PGWP नियम बदलाव पर सुनील जाखड़ की माँग: कनाडा पुनर्विचार करे, सैकड़ों भारतीय छात्र प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने 31 जुलाई 2026 को कनाडा सरकार द्वारा पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) नियमों में किए गए हालिया बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इन अचानक बदलावों से सैकड़ों भारतीय छात्र — जिनमें बड़ी संख्या पंजाब के विद्यार्थियों की है — गंभीर अनिश्चितता और मानसिक तनाव में हैं। जाखड़ ने भारत के विदेश मंत्रालय से तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की माँग की है।
क्या है पूरा मामला
इन छात्रों ने कनाडा के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला उस समय लिया था जब PGWP के नियम अलग थे। उन्होंने और उनके परिवारों ने दाखिले के वक्त लागू नीति के आधार पर अपना भविष्य, बहुमूल्य समय और लाखों रुपए दाँव पर लगाए थे। कनाडा सरकार के नए नियमों ने अब उनके करियर और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जाखड़ ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि हालाँकि हर संप्रभु राष्ट्र को नीतिगत बदलाव करने का अधिकार है, लेकिन ऐसे निर्णयों का खामियाजा उन छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए जिन्होंने पुरानी नीति के तहत दाखिला लिया था।
जाखड़ की माँगें
जाखड़ ने कनाडा सरकार से आग्रह किया कि वह प्रभावित छात्रों के लिए उचित राहत या कोई अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि उनके साथ अनुचित व्यवहार न हो। उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलाव भविष्य के दाखिलों पर लागू होने चाहिए, न कि उन छात्रों पर जो पहले से नामांकित हैं।
उन्होंने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से माँग की कि वह तुरंत राजनयिक चैनलों के माध्यम से कनाडा सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाए और प्रभावित भारतीय छात्रों के वैध हितों की रक्षा के लिए ठोस समाधान निकाले।
आम जनता और परिवारों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा संबंध पहले से ही कूटनीतिक तनाव से गुज़र रहे हैं। विदेश में उच्च शिक्षा के लिए कनाडा भारतीय छात्रों — विशेषकर पंजाब के युवाओं — की पहली पसंद रहा है। गौरतलब है कि पंजाब से हर वर्ष हज़ारों छात्र कनाडाई संस्थानों में दाखिला लेते हैं, और PGWP उनकी पढ़ाई के बाद कार्य-अनुभव की मुख्य राह है।
जाखड़ ने रेखांकित किया कि विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे भारतीय छात्र देश की मानव पूँजी का अमूल्य हिस्सा हैं और उनके भविष्य की सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
आगे क्या होगा
जाखड़ ने उम्मीद जताई कि भारत सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से लेगी और जल्द से जल्द कनाडा सरकार से बातचीत कर प्रभावित छात्रों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी। अब देखना यह होगा कि विदेश मंत्रालय इस राजनयिक माँग पर कितनी तेज़ी से कार्रवाई करता है और कनाडा सरकार पुनर्विचार के लिए तैयार होती है या नहीं।