कैबिनेट का बड़ा फैसला: एटीएफ कीमतें स्थिर रखने को एयरलाइनों के लिए ₹10,000 करोड़ की मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 3 जून 2026 को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में तेल विपणन कंपनियों (OMC) को ₹10,000 करोड़ की एकमुश्त ब्याज-मुक्त बजटीय सहायता देने को मंजूरी दी गई। इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के बीच एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की अस्थिर कीमतों के झटके से घरेलू एयरलाइनों को बचाना है।
योजना का ढाँचा
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सहायता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से OMC को अग्रिम राशि के रूप में दी जाएगी। यह ATF मूल्य स्थिरीकरण सहायता 36 महीनों तक लागू रहेगी, जिसकी प्रतिवर्ष समीक्षा होगी या तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी अग्रिम राशि की वसूली व समायोजन नहीं हो जाता — जो भी पहले हो।
कैसे काम करेगा तंत्र
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की आयात समता मूल्य (IPP) तय बेंचमार्क से ऊपर जाती है, तो OMC को होने वाले नुकसान की भरपाई इसी कोष से होगी। इसके विपरीत, जब वैश्विक ATF कीमतें नीचे आएँगी, तब अंतर की राशि OMC से वसूल कर भारत की समेकित निधि में वापस जमा कराई जाएगी।
योजना सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइनों के लिए उपलब्ध होगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों परिचालनों पर लागू होगी। भाग लेने वाली एयरलाइनों को अधिकतम तीन वर्षों तक केवल OMC से ही ATF खरीदना होगा। क्रियान्वयन के लिए एयरलाइनों और OMC के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) होगा, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय भी हस्ताक्षरकर्ता होंगे।
कीमतों में 2.5 गुना उछाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय ATF कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2026 में ATF लगभग ₹60.50 प्रति लीटर था, जो मई 2026 तक बढ़कर ₹142 प्रति लीटर पहुँच गया — महज़ दो महीनों में लगभग 2.5 गुना की छलाँग। इससे एयरलाइनों की परिचालन लागत पर भारी दबाव पड़ा है, क्योंकि ATF किसी भी एयरलाइन की कुल लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।
व्यापक असर
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से एयरलाइनों को ईंधन लागत में अधिक स्थिरता और पूर्वानुमेयता मिलेगी, जिससे वे अचानक बढ़ने वाली कीमतों के जोखिम से बच सकेंगी। इसका सकारात्मक असर पर्यटन, होटल उद्योग, व्यापार, निर्यात, क्षेत्रीय विकास और निवेश जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ने की उम्मीद है।
आगे क्या
योजना के तहत MoU पर हस्ताक्षर के बाद वितरण शुरू होगा, और हर वर्ष इसकी समीक्षा की जाएगी। यह देखना अहम होगा कि वैश्विक तेल बाज़ार में अगले कुछ महीनों की चाल इस कोष पर कितना दबाव डालती है।