सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रों ने किया स्वागत, मतदान अधिकार छिनने पर भड़के
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के छात्रों ने 31 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की उस महत्वपूर्ण टिप्पणी का स्वागत किया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि सवाल पूछने पर किसी भी छात्र को दंडित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर मतदान के बुनियादी अधिकार से वंचित करने का गंभीर आरोप लगाया और न्यायालय के निर्देशों को तत्काल लागू करने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
छात्रों के अनुसार, चुनाव के दिन यूनिवर्सिटी के गेट बंद कर दिए गए, जिससे कम से कम 50 छात्र अपना मत नहीं डाल सके। इस कदम को छात्रों ने लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन बताया और परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। घंटों तक धरने पर बैठे रहने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला।
डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के तृतीय वर्ष के छात्र रवि कुमार ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता — यही हमारा अधिकार है और इसीलिए हम आज यहाँ प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारे मतदान का अधिकार छीना जा रहा है।'
छात्रों की माँगें
डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के प्रथम वर्ष के छात्र नकुल कौशिक ने कहा, 'हमारा अधिकार है कि हम जवाबदेही माँगें। हमें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और उनके लिए जागरूक रहना चाहिए।' छात्रों ने माँग की कि यूनिवर्सिटी प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करे और छात्रों को डराने-धमकाने की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।
एक अन्य छात्र गौरिश कालिया ने कहा, 'इतिहास में भी बच्चों और छात्रों की आवाज़ को दबाया जाता रहा है। हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से सहमत हैं, लेकिन हमारे कॉलेज में इसका कोई लाभ नहीं हुआ। सुबह से हम धक्का-मुक्की कर रहे हैं और अपने हक की बात कर रहे हैं, पर कोई आश्वासन नहीं मिला।'
सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का महत्व
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की यह टिप्पणी शैक्षणिक संस्थानों में छात्र अधिकारों की सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में आई है। छात्रों का कहना है कि यह टिप्पणी ऐतिहासिक है और इसे देश के हर शिक्षण संस्थान में लागू किया जाना चाहिए। गौरिश कालिया ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन और कॉलेज प्रशासन दोनों को यह समझना होगा कि जब छात्र अपने हक की बात करें, तो उनके प्रति जवाबदेही सुनिश्चित हो।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
छात्रों के अनुसार, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को घंटों तक बाहर बैठाए रखा और उनकी माँगों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे की राह
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह विवाद भारत के उच्च शिक्षा परिसरों में छात्र अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी बहस का हिस्सा बनता जा रहा है।