1 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रों ने किया स्वागत, मतदान अधिकार छिनने पर भड़के

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रों ने किया स्वागत, मतदान अधिकार छिनने पर भड़के

सारांश

पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के समर्थन में उतरे — लेकिन उनकी असली लड़ाई परिसर के भीतर है। गेट बंद कर 50 से अधिक छात्रों का मत छिनने का आरोप यह सवाल खड़ा करता है कि अदालती निर्देश कागज़ से ज़मीन तक कब पहुँचेंगे।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है कि सवाल पूछने पर छात्रों को दंडित नहीं किया जा सकता।
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के छात्रों ने 31 अगस्त 2026 को इस टिप्पणी का स्वागत करते हुए प्रदर्शन किया।
छात्रों का आरोप है कि गेट बंद कर कम से कम 50 छात्रों को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया।
रवि कुमार , नकुल कौशिक और गौरिश कालिया सहित छात्रों ने प्रशासन से जवाबदेही की माँग की।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से घंटों बाद भी कोई आश्वासन या आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के छात्रों ने 31 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की उस महत्वपूर्ण टिप्पणी का स्वागत किया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि सवाल पूछने पर किसी भी छात्र को दंडित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर मतदान के बुनियादी अधिकार से वंचित करने का गंभीर आरोप लगाया और न्यायालय के निर्देशों को तत्काल लागू करने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

छात्रों के अनुसार, चुनाव के दिन यूनिवर्सिटी के गेट बंद कर दिए गए, जिससे कम से कम 50 छात्र अपना मत नहीं डाल सके। इस कदम को छात्रों ने लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन बताया और परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। घंटों तक धरने पर बैठे रहने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला।

डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के तृतीय वर्ष के छात्र रवि कुमार ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता — यही हमारा अधिकार है और इसीलिए हम आज यहाँ प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारे मतदान का अधिकार छीना जा रहा है।'

छात्रों की माँगें

डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के प्रथम वर्ष के छात्र नकुल कौशिक ने कहा, 'हमारा अधिकार है कि हम जवाबदेही माँगें। हमें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और उनके लिए जागरूक रहना चाहिए।' छात्रों ने माँग की कि यूनिवर्सिटी प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करे और छात्रों को डराने-धमकाने की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।

एक अन्य छात्र गौरिश कालिया ने कहा, 'इतिहास में भी बच्चों और छात्रों की आवाज़ को दबाया जाता रहा है। हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से सहमत हैं, लेकिन हमारे कॉलेज में इसका कोई लाभ नहीं हुआ। सुबह से हम धक्का-मुक्की कर रहे हैं और अपने हक की बात कर रहे हैं, पर कोई आश्वासन नहीं मिला।'

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का महत्व

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की यह टिप्पणी शैक्षणिक संस्थानों में छात्र अधिकारों की सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में आई है। छात्रों का कहना है कि यह टिप्पणी ऐतिहासिक है और इसे देश के हर शिक्षण संस्थान में लागू किया जाना चाहिए। गौरिश कालिया ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन और कॉलेज प्रशासन दोनों को यह समझना होगा कि जब छात्र अपने हक की बात करें, तो उनके प्रति जवाबदेही सुनिश्चित हो।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

छात्रों के अनुसार, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को घंटों तक बाहर बैठाए रखा और उनकी माँगों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

आगे की राह

छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह विवाद भारत के उच्च शिक्षा परिसरों में छात्र अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी बहस का हिस्सा बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसी घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार पर क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है कि सवाल पूछने पर छात्रों को सजा नहीं दी जा सकती। यह टिप्पणी शैक्षणिक संस्थानों में छात्र अधिकारों की सुरक्षा के संदर्भ में की गई है और इसे छात्र संगठनों ने ऐतिहासिक बताया है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों का मतदान अधिकार कैसे छिना?
छात्रों के अनुसार, चुनाव के दिन यूनिवर्सिटी के गेट बंद कर दिए गए, जिससे कम से कम 50 छात्र अपना मत नहीं डाल सके। छात्रों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन बताते हुए प्रदर्शन किया।
पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की माँगों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
छात्रों के अनुसार, प्रशासन ने घंटों तक उन्हें बाहर बैठाए रखा और कोई आश्वासन नहीं दिया। प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
छात्रों की मुख्य माँगें क्या हैं?
छात्रों ने माँग की है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करे, छात्रों को डराने-धमकाने पर रोक लगाई जाए और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मतदान अधिकार से वंचित किए गए छात्रों के मामले में कार्रवाई की माँग की गई है।
क्या यह विवाद सिर्फ पंजाब यूनिवर्सिटी तक सीमित है?
छात्रों का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से देश भर में छात्रों की आवाज़ दबाई जाती रही है। उन्होंने माँग की है कि सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी को देश के हर शिक्षण संस्थान में लागू किया जाए, जो इस विवाद को एक व्यापक राष्ट्रीय मुद्दे से जोड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले