ही ATF खरीदना होगा। क्रियान्वयन के लिए एयरलाइनों और OMC के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) होगा, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय भी हस्ताक्षरकर्ता होंगे।

कीमतों में 2.5 गुना उछाल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय ATF कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2026 में ATF लगभग ₹60.50 प्रति लीटर था, जो मई 2026 तक बढ़कर ₹142 प्रति लीटर पहुँच गया — महज़ दो महीनों में लगभग 2.5 गुना की छलाँग। इससे एयरलाइनों की परिचालन लागत पर भारी दबाव पड़ा है, क्योंकि ATF किसी भी एयरलाइन की कुल लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।

व्यापक असर

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से एयरलाइनों को ईंधन लागत में अधिक स्थिरता और पूर्वानुमेयता मिलेगी, जिससे वे अचानक बढ़ने वाली कीमतों के जोखिम से बच सकेंगी। इसका सकारात्मक असर पर्यटन, होटल उद्योग, व्यापार, निर्यात, क्षेत्रीय विकास और निवेश जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ने की उम्मीद है।

आगे क्या

योजना के तहत MoU पर हस्ताक्षर के बाद वितरण शुरू होगा, और हर वर्ष इसकी समीक्षा की जाएगी। यह देखना अहम होगा कि वैश्विक तेल बाज़ार में अगले कुछ महीनों की चाल इस कोष पर कितना दबाव डालती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की यह सहायता प्रत्यक्ष रूप से एयरलाइनों के लिए नहीं, बल्कि OMC के लिए है — एक चतुर संरचनात्मक चयन जो ‘बेलआउट’ की राजनीतिक धारणा से बचाता है। असली परीक्षा वसूली तंत्र की पारदर्शिता पर होगी: क्या कीमतें गिरने पर OMC समय पर अंतर वापस लौटाएँगी, या यह राशि व्यावहारिक रूप से सब्सिडी बनकर रह जाएगी। दो महीनों में ATF का 2.5 गुना उछाल भारतीय विमानन की कच्चे तेल पर भारी निर्भरता और हेजिंग ढाँचे की कमज़ोरी को उजागर करता है। दीर्घकालिक समाधान ATF को GST के दायरे में लाने और घरेलू रिफाइनिंग समता में सुधार में निहित है — जिस पर यह घोषणा मौन है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैबिनेट ने एयरलाइनों के लिए क्या मंजूर किया है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून 2026 को तेल विपणन कंपनियों (OMC) को ₹10,000 करोड़ की एकमुश्त ब्याज-मुक्त बजटीय सहायता मंजूर की है, ताकि वे एयरलाइनों को अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों पर ATF उपलब्ध करा सकें। यह सहायता 36 महीनों तक लागू रहेगी।
ATF मूल्य स्थिरीकरण योजना कैसे काम करेगी?
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की आयात समता मूल्य (IPP) तय बेंचमार्क से ऊपर जाएगी, तब OMC के नुकसान की भरपाई इस कोष से होगी। जब कीमतें कम होंगी, तब OMC से अंतर की राशि वसूल कर भारत की समेकित निधि में वापस जमा कराई जाएगी।
ATF की कीमतें इतनी क्यों बढ़ीं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय ATF कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में ₹60.50 प्रति लीटर रही कीमत मई 2026 तक ₹142 प्रति लीटर पहुँच गई — लगभग 2.5 गुना की वृद्धि।
कौन-सी एयरलाइनें इस योजना का लाभ ले सकेंगी?
यह योजना सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइनों के लिए उपलब्ध होगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों परिचालनों पर लागू होगी। भाग लेने के लिए एयरलाइनों को OMC के साथ MoU करना होगा और अधिकतम तीन वर्षों तक केवल OMC से ही ATF खरीदना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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